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इमामबाड़ों में हुए मजलिस व मातम

Wed, 04 Sep 2019 02:41 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 04 Sep 2019 02:41 AM IST
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बरेली। मोहर्रम के तीसरे रोज दिन भर मजलिसो मातम का सिलसिला रहा। इमामबाड़ों और घरों पर उलमा व जाकिरा ने हजरत इमाम हुसैन के किरदार और जंगे कर्बला का वर्णन किया।
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शहर की पहली मजलिस सुबह इमामबाड़ा मुहम्मद शाह से शुरू हुई। इसके बाद सिलसिलेवार इमामबाड़ा हकीम आगा साहब, वसी हैदर, छिद्दी मोहम्मद जैदी, मोहम्मद हुसैन, दीवान खाना आदि में मजलिसें आयोजित की गईं। खास तौर से शाम को काला इमामबाड़ा की मजलिस में मौलाना शहवार हुसैन नकवी ने खिताब किया। इसमें उन्होंने हजरत इमाम हुसैन के किरदार पर रोशनी डालते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने इस्लाम बचाने के लिए अपने पूरे कुनबे को कुरबान कर दिया। उन्होंने अपना सिर कटा दिया मगर यजीद के आगे सिर नहीं झुकाया। मौलाना ने कहा कि हमें भी उनके उसूलों पर चलना चाहिए, इत्तेहाद और भाई चारे पर कायम रहना चाहिए। इस्लाम अमन का पैगाम देता है दहशतगर्दी का नहीं।
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मजलिस के बाद यहां से अलम का जुलूस निकाला गया जो दीवानखाना पहुंच संपन्न हुआ। रात में जखीरा में असलम रिजवी के इमामबाड़े पर अंजुमन गुलदस्ते हैदरी का मातम हुआ। इसी तरह अन्य इमामबाड़ों में भी मातम और मजलिसें आयोजित की गईं।
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