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पशुपालन विभाग ने कहा-लोन निपट चुका है, अब डेयरी चले या बरातघर
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पीलीभीत। डीएम ने डेयरी की जगह बरातघर बनाने की शिकायत पर जिस मामले की जांच की और यह मामला तूल पकड़ गया, उसमें किसी तरह के दुरुपयोग की बात को पशुपालन विभाग ने खारिज कर दिया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि परिवार के किसी सदस्य के नाम पर डेयरी खोलने के लिए लिया गया लोन विधायक रामसरन वर्मा निपट चुके हैं। डेयरी का खाता भी बंद हो चुका है। इसलिए अब वहां दुरुपयोग या धन वसूली का कोई मतलब नहीं रह गया।
पशुपालन विभाग के एक अफसर ने नाम न प्रकाशित करने की गुजारिश पर बताया कि वह बीसलपुर में जिस जगह डेयरी के स्थान पर बरातघर बनाने का मामला सुर्खियों में है, वह असल में कोई मसला ही नहीं है क्योंकि विधायक ने अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम से बीसलपुर में डेयरी खोलने के लिए मिनी कामधेनु योजना में 35 लाख का लोन बैंक से लिया था। पशुपालन विभाग की डेयरी खोलने के लिए तीन योजनाएं चलती हैं। पहली कामधेनु डेयरी योजना, दूसरी मिनी कामधेनु डेयरी योजना और तीसरी माइक्रो कामधेनु डेयरी योजना। पशुपालन विभाग के सूत्रों के अनुसार विधायक का लोन मिनी कामधेनु डेयरी योजना में था। तीन साल उन्होंने डेयरी चलाई। उतनी सब्सिडी लाभार्थी को दी गई। उसके बाद खाता बंद हो गया। अब चाहे वहां डेयरी चले या कुछ और। बैंक या पशुपालन विभाग को कोई मतलब नहीं। अगर बैंक लोन चलता रहता और तब वहां डेयरी की जगह कोई दूसरा भवन बनता। तब तो धन के दुरुपयोग का मामला बन सकता था। लोन निपटने के बाद उस जगह पर कुछ भी बने। उसका अब पशुपालन विभाग या बैंक से कोई मतलब नहीं है।
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पशुपालन विभाग के एक अफसर ने नाम न प्रकाशित करने की गुजारिश पर बताया कि वह बीसलपुर में जिस जगह डेयरी के स्थान पर बरातघर बनाने का मामला सुर्खियों में है, वह असल में कोई मसला ही नहीं है क्योंकि विधायक ने अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम से बीसलपुर में डेयरी खोलने के लिए मिनी कामधेनु योजना में 35 लाख का लोन बैंक से लिया था। पशुपालन विभाग की डेयरी खोलने के लिए तीन योजनाएं चलती हैं। पहली कामधेनु डेयरी योजना, दूसरी मिनी कामधेनु डेयरी योजना और तीसरी माइक्रो कामधेनु डेयरी योजना। पशुपालन विभाग के सूत्रों के अनुसार विधायक का लोन मिनी कामधेनु डेयरी योजना में था। तीन साल उन्होंने डेयरी चलाई। उतनी सब्सिडी लाभार्थी को दी गई। उसके बाद खाता बंद हो गया। अब चाहे वहां डेयरी चले या कुछ और। बैंक या पशुपालन विभाग को कोई मतलब नहीं। अगर बैंक लोन चलता रहता और तब वहां डेयरी की जगह कोई दूसरा भवन बनता। तब तो धन के दुरुपयोग का मामला बन सकता था। लोन निपटने के बाद उस जगह पर कुछ भी बने। उसका अब पशुपालन विभाग या बैंक से कोई मतलब नहीं है।
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