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...मगर गेहूं तस्कर तो लाखों कमा रहे हैं

Sat, 02 May 2015 02:21 AM IST
बरेली
बरेली Updated Sat, 02 May 2015 02:21 AM IST
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कुदरत के मारे किसान भले ही मंडल भर के सरकारी खरीद केंद्रों पर और ज्यादा दुर्दशा के शिकार हो रहे हैं लेकिन तस्कर रोजाना लाखों क्विंटल गेहूं इधर-उधर कर लाखों की टैक्स चोरी कर रहे हैं। चूंकि इन दलालों की मंडी परिषद में भी साठगांठ है इसलिए खुलकर यह खेल चल रहा है। वाणिज्य कर विभाग ने हाल ही छापों के दौरान यह खुलासा होने के बाद अपने सचल दलों की संख्या बढ़ा दी है।
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उच्चस्तरीय प्रशासनिक दबाव के बावजूद सरकारी क्रय केंद्रों  पर न किसानों का गेहूं खरीदा जा रहा है न लक्ष्य पूरा होने के आसार दिख रहे हैं। क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई जा रही है। किसानों की मजबूरी का गेहूं तस्कर भरपूर फायदा उठा रहे हैं। मोटे अनुमान के मुताबिक बरेली मंडल से रोजाना एक लाख क्विंटल से ज्यादा गेहूं दिल्ली बाजार के अलावा निजी कंपनियों और फ्लोर मिलों तक पहुंच रहा है। इस तरह रोज करीब एक करोड़ रुपये के वाणिज्य कर और मंडी शुल्क की चोरी हो रही है। नियोजित तरीके हो रही इस टैक्स चोरी में मंडी परिषद की भूमिका इसलिए भी ज्यादा है  क्योंकि  मंडी शुल्क वसूली होने पर वाणिज्य कर स्वत: देय होता है। बताया जा रहा है कि अप्रैल में ही 30 लाख क्विंटल से ज्यादा गेहूं की तस्करी हो चुकी है।
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रात में चलता है धंधा
गेहूं तस्करों की सक्रियता रात को रहती है। गेहूं से भरी गाड़ियों के आगे तस्कर खुद चलते हैं ताकि अगर कहीं वाणिज्य कर टीम चेकिंग कर रही हो तो तुरंत पीछे गाड़ियों में बैठे अपने लोगों को फोन कर सतर्क कर दिया जाए। हालांकि वाणिज्य कर के सचल दल ने इसके बावजूद अप्रैल में दिल्ली मार्ग पर तस्करी के पांच मामले पकड़े हैं। पकड़ा गया गेहूं शाहजहांपुर, बदायूं, पीलीभीत जिलों से ले जा रहा था। संयुक्त वाणिज्य कर आयुक्त विनोद सिंह के नेतृत्व में पड़े छापों में गेहूं तस्करों से करीब 17 लाख रुपये वसूले गए। पिछले सप्ताह बदायूं से ग्लोब फ्लोर मिल जा रही एक गाड़ी पकड़ी गई। इस तस्कर पर पौने चार लाख रुपये का टैक्स निर्धारित किया गया है। हालांकि इस तस्कर ने माल छुड़ाने के लिए एक सांसद तक से सिफारिश कराई। गेहूं नहीं छूटा तो डीएम से शिकायत की। जांच में पता चला कि अवैध गेहूं कारोबारी ने अपने बचाव में बरेली की एक ट्रांसपोर्ट एजेंसी से बिल्टी बनवाकर किसान होने का दावा किया। वाणिज्य कर अफसरों ने बताया कि  गेहूं किसान का नहीं है बल्कि आढ़ती का है।
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जांच टीमें बढ़ी
संयुक्त वाणिज्य कर आयुक्त विनोद सिंह ने गेहूं तस्करी रोकने के लिए रात में गश्त करने के लिए टीमें बढ़ा दी हैं। सिंह ने बताया कि भारी तादाद गेहूं इधर से उधर ले जाया जा रहा है। इससे लाखों रुपये के टैक्स की क्षति हो रही है। कई फ्लोर मिलें मंडी परिषद की साठगांठ से सिक्स आर में हेराफेरी कर रही हैं। इसे देखते हुए विभाग ने सक्रियता बढ़ा दी है।

इन्फो
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मंडल में गेहूं का खेल
अब तक सरकारी खरीद        पौने नौ लाख क्विंटल
रोजाना गेहूं तस्करी                एक लाख क्विंटल
अप्रैल में पकड़े गए मामले        पांच
टैक्स वसूली                        17 लाख रुपये
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