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प्रधान बोलीं- कुछ न समझे, पति बोले- हम सब समझ गए
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Tue, 29 Mar 2016 01:20 AM IST
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पंचायत राज विभाग की ओर से संजय कम्यूनिटी हाल में सोमवार को कराए गए प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल भदपुरा ब्लाक के पेहना गांव की प्रधान हीराकली अपने पति अयोध्या प्रसाद के साथ पूरे समय घूंघट काढ़े बैठी रहीं। प्रधान से पूछा- प्रशिक्षण में क्या सुना तो बोलीं- हम कुछ न समझे। बगल में बैठे पति की ओर इशारा किया और बोलीं- प्रधानी यही करे हैं, यही सब कुछ सुने हैं। इस पर अयोध्या प्रसाद ने जवाब दिया- हां हमने सबकुछ सुन लिया और अफसरों की सारी बातें समझ ली हैं। प्रधानपति ने ही बताया- पत्नी पढ़ीलिखी नहीं हैं लेकिन सिर्फ अपना नाम लिख लेती हैं इसलिए सारे काम वही करते हैं। पंचायतों में महिला सशक्तिकरण की वास्तविक तस्वीर इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दिखाई दी। अधिकांश महिला प्रधान प्रशिक्षण में शामिल होने ही नहीं आईं। उनके बजाय पति या घर से अन्य पुरुष ही प्रशिक्षण लेने पहुंचे। जो महिलाएं आईं भी, उनके साथ पति या घर के अन्य पुरुष सदस्य साथ आए थे लेकिन अफसरों की बातें सुनने में पुरुषों ने ही दिलचस्पी ली। प्रशिक्षण में महिला प्रधानों की उपस्थिति महज औपचारिक ही रही।
मझगवां ब्लाक के कुंवरपुर गांव की प्रधान रामवती अपने जेठ पूरनलाल के साथ प्रशिक्षण लेने आईं। उनने रिटायर फौजी जेठ ने ही बातों-बातों में बता दिया कि वह पूर्व प्रधान हैं और रामवती की प्रधानी उन्हें ही करनी है। इसके बाद रामवती कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुईं। पूरनलाल ने बताया कि रामवती के पति बुद्धपाल तो सेना में हवलदार हैं और वार्डर पर तैनात हैं। वर्ष 2003 में शहीद फौजी टेकचंद्र की पत्नी विशेष कुमारी को मीरगंज ब्लाक के खिरौदी गांव से प्रधान बनाया है। विशेष कुमार अपने देवर डॉ. प्रेमचंद्र के साथ प्रशिक्षण में आईं और पूरे समय देवर की गाड़ी का हेलमेट पकड़कर कार्यक्रम में बैठी रहीं। प्रेमचंद्र ने कहा कि उन्होंने अफसरों की बताईं सारी खास बातें नोट कर ली हैं। आलमपुर जाफराबाद ब्लाक के बढ़रई कुइंया गांव की प्रधान ममता सागर की ओर से उनके पति के दादा टीकाराम प्रशिक्षण लेने आए। पूछने पर टीकाराम ने कहा- आप तो जानते ही हो घर की बहुओं प्रधानी कहां चला पाती हैं तो बहू भला यहां आकर क्या करती। प्रधान ममता के पति राजेश सागर बसपा के जिलाध्यक्ष हैं। रामनगर ब्लाक के व्योधना खुर्द गांव की प्रधान सुखदेवी के स्थान पर उनके पति मुन्नालाल प्रशिक्षण लेने आए। पूछा- पत्नी नहीं आईं तो बोले- वे दवाई लेने चली गई हैं। मुन्नालाल ने कहा कि प्रशिक्षण में खाली बातें हो रही हैं। सबको तो कमीशन चाहिए इसीलिए गांव में काम नहीं हो पाते। नवाबगंज ब्लाक के पंडरी बरौर गांव की प्रधान मुन्नी देवी के बजाय प्रशिक्षण में उनके बेटे धर्मेंद्र शामिल हुए। बहेड़ी ब्लाक के जसनपुर गांव की प्रधान तारावती भी नहीं आईं। उनके बजाय उनके पति विनोद कुमार प्रशिक्षण में शामिल हुए।
