{"_id":"5d239c9f8ebc3e6d216fcdef","slug":"ration-card-scam-bareilly-news-bly367712993","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिस्टम का खेल, 10 हजार गरीबों के हाथों से ‘स्लिप’ हो रहा राशन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिस्टम का खेल, 10 हजार गरीबों के हाथों से ‘स्लिप’ हो रहा राशन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। एक तरफ तो जिले भर में हजारों लोगों के राशन कार्ड बन ही नहीं पा रहे हैं और दूसरी तरफ डीएसओ दफ्तर से जिन लोगों के राशन कार्ड के आवेदन मंजूर हो गए हैं, उन्हें भी कोटे की दुकानों से राशन नहीं मिल पा रहा है। दरअसल, प्रिंटेड राशन कार्ड उपलब्ध न होने की वजह से करीब 10 हजार लोगों को विकल्प के तौर पर एक स्लिप जारी की गई है, लेकिन कोटेदार इस पर उन्हें राशन देने को तैयार नहीं हैं। ऐसी तमाम शिकायतों पर डीएसओ दफ्तर की चुप्पी हजारों क्विंटल राशन की हेराफेरी की भी आशंका पैदा कर रही है, क्योंकि डीएसओ दफ्तर के रिकॉर्ड में ये राशन कार्ड जारी हो चुके हैं और उन पर सरकारी गोदामों से कोटेदारों को राशन का आवंटन भी हो रहा है, लेकिन कार्डधारकों को नहीं दिया जा रहा है।
पूर्ति विभाग में काफी समय से प्रिंटेड राशन कार्ड उपलब्ध न होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले ही राशन कार्ड खत्म हो गए थे और फिर अब तक शासन ने उपलब्ध नहीं कराए हैं। इस बीच जिन लोगों का नए राशन कार्ड का ऑनलाइन आवेदन मंजूर हुआ, पूर्ति विभाग से उसे राशन कार्ड के बजाय यह कहकर एक स्लिप जारी कर दी गई कि शासन से प्रिंटेड राशन कार्ड आने तक उसे इसी स्लिप पर राशन मिलेगा। यह स्लिप दरअसल लाभार्थी का आवेदन फार्म का प्रिंट ही होता है, जिसे वह पूर्ति विभाग के दफ्तर में जमा करता है। आवेदन मंजूर होने के बाद पूर्ति विभाग इसी फार्म पर मुहर लगाकर लाभार्थी को जारी कर देता है। ज्यादातर कोटेदार इस स्लिप पर लाभार्थियों को राशन देने को तैयार नहीं हैं।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि नए राशन कार्ड के ऐसे दस हजार से ज्यादा आवेदन मंजूर हुए हैं, जिसके बाद उनके आधार पर कोटेदारों का मासिक आवंटन भी बढ़ा दिया गया है। मगर ज्यादातर लाभार्थियों को इन पर राशन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर यह राशन लाभार्थियों को नहीं मिल रहा है तो कहां ठिकाने लगाया जा रहा है और डीएसओ दफ्तर ऐसी शिकायतों पर कोटेदारों को साफ निर्देश जारी करने को क्यों नहीं तैयार है।
विज्ञापन
कोटेदार कहते हैं- यह स्लिप नहीं चलेगी
केस- 1
जौहरपुर की पूनम साहू का पुराना राशन कार्ड रद्द हो चुका है। कुछ समय पहले उन्होंने डीएसओ दफ्तर में शिकायत की तो उन्हें पहले तो बताया गया कि राशन कार्ड ठीक हो जाएगा। बाद में नए सिरे से ऑनलाइन आवेदन करने को कहा गया। आवेदन के बाद वह पिछले महीने पूनम ऑनलाइन फार्म का प्रिंट लेकर डीएसओ दफ्तर पहुंचीं तो वहां इस प्रिंट पर मुहर लगाकर बताया गया कि वह अब कोटेदार से राशन ले सकती हैं, लेकिन जुलाई में वह राशन लेने पहुंचीं तो कोटेदार ने साफ इनकार कर दिया।
केस- 2
सीबीगंज में रहने वाली ओमवती मौर्य के साथ भी यही मजाक हुआ। पात्र गृहस्थी का नया राशन लेने के बाद पूर्ति विभाग से उन्हें बताया गया कि फिलहाल विभाग के पास प्रिंटेड राशन कार्ड उपलब्ध नहीं हैं। ये राशन कार्ड आने तक उन्हें कोटेदार इसी स्लिप पर राशन देगा, लेकिन वह जब स्लिप लेकर राशन लेने गईं तो कोटेदार ने उन्हें भगा दिया। इस घटना के बाद ओमवती मौर्य डीएसओ दफ्तर के कई चक्कर काट चुकी हैं, लेकिन उन्हें कोई साफ जवाब तक नहीं मिल पा रहा है।
पात्र गृहस्थी और अंत्योदय योजना के आठ लाख लाभार्थी
