Bareilly : किला क्षेत्र बसाने वाले राजा कालीमोहन नाथ मिश्र नहीं रहे, नम आंखों से लोगों ने दी अंतिम विदाई
राजा कालीमोहन नाथ मिश्र का जन्म 19 मार्च 1937 को हुआ था। उन्हें राजा की उपाधि 16 वर्ष की उम्र में ही मिल गई थी। बृहस्पतिवार देर रात करीब 1:30 बजे उनका निधन हो गया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बरेली में किला क्षेत्र बसाने वाले राजा कालीमोहन नाथ मिश्र का बृहस्पतिवार देर रात करीब 1:30 बजे निधन हो गया। शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे सिटी श्मशान भूमि पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे शरद मिश्रा ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दौरान क्षेत्र के कई लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
बेटे कुंवर दीपक मिश्र ने बताया कि उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं थी। उम्र के लिहाज से अस्वस्थ रह रहे थे। बृहस्पतिवार की देर रात करीब 12 बजे मैं उनके साथ ही था और बातचीत की, वह ठीक था। उसके बाद मैं सोने चला गया। इसी दौरान 1:30 बजे उनकी तबीयत बिगड़ गई। जांच के लिए डॉक्टर को बुलाया, उन्होंने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
बता दें कि राजा कालीमोहन नाथ मिश्र का जन्म 19 मार्च 1937 को हुआ था। उन्हें राजा की उपाधि 16 वर्ष की उम्र में ही मिल गई थी। वह अपने पीछे बड़े बेटे शरद मिश्रा, कुंवर दीपक मिश्रा, कीर्ति कुमार मिश्रा, पंकज मोहन मिश्रा व डॉ. संजय मिश्रा समेत बहू, पौत्र, पौत्री समेत भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
तिलक इंटर कॉलेज, किला पुल के लिए दी जमीन
फूलबाग में 60 बीघा से ज्यादा क्षेत्रफल में फैली उनकी कोठी है। जब यह कोठी बनना शुरू हुई थी तो इसके सामने ही ईंट भट्ठे लगवाए गए थे। बेटे कुंवर दीपक मिश्र ने बताया कि क्षेत्र में बने तिलक इंटर कॉलेज के लिए उन्होंने जमीन दान दी थी। इसी तरह किला पुल बनने के दौरान 1977 में उन्होंने जमीन दान दी थी।
राजा कालीमोहन नाथ मिश्र के पिता राजा श्याम मोहन नाथ मिश्र ने सिटी श्मशान भूमि के लिए जमीन का गुप्त दान दिया था। इन्होंने ही स्वाले नगर बसाया। यह इलाका पहले छावनी राजा कालीचरण (राजा काली मोहन नाथ मिश्र के बाबा) कहलाता था। बाद में इसे किला छावनी कहा जाने लगा। राजस्व रिकॉर्ड में यह आज भी छावनी राजा कालीचरण दर्ज है। राजा कालीचरण मिश्र जीवन भर एमएलसी रहे। 1932 में उनका निधन हुआ।