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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Of the 119 Anganwadi centers, 24 have no buildings

119 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 24 के भी भवन नहीं बने

Fri, 23 Jun 2017 01:03 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Fri, 23 Jun 2017 01:03 AM IST
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सपा राज में बाल विकास परियोजना के तहत आठ साल में 119 आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण स्वीकृत किया गया। इनमें 24 केंद्रों का भी निर्माण पूरा नहीं हो पाया। जो आंगनबाड़ी केंद्र बने भी, उनकी गुणवत्ता इतनी घटिया थी कि उनमें आठ केंद्रों के भवन दो साल के अंदर गिरकर जमींदोज हो गए। नई बिल्डिंग की छत, छज्जा और खिड़की टूटकर गिरने से स्टाफ को चोट भी लगी। अधिकांश केंद्रों का निर्माण अब कराया जा रहा है।  
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महिला एवं बाल कल्याण विभाग को वर्ष 2007 से 2016 तक शहर, भोजीपुरा, बहेड़ी, आंवला, फरीदपुर, भुता के उन गांवों में 119 नए आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण स्वीकृत किया था, जहां केंद्र किराए या जर्जर बिल्डिंग में चल रहे थे। प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र की लागत 4.5 लाख थी। इनमें 24 आंगनबाड़ी केंद्रों की बिल्डिंग बनाने की अनुमति बाद में मिली थी। इनके निर्माण कार्य डीपीओ, सीडीपीओ और संबंधित ब्लाकों के बीडीओ और प्रधानों की देखरेख में होने थे। अब तक 60 फीसदी से ज्यादा केंद्रों के भवन नहीं बन पाए हैं। जो भी निर्माण चल भी रहे हैं, उनमें अधिकांश का निर्माण अधूरा है। बहेड़ी के गांव सियाठेर के रहने वाले ग्रामीणों के अनुसार प्राथमिक स्कूल के निकट बनने वाला आंगनबाड़ी केंद्र भवन कई साल से अधूरा पड़ा है। भवन निर्माण में निर्धारित मानक से कम सामग्री लगाई जा रही है। यही हाल चंदपुर जोगियान, क्योना सादीपुर, चिरंजी बालहिकशन, इटौआ धुरा समेत अन्य गांवों में बनने वाले आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों का है। दो साल के अंदर गांधी नगर समेत नवनिर्मित आठ आंगनबाड़ी केंद्रों के भवनों के छज्जे, छत का प्लास्टर और खिड़कियां आदि गिर गए। हादसे में स्टाफ की जान जाते-जाते बची थी। मुख्य विकास अधिकारी की समीक्षा में भी केंद्रों के निर्माण मानक के अनुरूप नहीं पाए गए। इन केंद्रों का दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। वित्तीय अनियमितताओं के चलते जिला योजना वर्ष 2016-17 में आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए दो करोड़ का प्रस्ताव रखा गया था जो स्वीकृत नहीं किया गया। 
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 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण का काम अधूरा क्यों है। इसका भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। वित्तीय अनियमितताएं सामने आने पर संबंधित विभाग और कार्यदायी संस्था पर नियमानुसार कार्रवाई होगी।  डा. पिंकी जोवल, डीएम 
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