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भाई के इंतजार में गुजर जाता है इन बहनों का रक्षाबंधन
बरेली
Updated Sun, 06 Aug 2017 01:27 AM IST
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बरेली।
मोनिका की शादी हो चुकी है। वह हर साल रक्षाबंधन पर मायके आती है पर उसे छोटा भाई रोहित नहीं मिलता। दरअसल, सुभाषनगर के शांति विहार स्थित अपने घर से वह बीते दस साल से लापता है। तब उसकी उम्र 16 साल थी और वह हाईस्कूल में पढ़ता था। रोहित अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। बहन मोनिका उससे बड़ी है। उसकी शादी दिल्ली में हो चुकी है। इस बार भी वह आएगी पर शायद राखी बांधने के लिए उसे रोहित की कलाई नसीब न हो।
शांति विहार के रहने वाले 55 वर्षीय नरेंद्र सिंह विष्ट बताते हैं कि रोहित एक जनवरी, 2007 को शाम पांच बजे टहलने जाने की बात कहकर निकला था। तब से ही नहीं लौटा। मां कमला विष्ट दूध लेकर लौटीं और रोहित का इंतजार करने लगीं। शाम से सुबह हो गई और दस साल बीतने को हैं, लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ। नरेंद्र विष्ट ने बताया कि पुलिस से शिकायत की तो रोहित के एक दोस्त को उठा लिया गया, लेकिन वह कुछ नहीं बता पाया। दंपति आज भी बेटे को पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल पा रही है।
सालता है बेटे के लापता होने का गम
रोहित की मां कमला विष्ट कहती हैं कि रक्षाबंधन पर बेटी मोनिका आती है तो खुशी तो होती है पर रोहित के लापता होने का गम भी सालता है। रक्षाबंधन पर घर आती है, तो कुछ खुशी महसूस होती है, लेकिन बेटे रोहित का कोई पता न लगने पर बेहद गम सताता है। हर त्योहार पर जब उसकी याद आती है तो बेटे को खोने का जख्म ताजा हो जाता है।
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जेब में तस्वीर रखे रहते हैं पिता
नरेंद्र सिंह विष्ट होम्योपैथिक की दवाएं बेचते हैं। उनकी उम्र करीब 55 साल हो गई। बीते दस साल से वह बेटे की तस्वीर अपनी जेब में रखकर घूमते हैं। जहां उम्मीद दिखती है वहां तस्वीर दिखाकर बेटे के बारे में मालूम करने की कोशिश करते हैं।
आकांक्षा भी है बदनसीब
बहेड़ी के मोहल्ला टांडा निवासी ऑटो चालक संजय का बेटा कन्हैया 17 मार्च, 2017 को होली के दिन लापता हो गया था। उसका आज तक पता नहीं लग सका है। कन्हैया के न मिलने से उसकी इकलौती बहन आकांक्षा भी रक्षाबंधन को लेकर मायूस है। पिता बताते हैं कि थाने में गुमशुदगी भी दर्ज करा चुके हैं, लेकिन कोई पता नहीं चल सका है।
मोनिका की शादी हो चुकी है। वह हर साल रक्षाबंधन पर मायके आती है पर उसे छोटा भाई रोहित नहीं मिलता। दरअसल, सुभाषनगर के शांति विहार स्थित अपने घर से वह बीते दस साल से लापता है। तब उसकी उम्र 16 साल थी और वह हाईस्कूल में पढ़ता था। रोहित अपने माता-पिता का इकलौता बेटा है। बहन मोनिका उससे बड़ी है। उसकी शादी दिल्ली में हो चुकी है। इस बार भी वह आएगी पर शायद राखी बांधने के लिए उसे रोहित की कलाई नसीब न हो।
शांति विहार के रहने वाले 55 वर्षीय नरेंद्र सिंह विष्ट बताते हैं कि रोहित एक जनवरी, 2007 को शाम पांच बजे टहलने जाने की बात कहकर निकला था। तब से ही नहीं लौटा। मां कमला विष्ट दूध लेकर लौटीं और रोहित का इंतजार करने लगीं। शाम से सुबह हो गई और दस साल बीतने को हैं, लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ। नरेंद्र विष्ट ने बताया कि पुलिस से शिकायत की तो रोहित के एक दोस्त को उठा लिया गया, लेकिन वह कुछ नहीं बता पाया। दंपति आज भी बेटे को पाने के लिए अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल पा रही है।
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सालता है बेटे के लापता होने का गम
रोहित की मां कमला विष्ट कहती हैं कि रक्षाबंधन पर बेटी मोनिका आती है तो खुशी तो होती है पर रोहित के लापता होने का गम भी सालता है। रक्षाबंधन पर घर आती है, तो कुछ खुशी महसूस होती है, लेकिन बेटे रोहित का कोई पता न लगने पर बेहद गम सताता है। हर त्योहार पर जब उसकी याद आती है तो बेटे को खोने का जख्म ताजा हो जाता है।
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जेब में तस्वीर रखे रहते हैं पिता
नरेंद्र सिंह विष्ट होम्योपैथिक की दवाएं बेचते हैं। उनकी उम्र करीब 55 साल हो गई। बीते दस साल से वह बेटे की तस्वीर अपनी जेब में रखकर घूमते हैं। जहां उम्मीद दिखती है वहां तस्वीर दिखाकर बेटे के बारे में मालूम करने की कोशिश करते हैं।
आकांक्षा भी है बदनसीब
बहेड़ी के मोहल्ला टांडा निवासी ऑटो चालक संजय का बेटा कन्हैया 17 मार्च, 2017 को होली के दिन लापता हो गया था। उसका आज तक पता नहीं लग सका है। कन्हैया के न मिलने से उसकी इकलौती बहन आकांक्षा भी रक्षाबंधन को लेकर मायूस है। पिता बताते हैं कि थाने में गुमशुदगी भी दर्ज करा चुके हैं, लेकिन कोई पता नहीं चल सका है।