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अलौकिक शक्तियों का केंद्र है कालीबाड़ी मंदिर
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बरेली। कालीबाड़ी स्थित मां काली देवी का मंदिर सालों से लोगों की आस्था का केंद्र बना है। नवरात्र मे यहां की रौनक देखते ही बनती है। दूर.दूर से लोग माता काली का आशीर्वाद लेने आते हैं। शारदीय नवरात्र पर इस मंदिर को फूलों और पत्तियों से सजाया गया है। नवरात्र में मंदिर पूरे दिन श्रद्धालुओं के लिा खुला रहता है।
मान्यता है कि यह मंदिर करीब 250 साल पुराना है। यहां पहले गोबर से बनी प्रतिमा की पूजा होती है। बताया जाता हैं एक बंगाली बाबा को मां काली देवी ने स्वप्न में दर्शन दिया और वहां मंदिर का निर्माण कराकर प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश दिया। बंगाली बाबा ने लोगों के सहयोग से मां काली देवी की प्रतिमा स्थापित की। यह स्थान भैरों जी से चंद कदम की दूरी पर है। बाद में यहां भव्य काली मंदिर का निर्माण हुआ। नवरात्र में यहां सुबह से रात तक भक्तों का रेला लगा रहता है। मंदिर के पुजारी पंडित ब्रजेश कुमार ने बताया कि नवरात्र में यहां सुबह और शाम को माता की आरती और विशेष पूजन का आयोजन किया गया है। मंदिर के दिव्य स्वरूप के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं के बिगड़े हुए काम बन जाते हैं। मंदिर में श्रद्धालु कच्चे धागे गांठ बांधकर मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद गांठ खोलने भी आते हैं। श्रद्धालु संतोष अग्रवाल ने बताया कि वह तीन पीढ़ियों से पूजा अर्चन कर रहे हैं। एक बार जो भक्त सच्चे मन से मुराद मांगता है, मां उसकी इच्छा को पूरी करती हैं।
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मान्यता है कि यह मंदिर करीब 250 साल पुराना है। यहां पहले गोबर से बनी प्रतिमा की पूजा होती है। बताया जाता हैं एक बंगाली बाबा को मां काली देवी ने स्वप्न में दर्शन दिया और वहां मंदिर का निर्माण कराकर प्रतिमा स्थापित करने का निर्देश दिया। बंगाली बाबा ने लोगों के सहयोग से मां काली देवी की प्रतिमा स्थापित की। यह स्थान भैरों जी से चंद कदम की दूरी पर है। बाद में यहां भव्य काली मंदिर का निर्माण हुआ। नवरात्र में यहां सुबह से रात तक भक्तों का रेला लगा रहता है। मंदिर के पुजारी पंडित ब्रजेश कुमार ने बताया कि नवरात्र में यहां सुबह और शाम को माता की आरती और विशेष पूजन का आयोजन किया गया है। मंदिर के दिव्य स्वरूप के दर्शन मात्र से श्रद्धालुओं के बिगड़े हुए काम बन जाते हैं। मंदिर में श्रद्धालु कच्चे धागे गांठ बांधकर मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने के बाद गांठ खोलने भी आते हैं। श्रद्धालु संतोष अग्रवाल ने बताया कि वह तीन पीढ़ियों से पूजा अर्चन कर रहे हैं। एक बार जो भक्त सच्चे मन से मुराद मांगता है, मां उसकी इच्छा को पूरी करती हैं।
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