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Bareilly News: संशोधित... शब्बू मियां को नम आंखों से अकीदतमंदों ने दी आखिरी विदाई
Thu, 15 Aug 2024 04:16 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Thu, 15 Aug 2024 04:16 AM IST
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बरेली। खानकाह-ए-नियाजिया के मुंतजिम रहे सिबतैन हसन नियाजी उर्फ शब्बू मियां को गमजदा माहौल में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। बड़ी तादाद में लोगों ने नम आंखों से उन्हें आखिरी विदाई दी।
शब्बू मियां का मंगलवार देर शाम इंतकाल हो गया था। बुधवार को सुबह से ही दूर-दराज के शहरों से उनके चाहने वाले खानकाह पहुंचने लगे थे। दोपहर में गुस्ल के बाद उनके जनाजे को जैसे ही बाहर लाया गया, लोग रोने लगे। कलमे के साथ या हुसैन की सदाएं गूंज उठीं। भीड़ को संभालना मुश्किल हो रहा था। बमुश्किल जनाजे को खानकाह परिसर में लाया गया। सज्जादानशीन शाह मेहंदी मियां नियाजी ने दोपहर डेढ़ बजे जनाजे की नमाज अदा कराई।
मगफिरत की दुआ के बाद जब वहां से जनाजा कब्रिस्तान ले जाया जाने लगा तो लोग कंधा देने के लिए बेचैन हो उठे। जनाजे तक न पहुंच पाने की वजह से कुछ लोग उनके जनाजे की पलंग या चादर को माथे से लगाते दिखे। खानकाह सहित आसपास के मकानों की छतों पर महिलाएं भी उनके आखिरी दीदार के लिए एकत्र रहीं। खानकाह से थोड़ी दूर पर खानकाही कब्रिस्तान में अपराह्न दो बजे शब्बू मियां के जनाजे को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। मगफिरत की दुआ करते हुए लोग अलविदा कहकर वापस हुए। सभी मजहब के लोगों ने जनाजे में शिरकत कर शब्बू मियां को खिराज-ए-अकीदत पेश की। अजमेर शरीफ, दिल्ली, मुंबई, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा सहित तमाम खानकाहों और दरगाहों से भी लोग पहुंचे थे।
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शब्बू मियां का परिचय
जन्म : 15 जून 1958।
वर्ष 1980 में खानकाह के मुंतजिम बने।
पूर्व सज्जादा हजरत शाह हसनी मियां के छोटे भाई और खलीफा थे।
मौजूदा सज्जादा शाह मेहंदी मियां के चाचा थे।
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यह पूरे मुल्क की क्षति : संतोष
झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने शब्बू मियां के भाई डॉ. कमाल मियां नियाजी को कॉल करके कहा कि उनका संसार से जाना बेहद दुखद है। उनकी कमी को कभी कोई पूरा नहीं कर सकता। यह बरेली ही नहीं, पूरे मुल्क के लिए क्षति है। ऐसे मौके पर खुद के न पहुंच पाने पर उन्होंने अफसोस जताया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इंसानियत की मिसाल थे शब्बू मियां : ऐरन
पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन व पूर्व महापौर सुप्रिया ऐरन ने भी शब्बू मियां के निधन पर शोक जताया है। प्रवीण सिंह ऐरन ने बताया कि वह दोनों साथ पढ़े थे। वह न सिर्फ उनके अच्छे दोस्त थे, बल्कि एक बहुत अच्छे इंसान भी थे। वह सभी वर्गों की मदद करते थे। वह सर्वधर्म को मानने वाले, इंसानियत की मिसाल थे। ऐसी शख्सियत का जाना शहर के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। साथ ही, सुप्रिया ऐरन ने भी खानकाह परिवार के प्रति आत्मिक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि वह मेरे लिए बड़े भाई की तरह थे व बहुत स्नेह करते थे। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए परिजनों को ढांढस बंधाया।
इन्होंने भी व्यक्त की संवेदनाएंउप्र कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव चौधरी असलम मियां, सपा के महानगर अध्यक्ष शमीम खां, प्रदेश प्रवक्ता साजिद रजा, महासचिव पंडित दीपक शर्मा, खालिद खां, अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष असलम खान आदि ने उनके परिजनों से मुलाकात कर दुख जताया। सपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य संजीव कुमार सक्सेना और जिला उपाध्यक्ष हैदर अली ने खानकाह पहुंचकर खिराज-ए-अकीदत पेश की। समाजसेवी नाजिम वेग ने कहा कि वह गंगा-जमुनी तहजीब के पुरोधा थे। आरटीआई एक्टिविस्ट मोहम्मद खालिद जीलानी, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा और हज कमेटी के डॉ. हुदा ने भी दुख व्यक्त किया।
