Bareilly News: अधूरा इलाज... दिल नासाज, जिला अस्पताल के स्टेमी विंग में उपचार पर मरीज नहीं कर पा रहे भरोसा
बरेली के जिला अस्पताल के स्टेमी विंग में हृदयाघात की चपेट में आए मरीजों की शुरुआती जांच और इंजेक्शन लगाने की व्यवस्था है, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। लिहाजा, मरीज के बेहतर इलाज को लेकर परिजन संशय में रहते हैं।
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बरेली में हृदय रोग विशेषज्ञ की कमी दूर करने के लिए जिला अस्पताल में शुरू हुई स्टेमी विंग में उपलब्ध इलाज पर मरीज और उनके परिजन भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। सीने में दर्द, चुभन होने पर जांच के लिए मरीज पहुंच तो रहे हैं, पर हृदयाघात की पुष्टि होने पर इलाज के लिए तैयार नहीं हो रहे। दरअसल, स्टेमी विंग में हृदयाघात की चपेट में आए मरीजों की शुरुआती जांच और इंजेक्शन लगाने की व्यवस्था है, लेकिन कार्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। लिहाजा, मरीज के बेहतर इलाज को लेकर परिजन संशय में रहते हैं। अमर उजाला टीम की पड़ताल में यह हकीकत सामने आई।
स्टेमी विंग शुरू हुए माहभर हो चुका है। इस दौरान हृदयाघात की आशंका पर 12 मरीज इलाज कराने पहुंचे। इलेक्ट्रो कार्डियोग्राम (ईसीजी) टेस्ट में दस मरीजों के हृदय की स्थिति सामान्य मिली। दो मरीजों में एक्यूट मायोकार्डियल इंफार्शन यानी हार्ट अटैक की पुष्टि हुई। उन्हें स्टेमी विंग नेटवर्क के तहत शुरुआती इंजेक्शन और इलाज शुरू कराने की जानकारी दी गई तो परिजन राजी नहीं हुए। वे मरीज को डिस्चार्ज कराने की जिद पर अड़ गए। डॉक्टरों के समझाने पर भी नहीं माने तो उनसे लिखित अनुरोध पत्र लेकर मरीजों को डिस्चार्ज करना पड़ा।
टेली-ईसीजी तकनीक से शुरुआती इलाज, फिर होंगे रेफर स्टेमी केयर नेटवर्क के तहत बरेली जिला अस्पताल के चिकित्सक और अलीगढ़ मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजिस्ट व क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े हैं। हार्ट अटैक के मरीजों को टेली-ईसीजी तकनीक से उपचार दिया जाता है। सीने में दर्द व संदिग्ध लक्षण वाले मरीज की ईसीजी जांच रिपोर्ट ग्रुप पर भेजी जाएगी। हृदयाघात की पुष्टि पर मरीज को टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन लगाएंगे। हालत सामान्य होने पर हायर सेंटर भेजनी की व्यवस्था है।
माहभर में हृदयाघात की आशंका पर 12 मरीज आए। दो में एक्यूट एमआई की पुष्टि हुई। उन्हें स्टेमी विंग में टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन लगवाने के लिए कहा गया, पर परिजन तैयार नहीं हुए। अगर किसी में हृदयाघात के लक्षण हैं तो जांच, इलाज के लिए आ सकते हैं। इलाज निशुल्क है।-डॉ. अजय मोहन, प्रभारी एडी एसआईसी
सीने का हर दर्द हृदयाघात नहीं, पर जांच जरूरी
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. आशीष अग्रवाल के मुताबिक सीने में दर्द की कई वजह होती है। हर दर्द हृदयाघात नहीं होता। एसिडिटी, गैस्ट्रिक रिफ्लेक्स, पित्ताशय की पथरी, फेफड़ों की बीमारी, पुरानी सांस की समस्या, मांसपेशियों व पसलियों में खिंचाव से भी सीने में दर्द हो सकता है। जांच के बगैर दर्द की वजह बता पाना मुमकिन नहीं।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत लें विशेषज्ञ की सलाह
डॉ. आशीष ने बताया कि हृदयाघात होने पर सीने में दर्द के साथ दबाव, जकड़न, भारीपन का अहसास होता है। दर्द छाती के साथ कंधे, गर्दन, जबड़े, पीठ या पेट तक फैल सकता है। सांस लेने में तकलीफ होती है और पसीना आने लगता है। पेट खराब होना, उल्टी जैसा महसूस होता है। चक्कर आते हैं। सीधे खड़े रहने में दिक्कत होती है। अत्यधिक थकान और कमजोरी का अहसास होता है। ऐसे लक्षण उभरने पर तुरंत विशेषज्ञ को दिखाना जरूरी है।
बेहद उपयोगी है इंजेक्शन
हृदयाघात की चपेट में आए मरीज का जितनी जल्दी इलाज शुरू हो जाए, वह बेहतर है। बाजार में करीब 25 हजार रुपये कीमत का टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन स्टेमी विंग में निशुल्क लगाया जाएगा। यह हृदय की धमनियों में खून के थक्के को गलाता है। मरीज की स्थिति स्थिर होने पर आगे इलाज शुरू किया जाता है। यह इंजेक्शन बेहद उपयोगी है।