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हार्टमन रामलीला ग्राउंड- कोर्ट का आदेश दरकिनार कर निगम ने दांव पर लगाए 1.30 करोड़
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बरेली। हार्टमन रामलीला ग्राउंड के मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। अप्रैल 2018 में तहसीलदार के न्यायालय से हुए आदेश में कहा गया है कि जमीन नगर निगम की है लेकिन नगर निगम को यहां रामलीला के अलावा अन्य कोई कार्य कराने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद नगर निगम ने अमृत योजना के तहत 1.30 करोड़ से यहां सौंदर्यीकरण शुरू कर दिया है, इसे लेकर विवाद छिड़ गया है और निर्माणाधीन एमपी थिएटर की दीवारें ढहा दी गई हैं।
सुर्खा छावनी स्थित हार्टमन रामलीला ग्राउंड के मालिकाना हक को लेकर नगर निगम और रामलीला कमेटी के बीच लंबे समय से विवाद है। यह मामला कोर्ट तक भी पहुंचा। पिछले साल तत्कालीन नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव और मेला कमेटी के अध्यक्ष भाजपा नेता रामगोपाल मिश्रा के बीच खासा विवाद हुआ था। उस दौरान राजेश श्रीवास्तव ने हार्टमन रामलीला ग्राउंड नगर निगम की संपत्ति बताई थी। राजस्व रिकार्ड में नगर निगम का नाम दर्ज कराया था। इसे लेकर राजस्व अभिलेख में रामलीला समिति का नाम खारिज करने के साथ ही रिकार्ड में यह दर्ज किया गया कि यहां दशहरा पर रामलीला होगी। नगर निगम को इस जमीन को दूसरे कार्यों में उठाने का हक नहीं है।
तहसीलदार न्यायालय का यह आदेश राजस्व अभिलेख में दर्ज होने के बावजूद नगर निगम ने अमृत योजना के 1.30 करोड़ रुपये यहां दांव पर लगा दिए हैं। इसके तहत रामलीला ग्राउंड में एमपी थिएटर, वॉलीबाल कोर्ट, बास्केटबॉल कोर्ट, पाथ वे आदि का निर्माण करने का काम शुरू कर दिया गया है। इस पर अब विवाद भी शुरू हो गया है। इसी बीच पिछले दिनों निर्माणाधीन एमपी थिएटर की दीवारें ध्वस्त कर दी गई हैं। हालांकि ठेकेदार की ओर से इस मामले में तोड़फोड़ को लेकर रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है लेकिन नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि नगर निगम ने कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर अमृत योजना के 1.30 करोड़ रुपये की राशि का दुरुपयोग किया है।
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हार्टमन रामलीला ग्राउंड नगर निगम की संपत्ति है। नियमानुसार ही निर्माण कराया गया है। आदेश में यह कहा गया है कि यहां दशहरा के दौरान नगर निगम अन्य कार्य नहीं करेगा। - संजय चौहान, एक्सईएन, नगर निगम
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सुर्खा छावनी स्थित हार्टमन रामलीला ग्राउंड के मालिकाना हक को लेकर नगर निगम और रामलीला कमेटी के बीच लंबे समय से विवाद है। यह मामला कोर्ट तक भी पहुंचा। पिछले साल तत्कालीन नगर आयुक्त राजेश श्रीवास्तव और मेला कमेटी के अध्यक्ष भाजपा नेता रामगोपाल मिश्रा के बीच खासा विवाद हुआ था। उस दौरान राजेश श्रीवास्तव ने हार्टमन रामलीला ग्राउंड नगर निगम की संपत्ति बताई थी। राजस्व रिकार्ड में नगर निगम का नाम दर्ज कराया था। इसे लेकर राजस्व अभिलेख में रामलीला समिति का नाम खारिज करने के साथ ही रिकार्ड में यह दर्ज किया गया कि यहां दशहरा पर रामलीला होगी। नगर निगम को इस जमीन को दूसरे कार्यों में उठाने का हक नहीं है।
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तहसीलदार न्यायालय का यह आदेश राजस्व अभिलेख में दर्ज होने के बावजूद नगर निगम ने अमृत योजना के 1.30 करोड़ रुपये यहां दांव पर लगा दिए हैं। इसके तहत रामलीला ग्राउंड में एमपी थिएटर, वॉलीबाल कोर्ट, बास्केटबॉल कोर्ट, पाथ वे आदि का निर्माण करने का काम शुरू कर दिया गया है। इस पर अब विवाद भी शुरू हो गया है। इसी बीच पिछले दिनों निर्माणाधीन एमपी थिएटर की दीवारें ध्वस्त कर दी गई हैं। हालांकि ठेकेदार की ओर से इस मामले में तोड़फोड़ को लेकर रामलीला कमेटी के पदाधिकारियों एवं सदस्यों पर रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है लेकिन नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। कहा जा रहा है कि नगर निगम ने कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर अमृत योजना के 1.30 करोड़ रुपये की राशि का दुरुपयोग किया है।
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हार्टमन रामलीला ग्राउंड नगर निगम की संपत्ति है। नियमानुसार ही निर्माण कराया गया है। आदेश में यह कहा गया है कि यहां दशहरा के दौरान नगर निगम अन्य कार्य नहीं करेगा। - संजय चौहान, एक्सईएन, नगर निगम