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Bareilly News: प्रयागराज महाकुंभ और होली की भीड़ ने बिगाड़ी ट्रेनों के कोच की सेहत
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बरेली। पहले प्रयागराज महाकुंभ और फिर होली के दौरान ट्रेनों में क्षमता से ज्यादा लोगों ने यात्रा की। इससे ट्रेनों के कोचों की स्थिति खराब हो गई है। इस वजह से कारखाना में इन दिनों मरम्मत के लिए सामान्य दिनों की तुलना में दोगुने से ज्यादा कोच पहुंच रहे हैं। ज्यादा समस्या वायरिंग, लाइटिंग के अलावा टॉयलेट, दरवाजे व खिड़कियों से संबंधित आ रही हैं।
प्रयागराज महाकुंभ के लिए रेलवे ने 50 दिन तक बरेली होते हुए 60 से ज्यादा विशेष ट्रेनों का संचालन किया। होली के दौरान भी 50 से ज्यादा विशेष ट्रेनें चलाई गईं। आमतौर पर 22 कोच की एक ट्रेन की क्षमता 1200 से 1400 यात्रियों की होती है, लेकिन महाकुंभ और होली के दौरान एक ट्रेन में 2500 से 3000 यात्रियों ने सफर किया।
अकेले बरेली जंक्शन पर ही महाकुंभ के दौरान टिकटों की बिक्री चार-पांच हजार की तुलना में बढ़कर 14 हजार तक हो गई थी। अब यात्रियों की संख्या में कमी आई है। ट्रेनों में लगातार क्षमता से ज्यादा यात्रियों के सफर करने के कारण कोचों की दशा खराब हो गई। अब गर्मियों की छुट्टियों में विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाना है। इससे पहले कोचों की मरम्मत कराई जा रही है।
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18 महीने में होती है कोच की ओवरहॉलिंग
ट्रेन के कोच की ओवरहॉलिंग 18 माह के बाद होती है। एलएचबी और आईसीएफ कोचों का शेड्यूल पहले से तय होता है। किसी ट्रेन के एक ट्रिप पूरा करने के बाद कोच का सामान्य मेंटीनेंस किया जाता है, लेकिन ज्यादा खराबी आने की दशा में कोच को कारखाना भेज दिया जाता है।
ट्रेनों की संख्या बढ़ना भी कारण
महाकुंभ और होली के दौरान विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया। इससे ट्रेनों और कोचों की संख्या भी बढ़ गई। अधिकारियों का कहना है कि विशेष ट्रेनों के अलावा मुरादाबाद और इज्जतनगर मंडल में एक साल में सात जोड़ी से ज्यादा नई ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया है। इससे भी रेल कारखाने में काम बढ़ा है। संवाद
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महाकुंभ और होली के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया। एक साल के अंदर कई नई नियमित ट्रेनों का संचालन भी शुरू किया गया है। ट्रेनों की संख्या बढ़ने के कारण कारखाना में मरम्मत के लिए आने वाले कोचाें की संख्या भी बढ़ी है। कोच में भीड़ के दबाव के कारण कुछ कमियां आ जाती हैं। - संजीव शर्मा, सीनियर डीसीएम इज्जतनगर मंडल
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प्रयागराज महाकुंभ के लिए रेलवे ने 50 दिन तक बरेली होते हुए 60 से ज्यादा विशेष ट्रेनों का संचालन किया। होली के दौरान भी 50 से ज्यादा विशेष ट्रेनें चलाई गईं। आमतौर पर 22 कोच की एक ट्रेन की क्षमता 1200 से 1400 यात्रियों की होती है, लेकिन महाकुंभ और होली के दौरान एक ट्रेन में 2500 से 3000 यात्रियों ने सफर किया।
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अकेले बरेली जंक्शन पर ही महाकुंभ के दौरान टिकटों की बिक्री चार-पांच हजार की तुलना में बढ़कर 14 हजार तक हो गई थी। अब यात्रियों की संख्या में कमी आई है। ट्रेनों में लगातार क्षमता से ज्यादा यात्रियों के सफर करने के कारण कोचों की दशा खराब हो गई। अब गर्मियों की छुट्टियों में विशेष ट्रेनों का संचालन किया जाना है। इससे पहले कोचों की मरम्मत कराई जा रही है।
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18 महीने में होती है कोच की ओवरहॉलिंग
ट्रेन के कोच की ओवरहॉलिंग 18 माह के बाद होती है। एलएचबी और आईसीएफ कोचों का शेड्यूल पहले से तय होता है। किसी ट्रेन के एक ट्रिप पूरा करने के बाद कोच का सामान्य मेंटीनेंस किया जाता है, लेकिन ज्यादा खराबी आने की दशा में कोच को कारखाना भेज दिया जाता है।
ट्रेनों की संख्या बढ़ना भी कारण
महाकुंभ और होली के दौरान विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया। इससे ट्रेनों और कोचों की संख्या भी बढ़ गई। अधिकारियों का कहना है कि विशेष ट्रेनों के अलावा मुरादाबाद और इज्जतनगर मंडल में एक साल में सात जोड़ी से ज्यादा नई ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया है। इससे भी रेल कारखाने में काम बढ़ा है। संवाद
महाकुंभ और होली के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेनों का संचालन किया गया। एक साल के अंदर कई नई नियमित ट्रेनों का संचालन भी शुरू किया गया है। ट्रेनों की संख्या बढ़ने के कारण कारखाना में मरम्मत के लिए आने वाले कोचाें की संख्या भी बढ़ी है। कोच में भीड़ के दबाव के कारण कुछ कमियां आ जाती हैं। - संजीव शर्मा, सीनियर डीसीएम इज्जतनगर मंडल