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पर्सनल लॉ बोर्ड अपने हित के लिए कायम रखना चाहता है विवाद

Thu, 21 Nov 2019 03:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 21 Nov 2019 03:09 AM IST
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बरेली। अदालत का फैसला स्वीकार करने का एलान कर चुका मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अब अपने राजनीतिक फायदे के लिए विवाद कायम रखने की कोशिश कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू दाखिल करना मुसलमानों के हितों के खिलाफ है। यह बात बुधवार को पत्रकार वार्ता में इत्तेहादे मिल्लत कौंसिल यानी आईएमसी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना तौकीर रजा ने कही।
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उन्होंने कहा कि फैसले ने मुसलमानों को मंदिर तोड़ने के आरोप से बरी कर दिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोनों पक्षों को बातचीत कर हल निकालने का मौका दिया था लेकिन कुछ ने कोर्ट के फैसले को ही सर्वमान्य बताया। इसे निभाते हुए मुसलमानों ने कोर्ट के फैसले को स्वीकार भी किया लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अपनी बात से मुकर रहा है। रिव्यू डालना विवाद को कायम रखने का प्रयास है। तौकीर ने कोर्ट की ओर से दी गई पांच एकड़ जमीन पर मस्जिद न बनाने की बात कहते हुए कहा कि अगर मस्जिद बनानी है तो कुछ रकम देकर बकायदा रजिस्ट्री कराएं तभी मस्जिद कायत की जा सकती है क्योंकि दान में मिली जमीन पर मस्जिद तामीर नहीं की जा सकती।
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उन्होंने कहा कि रिव्यू दाखिल करने का फैसला विश्व हिंदू परिषद और निर्मोही अखाड़े के दवाब में लिया गया है क्योंकि इन दोनों को कोर्ट ने कुछ भी नहीं दिया इसलिए विवाद को कायम रखने के लिए बोर्ड पर दबाव बना रहे हैं। कहा कि असदुद्दीन ओवैसी सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए पर्सनल लॉ बोर्ड का इस्तेमाल कर रहे हैं। बंगाल में ममता के खिलाफ ओवैसी अगर खड़े होंगे तो उनकी मुखालफत की जाएगी। इस दौरान डॉ. नफीस खान, जुनैद रजा खान, मुनीर इदरीसी, नदीम खान, अफजाल बेग, शाहनवाज मौजूद रहे।
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