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स्मार्ट सिटी की परियोजनाओं में गड़बड़ियों की जांच का आदेश
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शासन ने दस बिंदुओं पर कमिश्नर से मांगी रिपोर्ट, मेयर ने मुख्यमंत्री से साल भर पहले की थी शिकायत
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टेंडरों में मनमानी, भ्रष्टाचार, मानकों के खिलाफ काम करने के लगाए थे आरोप
बरेली। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों पर शासन ने जांच का आदेश देते हुए कमिश्नर से दस बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। इसमें यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में 126 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल रहे पूर्व पीसीएस अफ सर को बरेली स्मार्ट सिटी में मिशन मैनेजर पद पर नियुक्ति देने का भी बिंदु शामिल है।
मेयर उमेश गौतम ने करीब साल भर पहले एक सितंबर 2020 को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की थी जिस पर शासन के उप सचिव अखिलानंद ब्रह्मचारी ने अब जांच का आदेश जारी किया है। मेयर ने इस शिकायत में स्मार्ट सिटी के टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और घोटाले के आरोप लगाते हुए कहा था कि कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए आए दिन टेंडर की नियम-शर्तों में बदलाव कर दिया जाता है। उन्होंने स्मार्ट सिटी के सबसे महत्वाकांक्षी इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और संजय कम्युनिटी हॉल प्रोजेक्ट पर खास संज्ञान लेने की बात कहते हुए सभी टेंडरों को रद्द कर विजिलेंस से जांच कराने का मुख्यमंत्री से आग्रह किया था।
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इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर प्रोजेक्ट के संबंध में उनका आरोप था कि इस टेंडर की इच्छुक जितनी भी कंपनियों ने प्रस्तुति दी, उन सभी के कैमरों की गुणवत्ता ठीक नहीं है। उन्होंने ओपन जिम, हाईमास्ट लाइट और वर्टिकल गार्डन प्रोजेक्ट के टेंडर में भी गड़बड़ी की शिकायत की थी।
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घोटाले के आरोपी अफसर की नियुक्ति का अमर उजाला ने किया था खुलासा
घोटालेबाज पूर्व पीसीएस सतीश कुमार की स्मार्ट सिटी में नियुक्ति का अमर उजाला ने खुलासा किया था। मेयर ने इसी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय कमेटी से जांच कराने की मांग की थी। मेयर ने अपनी शिकायत में कहा था कि यह सामने आना जरूरी है कि जिस सतीश कुमार की पुलिस एक साल से तलाश कर रही थी, उसे 22 सौ करोड़ से अधिक के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में रखने की अफसरों को क्या जरूरत पड़ी। यह भी पता लगना चाहिए कि प्रशासन में वे कौन से अधिकारी हैं, जिनकी विशेष कृपा से सतीश कुमार सर्किट में ठहरे थे।
कमिश्नर से इन बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट
- 1- 325 करोड़ से स्मार्ट सिटी बरेली द्वारा स्थापित ओपन जिम पार्क खराब होना और उसकी मरम्मत न कराया जाना।
- 2- 126.00 करोड़ के घोटाले के मुख्य आरोपी रिटायर पीसीएस सतीश कुमार की स्मार्ट सिटी बरेली में मिशन मैनेजर के पद पर मनमाने ढंग से नियुक्ति और उसे तमाम सुविधाओं का लाभ दिया जाना।
- 3- वर्टिकल गॉर्डन परियोजना के टेंडर में मानक के अनुरूप पौधों का चयन न करना।
- 4- हाईमास्ट लाइट परियोजना के टेंडर में अनियमितता।
- 5-आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट के टेंडर में अनियमितता।
- 6- संजय कम्युनिटी हॉल के टेंडर में मनमाने ढंग से शर्तें निर्धारित करना।
- 7- स्पोर्ट्स स्टेडियम के टेंडर में मनमाने ढंग से शर्तें निर्धारित करना।
- 8- जनप्रतिनिधियों को स्मार्ट सिटी की बैठक में न बुलाना।
- 9- मल्टीलेवल कार पार्किंग का टेंडर निरस्त किया जाना।
