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फ्लाईओवर का विरोधः इंजीनियरों ने खारिज की व्यापारियों की मांग
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अधिकारियों के साथ बैठक करते व्यापारी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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सेतु निगम के इंजीनियरों के मुताबिक सड़क की चौड़ाई कम, खोदाई से इमारतों के धराशायी होने का भी खतरा
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बरेली। कुतुबखाना में फ्लाईओवर के बजाय अंडरपास बनाने की मांग कर रहे व्यापारियों को एक और झटका लगा है। सेतु निगम के इंजीनियरों ने साफ किया है कि कुतुबखाना में सड़क की चौड़ाई इतनी नहीं है कि वहां अंडरपास बनाया जा सके। इसके अलावा अंडरपास बनाया गया तो यहां तमाम इमारतों के लिए भी खतरा पैदा हो जाएगा क्योंकि अंडरपास के लिए सड़क पर गहरी खोदाई करनी पड़ेगी और इससे आसपास के इलाके में भारी कंपन पैदा होगा।
कुतुबखाना की तंग सड़क पर लगने वाले जाम को खत्म करने के लिए हाल ही में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत यहां फ्लाईओवर का निर्माण किए जाने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। बता दें कि मेयर उमेश गौतम काफी समय से कुतुबखाना में फ्लाईओवर का निर्माण कराने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन यहां के व्यापारियों को यहां पुल का निर्माण मंजूर नहीं है। पिछले दिनों स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक में फ्लाईओवर निर्माण का प्रस्ताव मंजूर होने के बाद यहां एक बार फिर व्यापारियों की ओर से विरोध शुरू कर दिया गया है। कुतुबखाना इलाके के व्यापारी जाम खत्म करने के लिए यहां अवैध कब्जे हटवाने के साथ भारी वाहनों की आवाजाही बंद कराने जैसे उपायों को ज्यादा उपयुक्त बता रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि कुतुबखाना में फ्लाईओवर बनने से उनका कारोबार चौपट हो जाएगा। लिहाजा अगर बहुत जरूरी है तो यहां फ्लाईओवर के बजाय यहां अंडरपास बनवा दिया जाए।
अब सेतु निगम के इंजीनियरों ने व्यापारियों की यह मांग भी खारिज कर दी है। उनका कहना है कि कुतुबखाना में अंडरपास का निर्माण किया जाना जरा भी संभव नहीं है क्योंकि पूरी सड़क की चौड़ाई नौ से दस मीटर ही चौड़ी है। अगर यहां दस मीटर चौड़ा अंडरपास बनाने के बारे में सोचा भी जाए तो तय मानकों के मुताबिक सड़क की चौड़ाई कम से कम बीस मीटर होनी चाहिए थी। जब सड़क पर खोदाई ही नहीं हो पाएगी तो अंडरपास कैसे बन पाएगा। इंजीनियरों का यह भी कहना है कि इस बाजार में ज्यादातर इमारतें और दुकानें काफी पुरानी हैं। ऐसे में यहां ड्रिल मशीन का प्रयोग किया गया तो उसके भारी कंपन से भवनों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। लिहाजा यहां किसी भी हाल में अंडरपास बनाने के बारे में सोचा नहीं जा सकता।
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कोहाड़ापीर में बैठक के दौरान कारोबारियों ने कहा कि मेयर उनके हित को साफ तौर पर नजरअंदाज कर रहे हैं। कुतुबखाना पर फ्लाईओवर निर्माण करने से हजारों परिवारों के लिए रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा। यहां जो कर्मचारी काम करते हैं, वे फुटपाथ पर आ जाएंगे। कई रिक्शा और ठेला चालकों का परिवार सिर्फ कुतुबखाना बाजार से चल रहा है। उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर की पैरवी तो की जा रही है लेकिन उसके बनने से होने वाले फायदे और नुकसान पर चर्चा तक नहीं की गई है। यदि चर्चा की जाए तो अस्सी फीसदी नुकसान ही सामने आएंगे। कारोबारियों ने कहा कि अब यदि बाजार में फ्लाईओवर निर्माण के लिए कोई टीम आएगी तो वे लोग उसका विरोध करेंगे। बैठक में ऋतुराज बास, संजय आनंद, अमनदीप लकी, सरपाल, जसपाल सिंह खुराना, अंकित मक्कड़, मिथुन रस्तोगी, कैलाश, विजय गुप्ता आदि कारोबारी मौजूद रहे।
