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बैंड बाजा बरात.. अब चार महीने बाद
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बरेली। आज से चार माह तक अब शहनाइयां नहीं बजेंगी और न ही मांगलिक अनुष्ठान ही संपन्न कराए जा सकेंगे। चार माह बाद आठ नवंबर को देवोत्थान एकादशी के साथ फिर से विवाह समेत अन्य मांगलिक अनुष्ठान शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्यों ने अबकी बार हरिशयनी एकादशी पर बन रहे त्रियोग (सिद्धियोग, शुभ योग और रवियोग) का संयोग व्रतियों के लिए लाभकारी बताया है।
ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक देवशयनी एकादशी के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाते हैं। ऐसे में मुंडन, उपनयन, भवन निर्माण या गृह प्रवेश, वैवाहिक अनुष्ठान आदि शुभ कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है श्री हरि विष्णु के शयन में होने से शुभ कार्य सफल नहीं होते। शादियों का सीजन थमने से कारोबार घटेगा, ऐसा व्यापारी मान रहे हैं। यहां बता दें कि शादियों के सीजन में सराफा, कपड़ा, फर्नीचर, किराना और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार का रोजाना का कारोबार करोड़ों रुपयों का होता है, लेकिन चौमासे में गिरावट आनी तय माना जा रहा है।
बन रहा त्रियोग का संयोग
बताया कि देवशयनी एकादशी पर अबकी बार त्रियोग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 3.57 बजे से शुरू होकर अगले दिन सूर्योदय तक रहेगा। शुभ योग दोपहर 1.58 बजे से शुरू होगा। बताया कि तीन शुभ योगों के साथ शुरू हो रही देवशयनी एकादशी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाली है। अशुभ प्रभावों को दूर करने की क्षमता रखने वाला रवि योग भी बन रहा है।
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पूजा का शुभ मुहूर्त
हरिशयनी एकादशी 11 जुलाई की रात 3.08 बजे से 12 जुलाई रात 1.55 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल शाम 5.30 बजे से 7.30 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि प्रदोष काल के दौरान आरती, दान पुण्य का विशेष लाभ मिलता है। 8 नवंबर शुक्रवार को ही कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी (देव प्रबोधिनी एकादशी) से विवाह समेत अन्य शुभ कार्य संपन्न होंगे।
वर्जित होते हैं ये कार्य
शास्त्रों के अनुसार चौमास में पलंग पर सोना, भार्या का संग, झूठ बोलना, मांस, शहद, मूली, बैगन का सेवन वर्जित है। वहीं हरिशयनी एकादशी व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठना, तामसिक भोजन से दूर रहना, काले नीले वस्त्र प्रयोग न करने का विधान है। श्रीहरि विष्णु को पीले फल व फूल जरूर चढ़ाएं। घर में केले का पौधा लगाकर उसे उत्तर पूर्व दिशा में रखें। रोली, पीले फल-फूल, केसर, धूप, दीप से पूजा करें। आसन पर हल्दी से स्वास्तिक बनाकर उस पर घी का दीपक जलाएं। भगवान कृष्ण के 108 नाम जपें और पौधे को मंदिर के पास रखना श्रेयस्कर है।
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ज्योतिषाचार्य पं. नीरज शर्मा के मुताबिक देवशयनी एकादशी के बाद सूर्य दक्षिणायन हो जाते हैं। ऐसे में मुंडन, उपनयन, भवन निर्माण या गृह प्रवेश, वैवाहिक अनुष्ठान आदि शुभ कार्य नहीं किए जाते। मान्यता है श्री हरि विष्णु के शयन में होने से शुभ कार्य सफल नहीं होते। शादियों का सीजन थमने से कारोबार घटेगा, ऐसा व्यापारी मान रहे हैं। यहां बता दें कि शादियों के सीजन में सराफा, कपड़ा, फर्नीचर, किराना और इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार का रोजाना का कारोबार करोड़ों रुपयों का होता है, लेकिन चौमासे में गिरावट आनी तय माना जा रहा है।
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बन रहा त्रियोग का संयोग
बताया कि देवशयनी एकादशी पर अबकी बार त्रियोग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग दोपहर 3.57 बजे से शुरू होकर अगले दिन सूर्योदय तक रहेगा। शुभ योग दोपहर 1.58 बजे से शुरू होगा। बताया कि तीन शुभ योगों के साथ शुरू हो रही देवशयनी एकादशी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने वाली है। अशुभ प्रभावों को दूर करने की क्षमता रखने वाला रवि योग भी बन रहा है।
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पूजा का शुभ मुहूर्त
हरिशयनी एकादशी 11 जुलाई की रात 3.08 बजे से 12 जुलाई रात 1.55 बजे तक रहेगी। प्रदोष काल शाम 5.30 बजे से 7.30 बजे तक रहेगा। मान्यता है कि प्रदोष काल के दौरान आरती, दान पुण्य का विशेष लाभ मिलता है। 8 नवंबर शुक्रवार को ही कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी (देव प्रबोधिनी एकादशी) से विवाह समेत अन्य शुभ कार्य संपन्न होंगे।
वर्जित होते हैं ये कार्य
शास्त्रों के अनुसार चौमास में पलंग पर सोना, भार्या का संग, झूठ बोलना, मांस, शहद, मूली, बैगन का सेवन वर्जित है। वहीं हरिशयनी एकादशी व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठना, तामसिक भोजन से दूर रहना, काले नीले वस्त्र प्रयोग न करने का विधान है। श्रीहरि विष्णु को पीले फल व फूल जरूर चढ़ाएं। घर में केले का पौधा लगाकर उसे उत्तर पूर्व दिशा में रखें। रोली, पीले फल-फूल, केसर, धूप, दीप से पूजा करें। आसन पर हल्दी से स्वास्तिक बनाकर उस पर घी का दीपक जलाएं। भगवान कृष्ण के 108 नाम जपें और पौधे को मंदिर के पास रखना श्रेयस्कर है।