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यूपी: उर्स-ए-रजवी के पहले दिन ऑल इंडिया तंजीम उलमा इस्लाम ने जारी किया मुस्लिम एजेंडा, लव जिहाद, धर्मांतरण और आतंकवाद पर बंद हो उत्पीड़न
Sun, 03 Oct 2021 12:57 AM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 03 Oct 2021 12:57 AM IST
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उर्स स्थल इस्लामिया कॉलेज के मैदान में लगी लोगों की भीड़।
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बरेली। उर्स-ए-रजवी के पहले दिन ऑल इंडिया तंजीम उलमा इस्लाम की ओर से जारी मुस्लिम एजेंडे में राजनीतिक दलों को हिंदू-मुसलमानों के बीच नफरत फैलाने से बाज आने को कहा गया। उलमा ने कहा, मुसलमानों के साथ नाइंसाफी और जुल्म-ज्यादती भी ज्यादा दिन बर्दाश्त नहीं की जा सकती। सरकारें और राजनीतिक दल इन मुद्दों पर गंभीरता से गौर करें और मुसलमानों के प्रति अपने आचरण में बदलाव लाएं।
एजेंडा जारी करने से पहले देश भर के प्रमुख उलमा और आलिमों ने बरेलवी मरकज दरगाह आला हजरत स्थित इस्लामिक रिसर्च सेंटर पर हुई तंजीम उलमा-ए-इस्लाम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शिरकत कर मुसलमानों के मुद्दों पर मंथन किया। इसके बाद तंजीम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 17 सूत्री मुस्लिम एजेंडा जारी किया। एजेंडे में केंद्र और राज्यों की सरकारों के साथ राजनीतिक दलों से देश की एकता और अखंडता के लिए काम करने, बेकसूर उलमा और मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने, लव जिहाद, धर्मांतरण, टेरर फंडिंग और आतंकवाद के नाम पर भयभीत करना बंद कर आर्थिक आधार पर मुसलमानों को आरक्षण देने जैसी मांगें की गई है।
एजेंडे में कहा गया कि राजनीतिक दल वोट के लिए मुसलमानों का इस्तेमाल करती है और सरकार बनने के बाद भूल जाते हैं। मुसलमान किसी भी राजनीतिक दल का गुलाम नहीं है इसलिए यह रवैया छोड़ा जाए। ऐजेंडे में एलान किया गया है कि जो दल मुसलमानों के लिए काम करेगा और उनके अधिकारों पर ध्यान देगा, वे उसी के साथ खड़े होंगे।
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राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में देश के कई प्रमुख उलमा और आलिम ने वर्चुअल शिरकत भी की। इनमें ग्रांड मुफ्ती ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि केरल के मुफ्ती सादिक सकाफी, पश्चिम बंगाल के मौलाना मजहर इमाम, कर्नाटक के मौलाना अब्दुल सलाम, आंध्र प्रदेश के मौलाना रिजवान, राजस्थान के मुफ्ती शाकिरुल कादरी, उत्तराखंड के मौलाना जाहिद रजा रजवी, दिल्ली के कारी सगीर अहमद रजवी आदि शामिल थे।
एजेंडा जारी करने से पहले देश भर के प्रमुख उलमा और आलिमों ने बरेलवी मरकज दरगाह आला हजरत स्थित इस्लामिक रिसर्च सेंटर पर हुई तंजीम उलमा-ए-इस्लाम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शिरकत कर मुसलमानों के मुद्दों पर मंथन किया। इसके बाद तंजीम के महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने 17 सूत्री मुस्लिम एजेंडा जारी किया। एजेंडे में केंद्र और राज्यों की सरकारों के साथ राजनीतिक दलों से देश की एकता और अखंडता के लिए काम करने, बेकसूर उलमा और मुस्लिम नौजवानों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने, लव जिहाद, धर्मांतरण, टेरर फंडिंग और आतंकवाद के नाम पर भयभीत करना बंद कर आर्थिक आधार पर मुसलमानों को आरक्षण देने जैसी मांगें की गई है।
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एजेंडे में कहा गया कि राजनीतिक दल वोट के लिए मुसलमानों का इस्तेमाल करती है और सरकार बनने के बाद भूल जाते हैं। मुसलमान किसी भी राजनीतिक दल का गुलाम नहीं है इसलिए यह रवैया छोड़ा जाए। ऐजेंडे में एलान किया गया है कि जो दल मुसलमानों के लिए काम करेगा और उनके अधिकारों पर ध्यान देगा, वे उसी के साथ खड़े होंगे।
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राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में देश के कई प्रमुख उलमा और आलिम ने वर्चुअल शिरकत भी की। इनमें ग्रांड मुफ्ती ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि केरल के मुफ्ती सादिक सकाफी, पश्चिम बंगाल के मौलाना मजहर इमाम, कर्नाटक के मौलाना अब्दुल सलाम, आंध्र प्रदेश के मौलाना रिजवान, राजस्थान के मुफ्ती शाकिरुल कादरी, उत्तराखंड के मौलाना जाहिद रजा रजवी, दिल्ली के कारी सगीर अहमद रजवी आदि शामिल थे।