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Bareilly News: कुतुबखाना... हर कदम बदइंतजामी, सिर पर मंडरा रही मौत
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बरेली। कुतुबखाना पुल का निर्माण अंतिम चरण में है पर यहां हर कदम पर बदइंतजामी हावी है। 14 जनवरी को पिलर संख्या 21 व 22 पर स्लैब डाली गई थी। जान जोखिम में डालकर लोग शटरिंग के नीचे से गुजर रहे हैं। यहां अब तक दो हादसे हो चुके हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। इससे हादसे का खतरा बना हुआ है।
कुतुबखाना पुल का निर्माण शुरू से ही बदइंतजामियों का शिकार रहा। देरी की वजह से कई बार कार्यदायी संस्था पर जुर्माना लगाया जा चुका है। इन दिनों बारिश के कारण स्लैब के नीचे रोड पर फिसलन और कीचड़ हो गया है। इसके बाद भी यहां से लोगों का आवागमन हो रहा है। आसपास के दुकानदारों का व्यापार भी ठप है। उनका कहना है कि शटरिंग की वजह से खतरा बना हुआ है। कार्यदायी संस्था मंटेना इंफ्रासोल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एमके सिंह ने बताया कि सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है। जल्द शटरिंग खोल दी जाएगी।
निर्माण के दौरान चार सितंबर को धनंजय नाम के मजदूर की पुल से गिरकर मौत हो गई थी। 22 सितंबर को शहर के भूड़ निवासी सुधीर श्रीवास्तव की शटरिंग गिरने से जान चली गई थी। इसके बाद भी यहां लापरवाही बरती जा रही है।
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स्लैब डाले 22 दिन से ज्यादा हो गए हैं। अब तक शटरिंग नहीं खोली गई है। शटरिंग कई स्थानों पर ढीली भी हो गई है। नीचे से लोगों का आवागमन हो रहा है। इससे हादसों की आशंका है। - दीपक अग्रवाल, व्यापारी
शटरिंग को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। पहले भी यहां दो लोगों की जान जा चुकी है। कई लोग घायल भी हो चुके हैं। शटरिंग के आसपास कीचड़ और फिसलन के कारण कभी भी कोई हादसा हो सकता है। - छेतेंद्र सिंह, व्यापारी
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कुतुबखाना पुल का निर्माण शुरू से ही बदइंतजामियों का शिकार रहा। देरी की वजह से कई बार कार्यदायी संस्था पर जुर्माना लगाया जा चुका है। इन दिनों बारिश के कारण स्लैब के नीचे रोड पर फिसलन और कीचड़ हो गया है। इसके बाद भी यहां से लोगों का आवागमन हो रहा है। आसपास के दुकानदारों का व्यापार भी ठप है। उनका कहना है कि शटरिंग की वजह से खतरा बना हुआ है। कार्यदायी संस्था मंटेना इंफ्रासोल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर एमके सिंह ने बताया कि सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है। जल्द शटरिंग खोल दी जाएगी।
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निर्माण के दौरान चार सितंबर को धनंजय नाम के मजदूर की पुल से गिरकर मौत हो गई थी। 22 सितंबर को शहर के भूड़ निवासी सुधीर श्रीवास्तव की शटरिंग गिरने से जान चली गई थी। इसके बाद भी यहां लापरवाही बरती जा रही है।
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स्लैब डाले 22 दिन से ज्यादा हो गए हैं। अब तक शटरिंग नहीं खोली गई है। शटरिंग कई स्थानों पर ढीली भी हो गई है। नीचे से लोगों का आवागमन हो रहा है। इससे हादसों की आशंका है। - दीपक अग्रवाल, व्यापारी
शटरिंग को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है। पहले भी यहां दो लोगों की जान जा चुकी है। कई लोग घायल भी हो चुके हैं। शटरिंग के आसपास कीचड़ और फिसलन के कारण कभी भी कोई हादसा हो सकता है। - छेतेंद्र सिंह, व्यापारी