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डीएम ने दिखाया आईना
प्रशिक्षण के मुख्य अतिथि डीएम गौरव दयाल ने अपने संबोधन में प्रधानों को आईना दिखाने का काम किया। कहा कि सरकार पंचायतों को खूब पैसा दे रही है। अब सिर्फ आप लोगों की जिम्मेदारी है कि अपने गांव में बेहतर काम करवाकर दिखाएं। डीएम ने महिला प्रधानों के लिए कहा कि वे कब तक पुरुषों पर अपनी निर्भरता बनाए रखेंगी। उन्हें सोचना चाहिए कि कोई कुछ भी करेगा लेकिन जिम्मेदारी उनकी ही होगी क्योंकि वे प्रधान हैं और साइन उनके ही होते हैं। डीएम ने जब कहा कि प्रधानों के सामने भी बहुत दिक्कतें आती हैं, आपने जिन्हें हराया है, वे आपकी शिकायतें करेंगे, भले ही आप अच्छा करें या बुरा, वे कमी निकालते रहेंगे..., तो कार्यक्रम में मौजूद सारे प्रधान तालियां बजाने लगे। इस पर डीएम बोले- तालियां बजाने की आवश्यकता नहीं है, हो सकता है कि कुछ शिकायतें सही भी हों तो कार्रवाई से बच नहीं पाओगे। उन्होंने कहा कि अगर सही काम करोगे तो कोई दिक्कत नहीं होगी लेकिन गड़बड़ी होगी तो कार्रवाई जरूरी होगी।
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बातें हैं बातों का क्या...
प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रधानों के लिए बातें सब वही हुईं- सरकारी योजनाएं बताई गईं और उन्हें कैसे करें, इसके बारे में बताया गया लेकिन पांच साल का पूरा कार्यकाल दो-चार घंटे में समझना व्यवहारिक नहीं था इसीलिए बहुत सारे प्रधानों ने अफसरों की बातों पर ही सवाल उठाए। फतेहगंज पश्चिमी ब्लाक के चिटौली गांव के प्रधान नरेश चंद्र ने कहा- सिर्फ लोहिया गांव के लिए ही शौचालय मिलते हैं। इंदिरा आवास मिलते हैं, बाकी गांवों को नहीं। अरे हमारे गांव में भी देख आइए, न जाने कितने लोगों के घरों में शौचालय नहीं हैं। बहेड़ी ब्लाक के नवेली गांव के प्रधान फूल शाह ने बताया कि उनके गांव में कोई सफाई कर्मचारी नहीं है। बीडीओ और डीपीआरओ को कई बार लिखकर दे चुके लेकिन कोई व्यवस्था नहीं की गई है। बोले- डीएम और सीडीओ को भी लिखने से क्या फायदा, वह नीचे के अधिकारियों को मार्क कर देंगे और फिर सब बहानेबाजी करके टाल जाएंगे। शेरगढ़ ब्लाक के परेवा गांव की प्रधान खैरुलनिशा के पति जाहिद अली ने कहा कि उनके गांव में काफी दिनों से मिड-डे मील नहीं बंट रहा लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। कई प्रधानों का कहना था कि कई-कई गांवों में एक-एक ही सेक्रेटरी हैं, इससे भी काम प्रभावित होते हैं। वैसे कार्यक्रम में सीडीओ शिवसहाय अवस्थी, डीआरडीए के परियोजना निदेशक साहित्य प्रकाश मिश्रा, डीपीआरओ दिनेश सिंह, डीडीओ केशरवानी, समाज कल्याण अधिकारी एके सिंह, जिला विकलांग जन कल्याण अधिकारी डॉ. दीपक शुक्ला समेत कई विभागों के अधिकारियों ने अपने विभाग की योजनाओं को बताया।
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प्रधानों ने कर दिया हंगामा