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शब्बू मियां का मंगलवार देर शाम इंतकाल हो गया था। बुधवार को सुबह से ही दूर-दराज के शहरों से उनके चाहने वाले खानकाह पहुंचने लगे थे। दोपहर में गुस्ल के बाद उनके जनाजे को जैसे ही बाहर लाया गया, लोग रोने लगे। कलमे के साथ या हुसैन की सदाएं गूंज उठीं। भीड़ को संभालना मुश्किल हो रहा था। बमुश्किल जनाजे को खानकाह परिसर में लाया गया। सज्जादानशीन शाह मेहंदी मियां नियाजी ने दोपहर डेढ़ बजे जनाजे की नमाज अदा कराई।
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मगफिरत की दुआ के बाद जब वहां से जनाजा कब्रिस्तान ले जाया जाने लगा तो लोग कंधा देने के लिए बेचैन हो उठे। जनाजे तक न पहुंच पाने की वजह से कुछ लोग उनके जनाजे की पलंग या चादर को माथे से लगाते दिखे। खानकाह सहित आसपास के मकानों की छतों पर महिलाएं भी उनके आखिरी दीदार के लिए एकत्र रहीं। खानकाह से थोड़ी दूर पर खानकाही कब्रिस्तान में अपराह्न दो बजे शब्बू मियां के जनाजे को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। मगफिरत की दुआ करते हुए लोग अलविदा कहकर वापस हुए। सभी मजहब के लोगों ने जनाजे में शिरकत कर शब्बू मियां को खिराज-ए-अकीदत पेश की। अजमेर शरीफ, दिल्ली, मुंबई, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा सहित तमाम खानकाहों और दरगाहों से भी लोग पहुंचे थे।
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शब्बू मियां का परिचय
जन्म : 15 जून 1958।
वर्ष 1980 में खानकाह के मुंतजिम बने।
पूर्व सज्जादा हजरत शाह हसनी मियां के छोटे भाई और खलीफा थे।
मौजूदा सज्जादा शाह मेहंदी मियां के चाचा थे।
यह पूरे मुल्क की क्षति : संतोष
झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने शब्बू मियां के भाई डॉ. कमाल मियां नियाजी को कॉल करके कहा कि उनका संसार से जाना बेहद दुखद है। उनकी कमी को कभी कोई पूरा नहीं कर सकता। यह बरेली ही नहीं, पूरे मुल्क के लिए क्षति है। ऐसे मौके पर खुद के न पहुंच पाने पर उन्होंने अफसोस जताया और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
इंसानियत की मिसाल थे शब्बू मियां : ऐरन
पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन व पूर्व महापौर सुप्रिया ऐरन ने भी शब्बू मियां के निधन पर शोक जताया है। प्रवीण सिंह ऐरन ने बताया कि वह दोनों साथ पढ़े थे। वह न सिर्फ उनके अच्छे दोस्त थे, बल्कि एक बहुत अच्छे इंसान भी थे। वह सभी वर्गों की मदद करते थे। वह सर्वधर्म को मानने वाले, इंसानियत की मिसाल थे। ऐसी शख्सियत का जाना शहर के लिए बहुत बड़ा नुकसान है। साथ ही, सुप्रिया ऐरन ने भी खानकाह परिवार के प्रति आत्मिक संवेदनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि वह मेरे लिए बड़े भाई की तरह थे व बहुत स्नेह करते थे। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति की कामना करते हुए परिजनों को ढांढस बंधाया।
इन्होंने भी व्यक्त की संवेदनाएंउप्र कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव चौधरी असलम मियां, सपा के महानगर अध्यक्ष शमीम खां, प्रदेश प्रवक्ता साजिद रजा, महासचिव पंडित दीपक शर्मा, खालिद खां, अल्पसंख्यक सभा के जिलाध्यक्ष असलम खान आदि ने उनके परिजनों से मुलाकात कर दुख जताया। सपा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य संजीव कुमार सक्सेना और जिला उपाध्यक्ष हैदर अली ने खानकाह पहुंचकर खिराज-ए-अकीदत पेश की। समाजसेवी नाजिम वेग ने कहा कि वह गंगा-जमुनी तहजीब के पुरोधा थे। आरटीआई एक्टिविस्ट मोहम्मद खालिद जीलानी, भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा और हज कमेटी के डॉ. हुदा ने भी दुख व्यक्त किया।