- 10- मेसर्स गोल्डन विग्स इंडस्ट्रीज़ बरेली के फ र्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद ठोस कार्रवाई न किया जाना।
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टेंडरों में मनमानी, भ्रष्टाचार, मानकों के खिलाफ काम करने के लगाए थे आरोप बरेली। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों पर शासन ने जांच का आदेश देते हुए कमिश्नर से दस बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है। इसमें यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण में 126 करोड़ रुपये के घोटाले में शामिल रहे पूर्व पीसीएस अफ सर को बरेली स्मार्ट सिटी में मिशन मैनेजर पद पर नियुक्ति देने का भी बिंदु शामिल है।
मेयर उमेश गौतम ने करीब साल भर पहले एक सितंबर 2020 को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से स्मार्ट सिटी के अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की थी जिस पर शासन के उप सचिव अखिलानंद ब्रह्मचारी ने अब जांच का आदेश जारी किया है। मेयर ने इस शिकायत में स्मार्ट सिटी के टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और घोटाले के आरोप लगाते हुए कहा था कि कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए आए दिन टेंडर की नियम-शर्तों में बदलाव कर दिया जाता है। उन्होंने स्मार्ट सिटी के सबसे महत्वाकांक्षी इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और संजय कम्युनिटी हॉल प्रोजेक्ट पर खास संज्ञान लेने की बात कहते हुए सभी टेंडरों को रद्द कर विजिलेंस से जांच कराने का मुख्यमंत्री से आग्रह किया था।
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इंटिग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर प्रोजेक्ट के संबंध में उनका आरोप था कि इस टेंडर की इच्छुक जितनी भी कंपनियों ने प्रस्तुति दी, उन सभी के कैमरों की गुणवत्ता ठीक नहीं है। उन्होंने ओपन जिम, हाईमास्ट लाइट और वर्टिकल गार्डन प्रोजेक्ट के टेंडर में भी गड़बड़ी की शिकायत की थी।
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घोटाले के आरोपी अफसर की नियुक्ति का अमर उजाला ने किया था खुलासा
घोटालेबाज पूर्व पीसीएस सतीश कुमार की स्मार्ट सिटी में नियुक्ति का अमर उजाला ने खुलासा किया था। मेयर ने इसी के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय कमेटी से जांच कराने की मांग की थी। मेयर ने अपनी शिकायत में कहा था कि यह सामने आना जरूरी है कि जिस सतीश कुमार की पुलिस एक साल से तलाश कर रही थी, उसे 22 सौ करोड़ से अधिक के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में रखने की अफसरों को क्या जरूरत पड़ी। यह भी पता लगना चाहिए कि प्रशासन में वे कौन से अधिकारी हैं, जिनकी विशेष कृपा से सतीश कुमार सर्किट में ठहरे थे।कमिश्नर से इन बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट
- 1- 325 करोड़ से स्मार्ट सिटी बरेली द्वारा स्थापित ओपन जिम पार्क खराब होना और उसकी मरम्मत न कराया जाना।
- 2- 126.00 करोड़ के घोटाले के मुख्य आरोपी रिटायर पीसीएस सतीश कुमार की स्मार्ट सिटी बरेली में मिशन मैनेजर के पद पर मनमाने ढंग से नियुक्ति और उसे तमाम सुविधाओं का लाभ दिया जाना।
- 3- वर्टिकल गॉर्डन परियोजना के टेंडर में मानक के अनुरूप पौधों का चयन न करना।
- 4- हाईमास्ट लाइट परियोजना के टेंडर में अनियमितता।
- 5-आई ट्रिपल सी प्रोजेक्ट के टेंडर में अनियमितता।
- 6- संजय कम्युनिटी हॉल के टेंडर में मनमाने ढंग से शर्तें निर्धारित करना।
- 7- स्पोर्ट्स स्टेडियम के टेंडर में मनमाने ढंग से शर्तें निर्धारित करना।
- 8- जनप्रतिनिधियों को स्मार्ट सिटी की बैठक में न बुलाना।
- 9- मल्टीलेवल कार पार्किंग का टेंडर निरस्त किया जाना।
- 10- मेसर्स गोल्डन विग्स इंडस्ट्रीज़ बरेली के फ र्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के बावजूद ठोस कार्रवाई न किया जाना।