कार्यक्रम में बीएसए देवेंद्र सचान प्रधानों को मिड-डे मील की जानकारी दे रहे थे। बोले- मिड-डे मील में दूध भी बांटने का प्रावधान है, तभी कई प्रधानों ने हंगामा शुरू कर दिया। प्रधानों का कहना था कि अब जब मिड-डे मील के वितरण से उनका कोई वास्ता नहीं रखा गया है। वितरण की जिम्मेदार गांव की स्कूल अभिभावक समिति को सौंप दी गई है तो इसके लिए प्रधानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कई प्रधान बोले- स्कूलों के हेडमास्टर मनमानी करते हैं लेकिन हम उनका कुछ नहीं कर सकते लेकिन कार्रवाई हमारे ऊपर ही की जाती है। शोरगुल ज्यादा होने लगा तो सीडीओ शिवसहाय अवस्थी ने माइक संभालकर प्रधानों को शांत कराने की कोशिश की। बोले- यहां इस तरह की बातें न की जाएं लेकिन प्रधान कुछ देर बाद खुद ही शांत हो गए।
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मझगवां ब्लाक के कुंवरपुर गांव की प्रधान रामवती अपने जेठ पूरनलाल के साथ प्रशिक्षण लेने आईं। उनने रिटायर फौजी जेठ ने ही बातों-बातों में बता दिया कि वह पूर्व प्रधान हैं और रामवती की प्रधानी उन्हें ही करनी है। इसके बाद रामवती कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हुईं। पूरनलाल ने बताया कि रामवती के पति बुद्धपाल तो सेना में हवलदार हैं और वार्डर पर तैनात हैं। वर्ष 2003 में शहीद फौजी टेकचंद्र की पत्नी विशेष कुमारी को मीरगंज ब्लाक के खिरौदी गांव से प्रधान बनाया है। विशेष कुमार अपने देवर डॉ. प्रेमचंद्र के साथ प्रशिक्षण में आईं और पूरे समय देवर की गाड़ी का हेलमेट पकड़कर कार्यक्रम में बैठी रहीं। प्रेमचंद्र ने कहा कि उन्होंने अफसरों की बताईं सारी खास बातें नोट कर ली हैं। आलमपुर जाफराबाद ब्लाक के बढ़रई कुइंया गांव की प्रधान ममता सागर की ओर से उनके पति के दादा टीकाराम प्रशिक्षण लेने आए। पूछने पर टीकाराम ने कहा- आप तो जानते ही हो घर की बहुओं प्रधानी कहां चला पाती हैं तो बहू भला यहां आकर क्या करती। प्रधान ममता के पति राजेश सागर बसपा के जिलाध्यक्ष हैं। रामनगर ब्लाक के व्योधना खुर्द गांव की प्रधान सुखदेवी के स्थान पर उनके पति मुन्नालाल प्रशिक्षण लेने आए। पूछा- पत्नी नहीं आईं तो बोले- वे दवाई लेने चली गई हैं। मुन्नालाल ने कहा कि प्रशिक्षण में खाली बातें हो रही हैं। सबको तो कमीशन चाहिए इसीलिए गांव में काम नहीं हो पाते। नवाबगंज ब्लाक के पंडरी बरौर गांव की प्रधान मुन्नी देवी के बजाय प्रशिक्षण में उनके बेटे धर्मेंद्र शामिल हुए। बहेड़ी ब्लाक के जसनपुर गांव की प्रधान तारावती भी नहीं आईं। उनके बजाय उनके पति विनोद कुमार प्रशिक्षण में शामिल हुए।
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डीएम ने दिखाया आईना
प्रशिक्षण के मुख्य अतिथि डीएम गौरव दयाल ने अपने संबोधन में प्रधानों को आईना दिखाने का काम किया। कहा कि सरकार पंचायतों को खूब पैसा दे रही है। अब सिर्फ आप लोगों की जिम्मेदारी है कि अपने गांव में बेहतर काम करवाकर दिखाएं। डीएम ने महिला प्रधानों के लिए कहा कि वे कब तक पुरुषों पर अपनी निर्भरता बनाए रखेंगी। उन्हें सोचना चाहिए कि कोई कुछ भी करेगा लेकिन जिम्मेदारी उनकी ही होगी क्योंकि वे प्रधान हैं और साइन उनके ही होते हैं। डीएम ने जब