जिले में पात्र गृहस्थी के करीब सात लाख छह हजार राशन कार्ड हैं। इनके लिए हर माह 8937.828 मीट्रिक टन गेहूं और 5958.552 मीट्रिक टन चावल का आवंटन होता है जबकि अंत्योदय राशनकार्ड धारकों की संख्या 99687 है। इन उपभेाक्ताओं के लिए हर महीने 1993.74 मीट्रिक टन गेहूं और 1495.305 मीट्रिक टन चावल का स्टॉक कोटेदारों को दिया जाता है।
चुनाव आचार संहिता से पहले शासन से राशन कार्ड आते थे। जैसे-जैसे कार्ड आते हैं, उन्हें उपभोक्ताओं को दे भी दिया जाता है। राशन कार्ड न होने पर लोगों की सहूलियत के लिए उन्हें स्लिप दी जाती है, जिस पर उन्हें राशन दिया जाना चाहिए। -सीमा त्रिपाठी, डीएसओ
विज्ञापन
पूर्ति विभाग में काफी समय से प्रिंटेड राशन कार्ड उपलब्ध न होने की बात कही जा रही है। बताया जा रहा है कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले ही राशन कार्ड खत्म हो गए थे और फिर अब तक शासन ने उपलब्ध नहीं कराए हैं। इस बीच जिन लोगों का नए राशन कार्ड का ऑनलाइन आवेदन मंजूर हुआ, पूर्ति विभाग से उसे राशन कार्ड के बजाय यह कहकर एक स्लिप जारी कर दी गई कि शासन से प्रिंटेड राशन कार्ड आने तक उसे इसी स्लिप पर राशन मिलेगा। यह स्लिप दरअसल लाभार्थी का आवेदन फार्म का प्रिंट ही होता है, जिसे वह पूर्ति विभाग के दफ्तर में जमा करता है। आवेदन मंजूर होने के बाद पूर्ति विभाग इसी फार्म पर मुहर लगाकर लाभार्थी को जारी कर देता है। ज्यादातर कोटेदार इस स्लिप पर लाभार्थियों को राशन देने को तैयार नहीं हैं।
विज्ञापन
विभागीय सूत्र बताते हैं कि नए राशन कार्ड के ऐसे दस हजार से ज्यादा आवेदन मंजूर हुए हैं, जिसके बाद उनके आधार पर कोटेदारों का मासिक आवंटन भी बढ़ा दिया गया है। मगर ज्यादातर लाभार्थियों को इन पर राशन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर यह राशन लाभार्थियों को नहीं मिल रहा है तो कहां ठिकाने लगाया जा रहा है और डीएसओ दफ्तर ऐसी शिकायतों पर कोटेदारों को साफ निर्देश जारी करने को क्यों नहीं तैयार है।
विज्ञापन
कोटेदार कहते हैं- यह स्लिप नहीं चलेगी
केस- 1
जौहरपुर की पूनम साहू का पुराना राशन कार्ड रद्द हो चुका है। कुछ समय पहले उन्होंने डीएसओ दफ्तर में शिकायत की तो उन्हें पहले तो बताया गया कि राशन कार्ड ठीक हो जाएगा। बाद में नए सिरे से ऑनलाइन आवेदन करने को कहा गया। आवेदन के बाद वह पिछले महीने पूनम ऑनलाइन फार्म का प्रिंट लेकर डीएसओ दफ्तर पहुंचीं तो वहां इस प्रिंट पर मुहर लगाकर बताया गया कि वह अब कोटेदार से राशन ले सकती हैं, लेकिन जुलाई में वह राशन लेने पहुंचीं तो कोटेदार ने साफ इनकार कर दिया।
केस- 2
सीबीगंज में रहने वाली ओमवती मौर्य के साथ भी यही मजाक हुआ। पात्र गृहस्थी का नया राशन लेने के बाद पूर्ति विभाग से उन्हें बताया गया कि फिलहाल विभाग के पास प्रिंटेड राशन कार्ड उपलब्ध नहीं हैं। ये राशन कार्ड आने तक उन्हें कोटेदार इसी स्लिप पर राशन देगा, लेकिन वह जब स्लिप लेकर राशन लेने गईं तो कोटेदार ने उन्हें भगा दिया। इस घटना के बाद ओमवती मौर्य डीएसओ दफ्तर के कई चक्कर काट चुकी हैं, लेकिन उन्हें कोई साफ जवाब तक नहीं मिल पा रहा है।
पात्र गृहस्थी और अंत्योदय योजना के आठ लाख लाभार्थी
जिले में पात्र गृहस्थी के करीब सात लाख छह हजार राशन कार्ड हैं। इनके लिए हर माह 8937.828 मीट्रिक टन गेहूं और 5958.552 मीट्रिक टन चावल का आवंटन होता है जबकि अंत्योदय राशनकार्ड धारकों की संख्या 99687 है। इन उपभेाक्ताओं के लिए हर महीने 1993.74 मीट्रिक टन गेहूं और 1495.305 मीट्रिक टन चावल का स्टॉक कोटेदारों को दिया जाता है।
चुनाव आचार संहिता से पहले शासन से राशन कार्ड आते थे। जैसे-जैसे कार्ड आते हैं, उन्हें उपभोक्ताओं को दे भी दिया जाता है। राशन कार्ड न होने पर लोगों की सहूलियत के लिए उन्हें स्लिप दी जाती है, जिस पर उन्हें राशन दिया जाना चाहिए। -सीमा त्रिपाठी, डीएसओ