{"_id":"5d8922428ebc3e012c652ca9","slug":"other-bareilly-news-bly3773650113","type":"story","status":"publish","title_hn":"रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की तलाश में जुटा खुफिया अमला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की तलाश में जुटा खुफिया अमला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बरेली। यूपी में भी एनआरसी लागू होने की सुगबुगाहट के बाद शासन से रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान को लेकर उच्च स्तर से मिले निर्देश पर खुफिया अमला अंदरखाने इस तरह के लोगों की तलाश कर रहा है। वैसे बरेली में अभी तक किसी रोहिंग्या के होने की पुष्टि नहीं हुई है।
असम में एनआरसी लागू होने के बाद देश भर में अलग-अलग स्थानों पर नाम व पहचान बदलकर रह रहे घुसपैठियों में हड़कंप मचा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हाल ही में अपने संबोधन में एनआरसी लागू करने का संकेत दे चुके हैं। जाहिर है कि एनआरसी लागू की गई तो इसके लिए अलग से विभाग या सिस्टम बनाया जाएगा जो केवल इसी काम और सत्यापन पर फोकस करेगा। इससे पहले ही पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने होमवर्क शुरू कर दिया है। डीजीपी कार्यालय से मिले निर्देश के बाद पुलिस व इससे जुड़े संबंधित विभागों के लोग शहर की घनी बस्तियों और त्रिशूल एयरबेस के आसपास बनी कॉलोनियों में जा रहे हैं। वहां संदिग्धों की पहचान की जा रही है। ऐसे लोगों से उनकी वोटर आईडी, राशन कार्ड या आधार कार्ड मांगे जा रहे हैं। हालांकि अधिकांश मामलों में बांग्लादेशी शरणार्थियों ने भी अब भारतीय पहचान वाले दस्तावेज जुगाड़ से बनवा रखे हैं। इसलिए एनआरसी के वक्त इनकी पहचान खोजने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए मुखबिरों के जरिये भी इन्हें खोजने की कवायद भी चल रही है। किसी तरह का हड़कंप न मचे, इसलिए सबकुछ बड़े गोपनीय तरीके से किया जा रहा है।
एनआरसी का मूल उद्देश्य नागरिकता को लेकर पहचान करना होता है। इसे लागू किया गया तो अलग से सेटअप बनाया जाएगा। फिलहाल एनआरसी की वजह से नहीं बल्कि आपराधिक गतिविधियों की वजह से संदिग्धों की छानबीन कर जानकारी जुटाई जा रही है। यह एक सतत प्रक्रिया है। - अभिनंदन सिंह, एसपी सिटी
विज्ञापन
विज्ञापन
असम में एनआरसी लागू होने के बाद देश भर में अलग-अलग स्थानों पर नाम व पहचान बदलकर रह रहे घुसपैठियों में हड़कंप मचा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हाल ही में अपने संबोधन में एनआरसी लागू करने का संकेत दे चुके हैं। जाहिर है कि एनआरसी लागू की गई तो इसके लिए अलग से विभाग या सिस्टम बनाया जाएगा जो केवल इसी काम और सत्यापन पर फोकस करेगा। इससे पहले ही पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने होमवर्क शुरू कर दिया है। डीजीपी कार्यालय से मिले निर्देश के बाद पुलिस व इससे जुड़े संबंधित विभागों के लोग शहर की घनी बस्तियों और त्रिशूल एयरबेस के आसपास बनी कॉलोनियों में जा रहे हैं। वहां संदिग्धों की पहचान की जा रही है। ऐसे लोगों से उनकी वोटर आईडी, राशन कार्ड या आधार कार्ड मांगे जा रहे हैं। हालांकि अधिकांश मामलों में बांग्लादेशी शरणार्थियों ने भी अब भारतीय पहचान वाले दस्तावेज जुगाड़ से बनवा रखे हैं। इसलिए एनआरसी के वक्त इनकी पहचान खोजने में दिक्कत आ सकती है। इसलिए मुखबिरों के जरिये भी इन्हें खोजने की कवायद भी चल रही है। किसी तरह का हड़कंप न मचे, इसलिए सबकुछ बड़े गोपनीय तरीके से किया जा रहा है।
विज्ञापन
एनआरसी का मूल उद्देश्य नागरिकता को लेकर पहचान करना होता है। इसे लागू किया गया तो अलग से सेटअप बनाया जाएगा। फिलहाल एनआरसी की वजह से नहीं बल्कि आपराधिक गतिविधियों की वजह से संदिग्धों की छानबीन कर जानकारी जुटाई जा रही है। यह एक सतत प्रक्रिया है। - अभिनंदन सिंह, एसपी सिटी
विज्ञापन