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असली भूमाफिया तो प्रशासन ने बचा दिए

Fri, 15 Dec 2017 02:09 AM IST
बरेली।
बरेली। Updated Fri, 15 Dec 2017 02:09 AM IST
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Real Estate Investigation
अ‌िततिक्रमण्‍ा

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सीएम योगी आदित्य नाथ की सख्ती के बाद प्रशासन ने गांव-देहात के लोगों को भूमाफिया बनाकर सूची शासन को भेज दी, लेकिन उसमें शहर में नदी-नहर और नगर निगम की जमीनों पर कब्जा करने वाला एक भी बड़ा माफिया इसमें नहीं है। असल में टॉप-10 भूमाफिया ईमानदारी से तलाशे जाएं तो शहर के बिल्डर ही इस सूची में सबसे ऊपर होंगे। कुछ बिल्डरों ने तो अरबों की सरकारी जमीन ही कब्जा करके बेच दी। कई ऐसे भी कब्जेदार हैं, जिन्होंने सरकारी जमीनों पर कब्जा करके बड़ी बिल्डिंगें बनवा दीं और उनसे लाखों रुपये महीना उनकी जेब में आ रहा है। प्रशासन ने सियासी दबाव और दोस्ती के चक्कर में ऐसे सभी गुनहगारों को बचा दिया।
 
केस-एक
 हरूनगला में 41.285 किलोमीटर से 41.760 किलोमीटर तक नहर की 5790.25 हेक्टेअर जमीन पर शहर के एक नामचीन बिल्डर ने कब्जा करके कॉलोनी खड़ी कर दी है। यह केस वाद संख्या 7/2001 के तहत श्रम न्यायालय में 17 साल से विचाराधीन है।
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केस-दो
 नवादा जोगियान में 39.555 से 39.660 किलोमीटर तक नहर के एरिया 1279.95 क्षेत्रफल पर कब्जा कर लिया गया। इसमें दो कब्जेदारों पर श्रम न्यायालय में वाद संख्या 9/2001 के तहत केस 17 साल से विचाराधीन है। 
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केस-तीन
परतापुर जीवन सहाय में 1.455 से 1.634 किलोमीटर तक नहर के 1528.66 क्षेत्रफल पर कब्जा हो गया। सिंचाई विभाग के अफसरों की लापरवाही से यह केस भी श्रम न्यायालय में 4/2011 के तहत छह साल से विचाराधीन है।

केस-चार
 बारादरी थाने के सामने पुरानी रेल लाइन की सैकड़ों बीघा जमीन पर दशकों से अवैध कब्जे हैं। नमक के गोदाम के सामने भी सरकारी जमीन पर दर्जनों पक्की दुकानें बन गईं हैं। कई बार अतिक्रमण अभियान चले, लेकिन कब्जा अब तक कायम है।

केस-पांच
 सैदपुर हाकिंस में किला नदी पर कब्जेदारों ने पुराना बाग खरीदकर उसकी आड़ में नगर निगम की करोड़ों की जमीन पर कब्जा कर कॉलोनी बनाने के लिए बिजली के खंभे तक लगवा दिए। नदी आड़े आई तो उस पर कब्जेदारों ने अपना पुल भी बना डाला। 

केस-छह
 सीबीगंज में एक कारोबारी ने सरकारी जमीन पर पेट्रोल पंप लगा रखा है। इसी जमीन पर बैंक भी खुली है, जिसका किराया उसी कारोबारी को मिल रहा है। दिल्ली-रामपुर हाईवे की यह जमीन करोड़ों की कीमत की है।

केस-सात
 दिल्ली हाईवे पर एक प्राइवेट फर्म के मालिक ने नगर निगम की करोड़ों की जमीन पर कब्जा कर दीवार उठा ली। बमुश्किल, नगर निगम ने दीवार गिराई लेकिन अभी भी पूरी जमीन कब्जा मुक्त नहीं हुई है। यह मामला न्यायालय में चल रहा है।

केस-आठ
 शहर के एक बड़े व्यवसायी ने हार्टमैन के निकट नगर निगम की करोड़ों की जमीन पर कब्जा कर रखा है। सियासी मजबूरी के चलते नगर निगम ने आज तक उस जमीन से कब्जा छुड़ाने की हिम्मत नहीं की है। 

केस-नौ
कर्मचारी नगर, सैदपुर हाकिंस और मिनी बाईपास रोड पर किला नदी के किनारे की सैकड़ों बीघा बेशकीमती जमीन पर भूमाफिया ने कब्जा कर बेच दिया। नदी की धार में दीवार उठा ली गई। प्रशासन ने आज तक कोई सुधि नहीं ली है।


केस-10
नकटिया नदी में हरूनगला, कुसुमनगर, डोहरा रोड पर दर्जनों अवैध कब्जे हैं। ठिरिया निजावत खां में एक बिल्डर ने नदी की करोड़ों की जमीन पर कब्जा कर कॉलोनी के लिए प्लाटिंग कर दी। कुछ दिन पहले तक कॉलोनी का निर्माण चलता रहा। 
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