{"_id":"57e5803b4f1c1b9b3ba8246b","slug":"ruhelkhand-caught-three-suspects-in-the-university-mark-sheets","type":"story","status":"publish","title_hn":"रुहेलखंड विवि में पकड़ी तीन संदिग्ध मार्कशीट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रुहेलखंड विवि में पकड़ी तीन संदिग्ध मार्कशीट
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sat, 24 Sep 2016 12:51 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में सत्यापन के लिए आईं बीए की तीन मार्कशीट संदिग्ध पाई गई हैं। विश्वविद्यालय की ओर से जारी होने वाली सारी मार्कशीट में संबंधित अधिकारियों और कई अनुभागों के प्रभारियों के हस्ताक्षर के साथ उनके नाम की मुहर लगी होती है लेकिन इन तीनों मार्कशीटों पर हस्ताक्षर तो हैं पर मुहर नहीं लगी हैं इसीलिए उनको संदिग्ध माना जा रहा है। प्रारंभिक जांच में हस्ताक्षर भी बनाए हुए प्रतीत हो रहे हैं। कुलसचिव ने तीनों ही मार्कशीट की जांच के आदेश गोपनीय विभाग को दिए हैं।
ये तीनों मार्कशीट एक ही परीक्षार्थी के नाम से बनी हुई हैं। बिजनौर का कालेज महाविद्यालय के रूप में दर्शाया गया है। बीए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की इन मार्कशीटों को सत्यापन के लिए बंगलुरू की एक सर्विस प्रोवाइडर संस्था ने विश्वविद्यालय को भेजा है। ये मार्कशीट जिसके नाम से जारी हैं, उसकी नियुक्ति किसी निजी कंपनी में हुई है। उस कंपनी ने ही इनको सत्यापन के लिए सर्विस प्रोवाइड संस्था को उपलब्ध कराया। डाक में मार्कशीट की फोटो प्रतियां देखने पर उनमें मुहर न लगी होने से कुलसचिव ने उनको गंभीरता से लिया। आठ साल पहले जारी इन मार्कशीट पर कुलसचिव की ओर से और अनुभाग प्रभारियों के हस्ताक्षर भी बनावटी लग रहे हैं। चूंकि पहले भी सत्यापन के लिए आईं कई मार्कशीट फर्जी पकड़ी जा चुकी हैं इसलिए कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य ने गोपानीय विभाग को रिकार्ड देखकर इनकी जांच करने के आदेश दिए हैं।
कोट...
विश्वविद्यालय से जारी होने वाली हर मार्कशीट पर कई अनुभाग के प्रभारियों और कुलसचिव की ओर से किसी जिम्मेदार अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ उनके नाम की मुहर पर लगाई जाती है। इन मार्कशीट पर मुहर नहीं लगी है तो यह फर्जी हो सकती हैं इसलिए इनकी जांच कराई जाएगी।
विज्ञापन
-डॉ. साहब लाल मौर्य, कुलसचिव
विज्ञापन
ये तीनों मार्कशीट एक ही परीक्षार्थी के नाम से बनी हुई हैं। बिजनौर का कालेज महाविद्यालय के रूप में दर्शाया गया है। बीए प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष की इन मार्कशीटों को सत्यापन के लिए बंगलुरू की एक सर्विस प्रोवाइडर संस्था ने विश्वविद्यालय को भेजा है। ये मार्कशीट जिसके नाम से जारी हैं, उसकी नियुक्ति किसी निजी कंपनी में हुई है। उस कंपनी ने ही इनको सत्यापन के लिए सर्विस प्रोवाइड संस्था को उपलब्ध कराया। डाक में मार्कशीट की फोटो प्रतियां देखने पर उनमें मुहर न लगी होने से कुलसचिव ने उनको गंभीरता से लिया। आठ साल पहले जारी इन मार्कशीट पर कुलसचिव की ओर से और अनुभाग प्रभारियों के हस्ताक्षर भी बनावटी लग रहे हैं। चूंकि पहले भी सत्यापन के लिए आईं कई मार्कशीट फर्जी पकड़ी जा चुकी हैं इसलिए कुलसचिव डॉ. साहब लाल मौर्य ने गोपानीय विभाग को रिकार्ड देखकर इनकी जांच करने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
कोट...
विश्वविद्यालय से जारी होने वाली हर मार्कशीट पर कई अनुभाग के प्रभारियों और कुलसचिव की ओर से किसी जिम्मेदार अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ उनके नाम की मुहर पर लगाई जाती है। इन मार्कशीट पर मुहर नहीं लगी है तो यह फर्जी हो सकती हैं इसलिए इनकी जांच कराई जाएगी।
विज्ञापन
-डॉ. साहब लाल मौर्य, कुलसचिव