Bareilly: पाकिस्तानी संगठन दावत-ए-इस्लामी की बरेली में जड़ें तीन दशक पुरानी, सूफी इस्लामिक बोर्ड ने लगाए थे धर्मांतरण के आरोप
खुफिया छानबीन में दावत-ए-इस्लामी के बारे में कई और नए तथ्यों का खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक 1992 में बरेली में शुरुआत के बाद खासतौर पर नौजवानों को इस तंजीम से जोड़ा गया। चूंकि इस तंजीम का नेटवर्क पूरी दुनिया में फैला हुआ था, इस वजह से नौजवान तेजी से उसकी ओर आकर्षित हुए।
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पाकिस्तानी तंजीम दावत-ए-इस्लामी की बरेली में शुरुआत एक बड़े धर्मगुरु ने 1992 में की थी। हालांकि कुछ ही समय बाद इस संगठन का विरोध शुरू हो गया। सूफी इस्लामिक बोर्ड ने उस पर चंदे की रकम का देशविरोधी गतिविधियों में इस्तेमाल करने और धर्मांतरण कराने जैसे आरोप लगाए थे। हालांकि सरकारी मशीनरी के ध्यान न देने की वजह से इस सबके बावजूद इस संगठन ने अपनी जड़ें जमा लीं।
खुफिया छानबीन में दावत-ए-इस्लामी के बारे में कई और नए तथ्यों का खुलासा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक 1992 में बरेली में शुरुआत के बाद खासतौर पर नौजवानों को इस तंजीम से जोड़ा गया। चूंकि इस तंजीम का नेटवर्क पूरी दुनिया में फैला हुआ था, इस वजह से नौजवान तेजी से उसकी ओर आकर्षित हुए।
बरेली के साथ मंडल के दूसरे जिलों में भी तंजीम ने अपना नेटवर्क कायम किया। पीलीभीत में तत्कालीन शहर काजी ने दावत-ए-इस्लामी पर देशविरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए उस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। सूफी इस्लामिक बोर्ड की ओर से भी खुलकर उस पर धर्मांतरण कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए, फिर भी इस संगठन पर प्रतिबंध नहीं लग सका और उसने अपनी जड़ें और फैला लीं।
दावत-ए-इस्लामी का आका मौलाना इलियास दो बार आ चुका है भारत
तंजीम का संस्थापक पाकिस्तान का मौलाना इलियास कादरी है। वह पाकिस्तान से ही पूरी दुनिया में फैले अपने संगठन को चलाता है। भारत में दिल्ली और मुंबई में संगठन के मुख्यालय हैं। हिंदुस्तान के कई शहरों में संगठन के प्रचार-प्रसार के लिए दावत-ए-इस्लामी के प्रतिनिधिमंडल भी कई बार भारत आ चुके हैं। 1989 में कानपुर और 2000 में नारामऊ में पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल के साथ खुद मौलाना इलियास कादरी भी आया था। खुफिया सूत्रों के मुताबिक यह तंजीम अपनी पैठ जमाने के लिए पहले इज्तमा करती है जिसमें भारी संख्या में नौजवानों को इकट्ठा किया जाता है, फिर उन्हें इस्लाम के नाम पर दावत-ए-इस्लामी में शामिल होने की दावत दी जाती है।
मदनी चैनल पर प्रचार-प्रसार
दावत-ए-इस्लामी अपनी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने के लिए एक टीवी चैनल भी चलाता है जिसका नाम मदनी चैनल है। भारत में भी काफी समय तक यह चैनल चला जो उर्दू के साथ अंग्रेजी और बांग्ला भाषा में कार्यक्रम पेश करता था। इस चैनल का संचालन पाकिस्तान से किया जाता है।