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इज्जतनगर में बस अड्डा जल्द बनने की जगी उम्मीद
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बरेली। लंबे समय से इज्जतनगर में रोडवेज बस अड्डे का प्रस्ताव लंबित है। इसे अब जल्द ही हरी झंडी मिलने की संभावना है। सारा मामला सेंट्रल जेल की जमीन परिवहन विभाग को स्थानांतरित होने पर लटका हुआ है, जिसकी अब उम्मीद जाग गई है। वहीं इस मुद्दे पर परिवहन मंत्री अशोक कटारिया से भी आश्वासन मिला है।
इस नए बस अड्डे के प्रस्ताव को लखनऊ मुख्यालय में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में बरेली के रोडवेज अधिकारियों ने उठाया था, जिसे लेकर उच्च अधिकारियों ने चर्चा की, जिसमें यह भरोसा मिला है कि जल्द ही शासन स्तर से भूमि स्थानांतरण की कार्रवाई के लिए अनुरोध किया जाएगा। बैठक में बरेली के आरएम एसके बनर्जी, एसएम अमर नाथ मेहता, एआरएम चीनी प्रसाद आदि शामिल हुए थे। बता दें कि इस प्रस्ताव के लिए रोडवेज प्रशासन, जिला प्रशासन और परिवहन मुख्यालय स्तर से शासन को लिखा जा चुका है। यदि यह बस अड्डा बन जाता है तो पुराने बस अड्डे का 60 प्रतिशत संचालन का भार कम हो जाएगा। इसमें दिल्ली और उत्तराखंड की बसों का संचालन वहीं से होगा। पुराने बस अड्डे से बदायूं, अलीगढ़, आगरा और बदायूं होकर दिल्ली जाने वाली बसें ही संचालित होंगी।
इज्जतनगर में बस अड्डा वक्त की जरूरत भी है और जनता की सुविधा के लिहाज से भी बेहतर रहेगा। शहर के बीच यातायात की समस्या भी कम होगी। इसके अलावा सेटेलाइट बस अड्डे का पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के अंतर्गत आधुनिकीकरण भी किया जाना है, जो सरकार की प्राथमिकता भी है। ऐसे में जब निर्माण शुरू होगा तो स्टेशन टूटेगा, ऐसे में सेटेलाइट स्टेशन की बसों को कहीं और से संचालित किया ही जाएगा। वैसे तो इसके लिए बाईपास के आसपास की जमीन भी देखी जा रही है, यदि नहीं मिली तो उसका भार भी पुराने बस अड्डे पर आ सकता है। ऐसे में काफी दिक्कत हो सकती है।
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- चीनी प्रसाद, एआरएम (कार्मिक) एवं बरेली डिपो
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इस नए बस अड्डे के प्रस्ताव को लखनऊ मुख्यालय में हुई प्रदेश स्तरीय बैठक में बरेली के रोडवेज अधिकारियों ने उठाया था, जिसे लेकर उच्च अधिकारियों ने चर्चा की, जिसमें यह भरोसा मिला है कि जल्द ही शासन स्तर से भूमि स्थानांतरण की कार्रवाई के लिए अनुरोध किया जाएगा। बैठक में बरेली के आरएम एसके बनर्जी, एसएम अमर नाथ मेहता, एआरएम चीनी प्रसाद आदि शामिल हुए थे। बता दें कि इस प्रस्ताव के लिए रोडवेज प्रशासन, जिला प्रशासन और परिवहन मुख्यालय स्तर से शासन को लिखा जा चुका है। यदि यह बस अड्डा बन जाता है तो पुराने बस अड्डे का 60 प्रतिशत संचालन का भार कम हो जाएगा। इसमें दिल्ली और उत्तराखंड की बसों का संचालन वहीं से होगा। पुराने बस अड्डे से बदायूं, अलीगढ़, आगरा और बदायूं होकर दिल्ली जाने वाली बसें ही संचालित होंगी।
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इज्जतनगर में बस अड्डा वक्त की जरूरत भी है और जनता की सुविधा के लिहाज से भी बेहतर रहेगा। शहर के बीच यातायात की समस्या भी कम होगी। इसके अलावा सेटेलाइट बस अड्डे का पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के अंतर्गत आधुनिकीकरण भी किया जाना है, जो सरकार की प्राथमिकता भी है। ऐसे में जब निर्माण शुरू होगा तो स्टेशन टूटेगा, ऐसे में सेटेलाइट स्टेशन की बसों को कहीं और से संचालित किया ही जाएगा। वैसे तो इसके लिए बाईपास के आसपास की जमीन भी देखी जा रही है, यदि नहीं मिली तो उसका भार भी पुराने बस अड्डे पर आ सकता है। ऐसे में काफी दिक्कत हो सकती है।
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- चीनी प्रसाद, एआरएम (कार्मिक) एवं बरेली डिपो