अपराजिता: पूजा ने बिना संसाधन शुरू किया कारोबार, अन्य महिलाओं को भी बनाया आत्मनिर्भर
डिस्पोजेबल क्रॉकरी का कारोबार करने वाली पूजा का कहना है कि स्टार्टअप बिल्कुल उसी तरह है जैसे आप किसी बच्चे की परवरिश करते हैं। किसी भी काम में सफलता आपकी मेहनत पर निर्भर करती है।
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‘किसी भी काम की सफलता मेहनत पर निर्भर होती है, उसका पुरुष, महिला या उम्र से कोई वास्ता नहीं होता।’ यह मानना है बरेली के फतेहगंज पूर्वी के ग्राम बिलपुर की पूजा वर्मा का। पूजा डिस्पोजेबल क्रॉकरी की कारोबार करती हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने जब काम शुरू किया तो संसाधन नहीं थे। समूह से सहायता लेकर काम शुरू किया। दिन रात कठिन मेहनत और लगातार प्रयासों से उन्हें सफलता मिली। अन्य महिलाओं को भी साथ में जोड़ा। उनका मानना है कि स्टार्टअप बिल्कुल उसी तरह है जैसे आप किसी बच्चे की परवरिश करते हैं।
पिता की नसीहत से बढ़ा हौसला
पूजा के अनुसार उनके माता-पिता ने अच्छी शिक्षा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। पिता कहा करते थे कि हमारे यहां बेटियां काम नहीं करतीं, लेकिन तुम्हें इसलिए पढ़ा-लिखा रहे हैं कि भविष्य में जरूरत पड़े तो पीछे न रहो। शादी के बाद जिस परिवार में जा रही हो उसे और हमें तुम पर नाज हो। पूजा का कहना है कि यह शब्द उन्हें हमेशा याद रहते हैं। उनके स्टार्टअप की नींव भी यहीं से पड़ी। ससुराल में एक समय ऐसा आया जब स्थितियां बिगड़ने लगीं। उस वक्त पिता के कहे यही शब्द उनकी ढाल बने।
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इस तरह शुरू किया काम
गांव के बीआरसी पर उस वक्त महिलाओं को स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया जा रहा था। पूजा ने उससे जुड़कर कुछ नया सीखने का निर्णय किया। फिर प्रशिक्षण लेकर अपना काम करने का फैसला किया। शुरुआत में समूह के जरिए मिली सहायता से काम शुरू हो सकता था, लेकिन तैयार माल को बाजार में बेचना चुनौती थी। इसलिए काम शुरू करने से पहले इसकी भूमिका बनाई। पति ने मदद की। लोगों को हमारे तैयार किए सामान को खरीदने के लिए तैयार किया। लोग राजी हुए तो काम शुरू किया और सफलता मिली।
अन्य महिलाओं को भी बनाया आत्मनिर्भर
पूजा के अनुसार उन्होंने काम शुरू तो अकेले किया लेकिन अकेले आगे ले जाना संभव नहीं था। इसमें पति ने तो मदद की ही, आसपास की महिलाओं को भी साथ जोड़ना शुरू किया। ईश्वर की कृपा से आज इसी काम की बदौलत मैं और मेरे साथ जुड़ीं महिलाएं आत्मनिर्भर हैं।