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Bareilly News: सेहत से खिलवाड़... चांदी नहीं मिठाई पर चमक रही एल्युमिनियम की परत
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बरेली। मिठाइयों पर सफेद चमक रही पर्त को चांदी समझकर लोग एल्युमिनियम खा रहे हैं। जो सेहत के लिए हानिकारक है। लगातार सेवन से कैंसर की आशंका है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के मुताबिक चांदी वर्क वाली मिठाई की जांच में सभी शुद्धता के मानकों पर फेल रहीं।
बरेली सराफा एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश अग्रवाल के मुताबिक, जिले में चांदी वर्क बनाने वाली सिर्फ एक फैक्टरी है। जो शुद्ध चांदी का प्रयोग करते हैं पर महंगी होने से असली वर्क की मांग सीमित है। बाजार में प्रति किलो चांदी का भाव 98,500 रुपये है।
वहीं, चांदी वर्क के निर्माण के साथ सभी कर जोड़कर प्रति किलो चांदी वर्क की औसत कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंचती है। आशंका जताई कि ज्यादातर मिठाई कारोबारी एल्युमिनियम वर्क की पर्त मिठाई पर चढ़ा रहे हैं।
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शुद्ध चांदी वर्क का प्रयोग होने पर मिठाइयों की कीमत भी बढ़ जाती है। पहले ही खाद्य पदार्थाें पर महंगाई है। मिठाइयों की कीमत ज्यादा बढ़ाने से उनकी बिक्री पर असर पड़ने से बचने के लिए कई कारोबारी ये खेल कर रहे हैं।
40 फीसदी बढ़ गई है एक पैकेट चांदी वर्क की कीमत
चांदी वर्क कारोबारी वैभव खंडेलवाल के मुताबिक उन्होंने दो वर्ष पूर्व चांदी वर्क का काम शुरू किया था। तब पांच सौ रुपये प्रति पैकेट चांदी वर्क के 150 पीस बेच रहे थे। इसकी कीमत अब आठ सौ रुपये है। बताया कि बरेली मंडल समेत उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार, कोलकाता तक वह आपूर्ति कर रहे हैं। दावा है कि बगैर चांदी वर्क बनाने में चमड़े की बजाय बटर पेपर का प्रयोग करते हैं। ताकि शुद्धता बरकरार रहे।
ध्यान दें... एल्युमिनियम सेवन से बिगड़ती है सेहत
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राहुल वाजपेयी के मुताबिक चांदी वर्क के नाम पर एल्युमिनियम वर्क की मिठाई का अगर लगातार सेवन किया जाए तो गंभीर रोग होने की आशंका रहती है। इसमें लिवर, किडनी, नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है। खुजली, डैंड्रफ बढ़ते हैं। मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द होता है। पाचन क्रिया प्रभावित होती है। फेफड़ों में पहुंचने पर टीबी की वजह भी बन सकती है।
असली चांदी वर्क पहचान का तरीका
- चांदी वर्क उंगली पर रगड़ने पर गायब हो जाता है। कोई निशान नहीं बनता।
- त्वचा के संपर्क में आने पर आसानी से टूटता है। गर्म करने पर गोल होता है।
- हाइड्रोक्लोरिक एसिड में डालने पर सफेद निशान बनता है। चुंबक में नहीं चिपकता।
ब्यूरो
--
मिठाइयों पर शुद्ध चांदी वर्क का प्रयोग नहीं हो रहा। जिस मिठाई पर वर्क लगता है, उनमें ज्यादातर नमूने अधोमानक मिलते हैं। फिर कार्रवाई की जाती है। लोगों से अपील है कि वे परखकर ही खाद्य सामग्री खरीदें। - अपूर्व श्रीवास्तव, संयुक्त आयुक्त द्वितीय, एफएसडीए
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बरेली सराफा एसोसिएशन के महामंत्री दिनेश अग्रवाल के मुताबिक, जिले में चांदी वर्क बनाने वाली सिर्फ एक फैक्टरी है। जो शुद्ध चांदी का प्रयोग करते हैं पर महंगी होने से असली वर्क की मांग सीमित है। बाजार में प्रति किलो चांदी का भाव 98,500 रुपये है।
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वहीं, चांदी वर्क के निर्माण के साथ सभी कर जोड़कर प्रति किलो चांदी वर्क की औसत कीमत डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंचती है। आशंका जताई कि ज्यादातर मिठाई कारोबारी एल्युमिनियम वर्क की पर्त मिठाई पर चढ़ा रहे हैं।
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शुद्ध चांदी वर्क का प्रयोग होने पर मिठाइयों की कीमत भी बढ़ जाती है। पहले ही खाद्य पदार्थाें पर महंगाई है। मिठाइयों की कीमत ज्यादा बढ़ाने से उनकी बिक्री पर असर पड़ने से बचने के लिए कई कारोबारी ये खेल कर रहे हैं।
40 फीसदी बढ़ गई है एक पैकेट चांदी वर्क की कीमत
चांदी वर्क कारोबारी वैभव खंडेलवाल के मुताबिक उन्होंने दो वर्ष पूर्व चांदी वर्क का काम शुरू किया था। तब पांच सौ रुपये प्रति पैकेट चांदी वर्क के 150 पीस बेच रहे थे। इसकी कीमत अब आठ सौ रुपये है। बताया कि बरेली मंडल समेत उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार, कोलकाता तक वह आपूर्ति कर रहे हैं। दावा है कि बगैर चांदी वर्क बनाने में चमड़े की बजाय बटर पेपर का प्रयोग करते हैं। ताकि शुद्धता बरकरार रहे।
ध्यान दें... एल्युमिनियम सेवन से बिगड़ती है सेहत
जिला अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. राहुल वाजपेयी के मुताबिक चांदी वर्क के नाम पर एल्युमिनियम वर्क की मिठाई का अगर लगातार सेवन किया जाए तो गंभीर रोग होने की आशंका रहती है। इसमें लिवर, किडनी, नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है। खुजली, डैंड्रफ बढ़ते हैं। मांसपेशियों और हड्डियों में दर्द होता है। पाचन क्रिया प्रभावित होती है। फेफड़ों में पहुंचने पर टीबी की वजह भी बन सकती है।
असली चांदी वर्क पहचान का तरीका
- चांदी वर्क उंगली पर रगड़ने पर गायब हो जाता है। कोई निशान नहीं बनता।
- त्वचा के संपर्क में आने पर आसानी से टूटता है। गर्म करने पर गोल होता है।
- हाइड्रोक्लोरिक एसिड में डालने पर सफेद निशान बनता है। चुंबक में नहीं चिपकता।
ब्यूरो
मिठाइयों पर शुद्ध चांदी वर्क का प्रयोग नहीं हो रहा। जिस मिठाई पर वर्क लगता है, उनमें ज्यादातर नमूने अधोमानक मिलते हैं। फिर कार्रवाई की जाती है। लोगों से अपील है कि वे परखकर ही खाद्य सामग्री खरीदें। - अपूर्व श्रीवास्तव, संयुक्त आयुक्त द्वितीय, एफएसडीए