कहा कि प्रधानों के सामने भी बहुत दिक्कतें आती हैं, आपने जिन्हें हराया है, वे आपकी शिकायतें करेंगे, भले ही आप अच्छा करें या बुरा, वे कमी निकालते रहेंगे..., तो कार्यक्रम में मौजूद सारे प्रधान तालियां बजाने लगे। इस पर डीएम बोले- तालियां बजाने की आवश्यकता नहीं है, हो सकता है कि कुछ शिकायतें सही भी हों तो कार्रवाई से बच नहीं पाओगे। उन्होंने कहा कि अगर सही काम करोगे तो कोई दिक्कत नहीं होगी लेकिन गड़बड़ी होगी तो कार्रवाई जरूरी होगी।
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प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रधानों के लिए बातें सब वही हुईं- सरकारी योजनाएं बताई गईं और उन्हें कैसे करें, इसके बारे में बताया गया लेकिन पांच साल का पूरा कार्यकाल दो-चार घंटे में समझना व्यवहारिक नहीं था इसीलिए बहुत सारे प्रधानों ने अफसरों की बातों पर ही सवाल उठाए। फतेहगंज पश्चिमी ब्लाक के चिटौली गांव के प्रधान नरेश चंद्र ने कहा- सिर्फ लोहिया गांव के लिए ही शौचालय मिलते हैं। इंदिरा आवास मिलते हैं, बाकी गांवों को नहीं। अरे हमारे गांव में भी देख आइए, न जाने कितने लोगों के घरों में शौचालय नहीं हैं। बहेड़ी ब्लाक के नवेली गांव के प्रधान फूल शाह ने बताया कि उनके गांव में कोई सफाई कर्मचारी नहीं है। बीडीओ और डीपीआरओ को कई बार लिखकर दे चुके लेकिन कोई व्यवस्था नहीं की गई है। बोले- डीएम और सीडीओ को भी लिखने से क्या फायदा, वह नीचे के अधिकारियों को मार्क कर देंगे और फिर सब बहानेबाजी करके टाल जाएंगे। शेरगढ़ ब्लाक के परेवा गांव की प्रधान खैरुलनिशा के पति जाहिद अली ने कहा कि उनके गांव में काफी दिनों से मिड-डे मील नहीं बंट रहा लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। कई प्रधानों का कहना था कि कई-कई गांवों में एक-एक ही सेक्रेटरी हैं, इससे भी काम प्रभावित होते हैं। वैसे कार्यक्रम में सीडीओ शिवसहाय अवस्थी, डीआरडीए के परियोजना निदेशक साहित्य प्रकाश मिश्रा, डीपीआरओ दिनेश सिंह, डीडीओ केशरवानी, समाज कल्याण अधिकारी एके सिंह, जिला विकलांग जन कल्याण अधिकारी डॉ. दीपक शुक्ला समेत कई विभागों के अधिकारियों ने अपने विभाग की योजनाओं को बताया।
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प्रधानों ने कर दिया हंगामा
कार्यक्रम में बीएसए देवेंद्र सचान प्रधानों को मिड-डे मील की जानकारी दे रहे थे। बोले- मिड-डे मील में दूध भी बांटने का प्रावधान है, तभी कई प्रधानों ने हंगामा शुरू कर दिया। प्रधानों का कहना था कि अब जब मिड-डे मील के वितरण से उनका कोई वास्ता नहीं रखा गया है। वितरण की जिम्मेदार गांव की स्कूल अभिभावक समिति को सौंप दी गई है तो इसके लिए प्रधानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कई प्रधान बोले- स्कूलों के हेडमास्टर मनमानी करते हैं लेकिन हम उनका कुछ नहीं कर सकते लेकिन कार्रवाई हमारे ऊपर ही की जाती है। शोरगुल ज्यादा होने लगा तो सीडीओ शिवसहाय अवस्थी ने माइक संभालकर प्रधानों को शांत कराने की कोशिश की। बोले- यहां इस तरह की बातें न की जाएं लेकिन प्रधान कुछ देर बाद खुद ही शांत हो गए।