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रीवैंप योजना: साल पूरा बीता, काम नहीं हुआ आधा, यही हाल रहा गर्मी में बहाना पड़ेगा पसीना

Wed, 28 Feb 2024 03:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 28 Feb 2024 03:01 AM IST
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Revamp plan: The whole year has passed, half of the work has not been done, the situation remains the same, you will have to sweat as an excuse in the summer
बरेली। बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए 820 करोड़ रुपये की रीवैंप योजना धीमी गति की शिकार हो गई है। इसे लागू हुए एक साल से अधिक का समय हो गया, लेकिन अब तक सिर्फ 20 फीसदी काम हुआ है। हालांकि योजना के अनुसार अब तक 50 फीसदी काम होना था। यही रफ्तार रही तो काम पूरा होने में पांच साल लग सकते हैं। गर्मी में आपूर्ति भी प्रभावित होगी। जर्जर बिजली लाइनों में फाल्ट होंगे और लोगों को पसीना बहाना पड़ेगा।
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ये स्थिति तब है जबकि पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन डॉ.आशीष गोयल से लेकर मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लि. के प्रबंध निदेशक भवानी सिंह खंगरौत तक प्रगति बढ़ाने के लिए बार-बार निर्देश जारी करते रहे हैं। मुख्य अभियंता अनिल तिवारी ने फर्म को नोटिस देकर काम की रफ्तार तेज करने के आदेश दिए हैं। इस योजना में जनवरी 2023 में काम शुरू हुए थे। जनवरी 2025 तक काम पूरे होने हैं। दो साल की समय अवधि को मानक माना जाए तो एक साल में 50 फीसदी काम होना था, लेकिन इतना काम नहीं हो पाया। इस स्थिति के लिए मुख्य अभियंता ने कार्यदायी संस्था यूनिवर्सल प्रोजेक्टस एंड इंजीनियरिंग सर्विस लिमिटेड को जिम्मेदार माना है। धीमी प्रगति पर कार्यदायी संस्था से जवाब मांगा है। बार-बार पत्र लिखे जा रहे हैं।
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ये सुधार होने हैं इस योजना के तहत
योजना के अंतर्गत बिजली लाइनों के जर्जर तार और खंभे हटाकर नए तार और खंभे लगाए जाने हैं। कृषि और घरेलू बिजली आपूर्ति के फीडर अलग-अलग किए जाने हैं। चोरी वाले इलाकों में आर्मर्ड केबल लगना है ताकि लोग कटिया डालकर बिजली चोरी न कर सकें।
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कहां क्या है स्थिति
जिले में 60 417 खंभे लगने थे, लग सके सिर्फ 14 हजार
बरेली जिला बिजली विभाग के व्यवस्था के अनुसार जोन एक में है। यहां 347.95 करोड़ की योजना लागू है। इसमें 33 केवी फीडरों पर 57 किलोमीटर तार बदले जाने थे, लेकिन अभी काम शुरू नहीं हो सका। एलटी लाइन पर आर्मर्ड केबल 241 किलोमीटर लगना था, लेकिन एक किलोमीटर भी नहीं लगा। विभिन्न क्षेत्रों में 60417 खंभे बदले जाने थे, लेकिन अब तक 14 हजार ही बदले गए। 11 केवी फीडर पर 289 किलोमीटर रीकंडक्टिंग होनी थी, लेकिन 98 किलोमीटर हो सकी है।

मंडल के जिलों में भी रफ्तार धीमी, नहीं बदली लाइनें
जोन दो में बरेली मंडल के बदायूं, पीलीभीत व शाहजहांपुर जिले आते हैं। इसके लिए 472 करोड़ रुपये की योजना लागू है। इसमें तीनों जिलों में 296 किलोमीटर आर्मर्ड केबल लगना था। एक किलोमीटर भी नहीं लगा। विद्युत व्यवस्था सुचारु रखने के लिए 199 कैपिसेटर बैंक लगने थे, लेकिन एक भी नहीं लगा। 33 केवी के लंबे फीडर छोटे किए जाने थे, लेकिन एक साल में दस फीसदी काम नहीं हुआ। 33 केवी के तार 159 किलोमीटर बदले जाने थे, लेकिन एक भी किलोमीटर नहीं बदला गया। कुल मिलाकर 18 फीसदी काम हुआ है।

एक्सपर्ट कमेंट
गांव की छोड़िए शहर में संजय नगर, बिधौलिया क्षेत्र में कई स्थानों पर तार लटके हुए हैं। अधिकारी रीवैंप योजना के काम शुरू होने तक इंतजार की सलाह देते रहे हैं लेकिन लाइनें नहीं बदली गईं। बिधौलिया में बल्लियों पर तार लटक रहे हैं। करंट का खतरा है पर जिम्मेदार नहीं चेत रहे। मैं तो यहीं कहना चाहूंगा कि जहां पर जर्जर बिजली लाइनों से खतरा है, प्राथमिकता पर वहां काम कराएं। देरी के लिए जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करें। -राजेंद्र आर्य, सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता


कोट-
शहर में रीवैंप योजना के काम की रफ्तार बढ़ाने के लिए मैं रोजाना समीक्षा कर रहा हूं। जहां पर भी दिक्कत है, उसे दूर करा रहे हैं, ताकि गर्मी में 24 घंटे आपूर्ति दी जा सके। -अंबा प्रसाद वशिष्ठ, अधीक्षण अभियंता
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