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Bareilly News: रामगंगा का जलस्तर बढ़ा, हजारों बीघा फसलें जलमग्न
Sat, 05 Sep 2026 01:12 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Sat, 05 Sep 2026 01:12 AM IST
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अलीगंज। रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से हजारों बीघा फसलें जलमग्न हो गई हैं। सौ से अधिक बीघा कृषि भूमि नदी में समा चुकी है। बीते तीन दिनों से प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का रुख नहीं किया है। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।
शुक्रवार शाम चार बजे रामगंगा नदी का जलस्तर 160.770 मीटरगेज दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान के करीब है। बढ़ते जलस्तर से गुजरहाई, सूदनपुर, हैबतपुर, धनेती खरगपुर, मटियार, चुराह नवदिया और जित्तौर जैसे गांवों के खेतों में कई फुट पानी भर गया है। इससे हजारों बीघा धान, तिल, बाजरा, मिर्च और उड़द जैसी फसलें बर्बाद होने लगी हैं।
खादर इलाके में नदी का कटान तेजी से हो रहा है। खड़ी फसलों के साथ ही किसानों की भूमि नदी में समा रही है। रास्तों पर पानी भरा होने की वजह से किसान अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उनके जानवरों को हरा चारा भी नहीं मिल पा रहा है।
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फार्म हाउस पर फंसे किसान
कई किसान फार्म हाउस बनाकर परिवार के साथ यहां रहते हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद इनके मकान भी बाढ़ की चपेट में हैं। मंशाराम, सुरेंद्र, लल्लू, जोगेंद्र, पप्पू आदि ने बताया कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे उनकी व उनके जानवरों की जान का खतरा बना हुआ है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में बनाया गया तटबंध हर साल टूट जाता है। मानसून से पहले अगर इसकी सही तरीके से मरम्मत कराई जाए, तो यह दिक्कत न आए।
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शुक्रवार शाम चार बजे रामगंगा नदी का जलस्तर 160.770 मीटरगेज दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान के करीब है। बढ़ते जलस्तर से गुजरहाई, सूदनपुर, हैबतपुर, धनेती खरगपुर, मटियार, चुराह नवदिया और जित्तौर जैसे गांवों के खेतों में कई फुट पानी भर गया है। इससे हजारों बीघा धान, तिल, बाजरा, मिर्च और उड़द जैसी फसलें बर्बाद होने लगी हैं।
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खादर इलाके में नदी का कटान तेजी से हो रहा है। खड़ी फसलों के साथ ही किसानों की भूमि नदी में समा रही है। रास्तों पर पानी भरा होने की वजह से किसान अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। उनके जानवरों को हरा चारा भी नहीं मिल पा रहा है।
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फार्म हाउस पर फंसे किसान
कई किसान फार्म हाउस बनाकर परिवार के साथ यहां रहते हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद इनके मकान भी बाढ़ की चपेट में हैं। मंशाराम, सुरेंद्र, लल्लू, जोगेंद्र, पप्पू आदि ने बताया कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे उनकी व उनके जानवरों की जान का खतरा बना हुआ है। किसानों का कहना है कि क्षेत्र में बनाया गया तटबंध हर साल टूट जाता है। मानसून से पहले अगर इसकी सही तरीके से मरम्मत कराई जाए, तो यह दिक्कत न आए।