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बरेली: हिंदू-मुस्लिम के बीच नफरत फैलाने वाली सियासत बर्दाश्त नहीं, उलेमा बोले-लव जिहाद, धर्मांतरण और आतंकवाद पर बंद हो उत्पीड़न
Sun, 03 Oct 2021 08:43 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 03 Oct 2021 08:43 AM IST
सार
उर्स-ए-रजवी के पहले दिन ऑल इंडिया तंजीम उलमा इस्लाम ने मुस्लिम एजेंडा जारी किया। इसमें कहा गया है कि लव जिहाद, धर्मांतरण और आतंकवाद पर उत्पीड़न बंद होना चाहिए। आर्थिक आधार पर आरक्षण मिलना चाहिए।
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बरेली में उर्स-ए-रजवी के पहले दिन ऑल इंडिया तंजीम उलमा इस्लाम की ओर से जारी मुस्लिम एजेंडे में राजनीतिक दलों को हिंदू-मुसलमानों के बीच नफरत फैलाने से बाज आने को कहा गया। उलमा ने कहा, मुसलमानों के साथ नाइंसाफी और जुल्म-ज्यादती भी ज्यादा दिन बर्दाश्त नहीं की जा सकती। सरकारें और राजनीतिक दल इन मुद्दों पर गंभीरता से गौर करें और मुसलमानों के प्रति अपने आचरण में बदलाव लाएं।
एजेंडा जारी करने से पहले देश भर के प्रमुख उलमा और आलिमों ने बरेलवी मरकज दरगाह आला हजरत स्थित इस्लामिक रिसर्च सेंटर पर हुई तंजीम उलमा-ए-इस्लाम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शिरकत कर मुसलमानों के मुद्दों पर मंथन किया। इसके बाद तंजीम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 17 सूत्री मुस्लिम एजेंडा जारी किया।
एजेंडे में केंद्र और राज्यों की सरकारों के साथ राजनीतिक दलों से देश की एकता और अखंडता के लिए काम करने, बेकसूर उलमा और मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने, लव जिहाद, धर्मांतरण, टेरर फंडिंग और आतंकवाद के नाम पर भयभीत करना बंद कर आर्थिक आधार पर मुसलमानों को आरक्षण देने जैसी मांगें की गई हैं।
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एजेंडे में कहा गया कि राजनीतिक दल वोट के लिए मुसलमानों का इस्तेमाल करती है और सरकार बनने के बाद भूल जाते हैं। मुसलमान किसी भी राजनीतिक दल का गुलाम नहीं है, इसलिए यह रवैया छोड़ा जाए। एजेंडे में एलान किया गया है कि जो दल मुसलमानों के लिए काम करेगा और उनके अधिकारों पर ध्यान देगा, वे उसी के साथ खड़े होंगे।
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एजेंडा जारी करने से पहले देश भर के प्रमुख उलमा और आलिमों ने बरेलवी मरकज दरगाह आला हजरत स्थित इस्लामिक रिसर्च सेंटर पर हुई तंजीम उलमा-ए-इस्लाम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शिरकत कर मुसलमानों के मुद्दों पर मंथन किया। इसके बाद तंजीम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 17 सूत्री मुस्लिम एजेंडा जारी किया।
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एजेंडे में केंद्र और राज्यों की सरकारों के साथ राजनीतिक दलों से देश की एकता और अखंडता के लिए काम करने, बेकसूर उलमा और मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने, लव जिहाद, धर्मांतरण, टेरर फंडिंग और आतंकवाद के नाम पर भयभीत करना बंद कर आर्थिक आधार पर मुसलमानों को आरक्षण देने जैसी मांगें की गई हैं।
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एजेंडे में कहा गया कि राजनीतिक दल वोट के लिए मुसलमानों का इस्तेमाल करती है और सरकार बनने के बाद भूल जाते हैं। मुसलमान किसी भी राजनीतिक दल का गुलाम नहीं है, इसलिए यह रवैया छोड़ा जाए। एजेंडे में एलान किया गया है कि जो दल मुसलमानों के लिए काम करेगा और उनके अधिकारों पर ध्यान देगा, वे उसी के साथ खड़े होंगे।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में देश के कई प्रमुख उलमा और आलिम ने वर्चुअल शिरकत भी की। इनमें ग्रांड मुफ्ती ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि केरल के मुफ्ती सादिक सकाफी, पश्चिम बंगाल के मौलाना मजहर इमाम, कर्नाटक के मौलाना अब्दुल सलाम, आंध्र प्रदेश के मौलाना रिजवान, राजस्थान के मुफ्ती शाकिरुल कादरी, उत्तराखंड के मौलाना जाहिद रजा रजवी, दिल्ली के कारी सगीर अहमद रजवी आदि शामिल थे।
बेटियों का हक नजरंदाज न करें मुसलमान
मुस्लिम एजेंडे में मुसलमानों को शिक्षा, व्यापार और परिवार पर ध्यान देने के साथ समाज में फैली बुराइयों की रोकथाम करने की हिदायत देते हुए आगाह किया गया है कि ऐसा न किया तो भविष्य में नुकसान उठाना पड़ेगा। मालदार मुसलमानों से गरीबों-कमजोरों के बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी लेने, मकतबों में अरबी उर्दू के साथ हिंदी, अंग्रेजी और कंप्यूटर की शिक्षा देने, जमीन-जायजाद में बेटियों के हक को नजरंदाज न करने को भी कहा गया है। जकात की सामूहिक व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा गया है कि इससे जरूरतमंदों की मदद हो सकेगी।
बेटियों का हक नजरंदाज न करें मुसलमान
मुस्लिम एजेंडे में मुसलमानों को शिक्षा, व्यापार और परिवार पर ध्यान देने के साथ समाज में फैली बुराइयों की रोकथाम करने की हिदायत देते हुए आगाह किया गया है कि ऐसा न किया तो भविष्य में नुकसान उठाना पड़ेगा। मालदार मुसलमानों से गरीबों-कमजोरों के बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी लेने, मकतबों में अरबी उर्दू के साथ हिंदी, अंग्रेजी और कंप्यूटर की शिक्षा देने, जमीन-जायजाद में बेटियों के हक को नजरंदाज न करने को भी कहा गया है। जकात की सामूहिक व्यवस्था पर जोर देते हुए कहा गया है कि इससे जरूरतमंदों की मदद हो सकेगी।