{"_id":"60ad535b8ebc3e865a2386da","slug":"parents-accounts-targeted-in-the-name-of-free-coaching-bareilly-news-bly4476028140","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुफ्त कोचिंग के नाम पर अभिभावकों के खाते निशाने पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुफ्त कोचिंग के नाम पर अभिभावकों के खाते निशाने पर
विज्ञापन
प्रोफेसर एसएस बेदी।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साइबर ठगी का नया ट्रेंड, लिंक भेजकर बच्चों के जरिये ठगी की कोशिश
विज्ञापन
बरेली। ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे बच्चों के हाथ में मोबाइल देने के साथ ही उन पर कड़ी नजर रखने की जरूरत है। मुफ्त ऑनलाइन क्लास का लालच देकर बच्चों के जरिये साइबर ठग अब उनके माता-पिता के बैंक खातों में सेंधमारी की कोशिश कर रहे हैं।
फरीदपुर में रहने वाले राजकुमार सिंह ने बताया कि उनका बेटा मिशनरी स्कूल में कक्षा पांच का छात्र है। रविवार को उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई, जिसने खुद को उनके बेटे का शिक्षक बताते हुए उससे बात कराने को कहा। उन्होंने मोबाइल बच्चे को दे दिया लेकिन खुद स्पीकर ऑन करके पास ही खड़े हो गए। कॉल करने वाले ने ऑनलाइन पढ़ाई के एक नामचीन एप से खुद को बोलना बताया और कहा कि क्या आप मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग करना चाहते हो। बच्चे ने इस पर हामी भरी तो दूसरी ओर से व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजने की बात कही गई। लिंक का नाम सुनते ही राजकुमार सिंह ने मोबाइल अपने हाथ में ले लिया और वह कॉल करने वाले से सवाल जवाब करने लगे। उन्होंने उसका नाम पूछा और स्कूल की ऑनलाइन क्लास पहले से ही चलने की बात कही। इस पर साइबर ठग उन्हें गुमराह कर व्हाट्सएप पर भेजे लिंक से कनेक्ट करने का दबाव बनाने लगा लेकिन उन्होंने फोन काटकर नंबर ब्लॉक कर दिया।
नौ गुना बढ़ा साइबर क्राइम
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कंप्यूटर साइंस के विभागाध्यक्ष प्रो. एसएस बेदी बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले भारत में साइबर क्राइम नौ गुना बढ़ा है। उन्होंने कहा कि कोई भी चीज मुफ्त में नहीं मिलती है। यह जरूरी नहीं कि लिंक पर क्लिक करते ही आपके खाते से रुपये कट जाएं। कई बार साइबर ठग लिंक के जरिये आपके मोबाइल या कंप्यूटर में घुसपैठ बना लेते हैं और फिर मौके का इंतजार करते हैं। जैसे ही मोबाइल या कंप्यूटर से कोई ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होता है तो कार्ड की डिटेल उनके पास पहुंच जाती है और वे ठगी को अंजाम देते हैं। कई बार साइबर ठग इसी तरह आपके फोन या कंप्यूटर में मौजूद डेटा को हैक कर लेते हैं और फिर रुपये लेने के बाद ही रिलीज करते हैं। ऐसे में यह सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात है कि किसी भी मुफ्त चीज के झांसे में आकर किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
विज्ञापन
फरीदपुर में रहने वाले राजकुमार सिंह ने बताया कि उनका बेटा मिशनरी स्कूल में कक्षा पांच का छात्र है। रविवार को उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से कॉल आई, जिसने खुद को उनके बेटे का शिक्षक बताते हुए उससे बात कराने को कहा। उन्होंने मोबाइल बच्चे को दे दिया लेकिन खुद स्पीकर ऑन करके पास ही खड़े हो गए। कॉल करने वाले ने ऑनलाइन पढ़ाई के एक नामचीन एप से खुद को बोलना बताया और कहा कि क्या आप मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग करना चाहते हो। बच्चे ने इस पर हामी भरी तो दूसरी ओर से व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजने की बात कही गई। लिंक का नाम सुनते ही राजकुमार सिंह ने मोबाइल अपने हाथ में ले लिया और वह कॉल करने वाले से सवाल जवाब करने लगे। उन्होंने उसका नाम पूछा और स्कूल की ऑनलाइन क्लास पहले से ही चलने की बात कही। इस पर साइबर ठग उन्हें गुमराह कर व्हाट्सएप पर भेजे लिंक से कनेक्ट करने का दबाव बनाने लगा लेकिन उन्होंने फोन काटकर नंबर ब्लॉक कर दिया।
विज्ञापन
नौ गुना बढ़ा साइबर क्राइम
रुहेलखंड विश्वविद्यालय में कंप्यूटर साइंस के विभागाध्यक्ष प्रो. एसएस बेदी बताते हैं कि पिछले साल के मुकाबले भारत में साइबर क्राइम नौ गुना बढ़ा है। उन्होंने कहा कि कोई भी चीज मुफ्त में नहीं मिलती है। यह जरूरी नहीं कि लिंक पर क्लिक करते ही आपके खाते से रुपये कट जाएं। कई बार साइबर ठग लिंक के जरिये आपके मोबाइल या कंप्यूटर में घुसपैठ बना लेते हैं और फिर मौके का इंतजार करते हैं। जैसे ही मोबाइल या कंप्यूटर से कोई ऑनलाइन ट्रांजेक्शन होता है तो कार्ड की डिटेल उनके पास पहुंच जाती है और वे ठगी को अंजाम देते हैं। कई बार साइबर ठग इसी तरह आपके फोन या कंप्यूटर में मौजूद डेटा को हैक कर लेते हैं और फिर रुपये लेने के बाद ही रिलीज करते हैं। ऐसे में यह सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात है कि किसी भी मुफ्त चीज के झांसे में आकर किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
विज्ञापन