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31 साल बाद फिर समय बताने लगेगा कुतुबखाना घंटाघर
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कुतुबखाना स्थित घंटाघर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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1975 में हुआ था घंटाघर का निर्माण, अब स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत होगा सौंदर्यीकरण
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बरेली। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत घंटाघर को फिर से सजाया, संवारा जाएगा। करीब 31 सालों से खराब पड़ी घंटाघर की घड़ी अब फि र लोगों को समय बताएगी। इसके टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके अलावा अक्षर विहार पार्क में नौकायन के लिए भी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
कुतुबखाना के पास घंटाघर का निर्माण 1975 में हुआ था। समय बदला तो शहर के मुख्य बाजार को समय बताने वाला घंटाघर अव्यवस्थाओं में फंसकर अपनी पहचान खोता गया। व्यापारी नेता राजेश छाबड़ा ने बताया कि कुतुबखाना घंटाघर का निर्माण तत्कालीन नगर विकास मंत्री राम सिंह खन्ना ने कराया था। यहां खूबसूरत फव्वारा और पेड़ पौधे लगाए गए थे। पार्किंग की भी व्यवस्था थी।
घंटाघर की इमारत में सबसे ऊपर लगी घड़ी लोगों को समय बताती थी। 1977 में इमारत पर एक साइरन भी लगा था, जो हर घंटे पर बजता था। इससे उन लोगों को भी वक्त का अंदाजा हो जाता था, जो घड़ी नहीं देख पाते थे। एक समय बाद साइरन खराब हो गया। घड़ी की टिक-टिक भी बंद हो गई, फिर इसकी मरम्मत ही नहीं कराई गई। मेयर उमेश गौतम ने बताया कि घंटाघर के सौंदर्यीकरण के साथ ही अक्षर विहार पार्क को भी विकसित किया जाएगा। अक्षर विहार में नौकायन शुरू कराया जाएगा। करीब एक करोड़ रुपये से होने वाले इन कामों के टेंडर हो चुके हैं। जुलाई में ही काम शुरू हो जाएगा।
कुतुबखाना के पास घंटाघर का निर्माण 1975 में हुआ था। समय बदला तो शहर के मुख्य बाजार को समय बताने वाला घंटाघर अव्यवस्थाओं में फंसकर अपनी पहचान खोता गया। व्यापारी नेता राजेश छाबड़ा ने बताया कि कुतुबखाना घंटाघर का निर्माण तत्कालीन नगर विकास मंत्री राम सिंह खन्ना ने कराया था। यहां खूबसूरत फव्वारा और पेड़ पौधे लगाए गए थे। पार्किंग की भी व्यवस्था थी।
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घंटाघर की इमारत में सबसे ऊपर लगी घड़ी लोगों को समय बताती थी। 1977 में इमारत पर एक साइरन भी लगा था, जो हर घंटे पर बजता था। इससे उन लोगों को भी वक्त का अंदाजा हो जाता था, जो घड़ी नहीं देख पाते थे। एक समय बाद साइरन खराब हो गया। घड़ी की टिक-टिक भी बंद हो गई, फिर इसकी मरम्मत ही नहीं कराई गई। मेयर उमेश गौतम ने बताया कि घंटाघर के सौंदर्यीकरण के साथ ही अक्षर विहार पार्क को भी विकसित किया जाएगा। अक्षर विहार में नौकायन शुरू कराया जाएगा। करीब एक करोड़ रुपये से होने वाले इन कामों के टेंडर हो चुके हैं। जुलाई में ही काम शुरू हो जाएगा।
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