कुतुबखाना की तंग सड़क पर लगने वाले जाम को खत्म करने के लिए हाल ही में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत यहां फ्लाईओवर का निर्माण किए जाने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है। बता दें कि मेयर उमेश गौतम काफी समय से कुतुबखाना में फ्लाईओवर का निर्माण कराने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन यहां के व्यापारियों को यहां पुल का निर्माण मंजूर नहीं है। पिछले दिनों स्मार्ट सिटी बोर्ड की बैठक में फ्लाईओवर निर्माण का प्रस्ताव मंजूर होने के बाद यहां एक बार फिर व्यापारियों की ओर से विरोध शुरू कर दिया गया है। कुतुबखाना इलाके के व्यापारी जाम खत्म करने के लिए यहां अवैध कब्जे हटवाने के साथ भारी वाहनों की आवाजाही बंद कराने जैसे उपायों को ज्यादा उपयुक्त बता रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि कुतुबखाना में फ्लाईओवर बनने से उनका कारोबार चौपट हो जाएगा। लिहाजा अगर बहुत जरूरी है तो यहां फ्लाईओवर के बजाय यहां अंडरपास बनवा दिया जाए।
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अब सेतु निगम के इंजीनियरों ने व्यापारियों की यह मांग भी खारिज कर दी है। उनका कहना है कि कुतुबखाना में अंडरपास का निर्माण किया जाना जरा भी संभव नहीं है क्योंकि पूरी सड़क की चौड़ाई नौ से दस मीटर ही चौड़ी है। अगर यहां दस मीटर चौड़ा अंडरपास बनाने के बारे में सोचा भी जाए तो तय मानकों के मुताबिक सड़क की चौड़ाई कम से कम बीस मीटर होनी चाहिए थी। जब सड़क पर खोदाई ही नहीं हो पाएगी तो अंडरपास कैसे बन पाएगा। इंजीनियरों का यह भी कहना है कि इस बाजार में ज्यादातर इमारतें और दुकानें काफी पुरानी हैं। ऐसे में यहां ड्रिल मशीन का प्रयोग किया गया तो उसके भारी कंपन से भवनों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। लिहाजा यहां किसी भी हाल में अंडरपास बनाने के बारे में सोचा नहीं जा सकता।
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विरोध: मेयर के खिलाफ नारेबाजी, सेतु निगम की टीमों को रोकने का एलान
बरेली। एक तरफ कुतुबखाना फ्लाईओवर के निर्माण की तैयारी हो रही है तो दूसरी तरफ उसका विरोध भी जोर पकड़ रहा है। फ्लाईओवर का विरोध कर रहे कारोबारियों ने रविवार को कोहाड़ापीर पर बैठक के बाद मेयर और नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फ्लाईओवर का काम नहीं रोका गया तो वे धरना-प्रदर्शन शुरू कर देंगे। इसके साथ यहां आने वाली सेतु निगम की टीमों का भी विरोध करेंगे।कोहाड़ापीर में बैठक के दौरान कारोबारियों ने कहा कि मेयर उनके हित को साफ तौर पर नजरअंदाज कर रहे हैं। कुतुबखाना पर फ्लाईओवर निर्माण करने से हजारों परिवारों के लिए रोजी-रोटी का संकट पैदा हो जाएगा। यहां जो कर्मचारी काम करते हैं, वे फुटपाथ पर आ जाएंगे। कई रिक्शा और ठेला चालकों का परिवार सिर्फ कुतुबखाना बाजार से चल रहा है। उन्होंने कहा कि फ्लाईओवर की पैरवी तो की जा रही है लेकिन उसके बनने से होने वाले फायदे और नुकसान पर चर्चा तक नहीं की गई है। यदि चर्चा की जाए तो अस्सी फीसदी नुकसान ही सामने आएंगे। कारोबारियों ने कहा कि अब यदि बाजार में फ्लाईओवर निर्माण के लिए कोई टीम आएगी तो वे लोग उसका विरोध करेंगे। बैठक में ऋतुराज बास, संजय आनंद, अमनदीप लकी, सरपाल, जसपाल सिंह खुराना, अंकित मक्कड़, मिथुन रस्तोगी, कैलाश, विजय गुप्ता आदि कारोबारी मौजूद रहे।