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ओडीओपी में आभूषण और बांस उत्पाद भी शामिल
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बिजनेस
- फोटो : self
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सरकार ने बरेली समेत 20 जिलों में अतिरिक्त उत्पाद किए घोषित
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बरेली। प्रदेश सरकार ने बरेली समेत प्रदेश के बीस जिलों में वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना में अतिरिक्त उद्योग-धंधों को मान्यता दे दी है। इससे बरेली में आभूषण निर्माण और बांस कारोबार से जुड़े हजारों कारीगरों को फायदा होगा। इसके साथ ही सरकारी योजनाओं में इन दोनों उत्पादों की भागीदारी भी होगी।
केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने कुछ माह पहले केंद्र और प्रदेश सरकार से बरेली के सोने-चांदी के आभूषण, बांस उत्पाद और फर्नीचर उद्योग को एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल करने का अनुरोध किया। इससे पहले बरेली में ओडीओपी योजना में सिर्फ जरी जरदोजी शिल्प ही मान्य था। केंद्रीय मंत्री की सलाह पर उद्योग विभाग ने सर्वे कराया। इसमें आभूषण और बांस कारीगरों की बड़ी तादाद सामने आई। इसके बाद जिला अधिकारी नितीश कुमार ने शासन से आग्रह किया कि इन दोनों शिल्पों को ओडीओपी योजना में शामिल कर लिया जाए। इस पर राज्यपाल ने दोनों उत्पादों को मान्यता दे दी।
जिले में सोना-चांदी शिल्पी 15 हजार
वार्षिक कारोबार एक हजार करोड़ रुपये
बांस उत्पाद शिल्पी 04 हजार
वार्षिक टर्नओवर 35-40 करोड़ रुपये
(उपरोक्त आंकड़े उद्योग विभाग द्वारा कराए सर्वे अनुसार)
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- संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री
केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने कुछ माह पहले केंद्र और प्रदेश सरकार से बरेली के सोने-चांदी के आभूषण, बांस उत्पाद और फर्नीचर उद्योग को एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल करने का अनुरोध किया। इससे पहले बरेली में ओडीओपी योजना में सिर्फ जरी जरदोजी शिल्प ही मान्य था। केंद्रीय मंत्री की सलाह पर उद्योग विभाग ने सर्वे कराया। इसमें आभूषण और बांस कारीगरों की बड़ी तादाद सामने आई। इसके बाद जिला अधिकारी नितीश कुमार ने शासन से आग्रह किया कि इन दोनों शिल्पों को ओडीओपी योजना में शामिल कर लिया जाए। इस पर राज्यपाल ने दोनों उत्पादों को मान्यता दे दी।
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जिले में सोना-चांदी शिल्पी 15 हजार
वार्षिक कारोबार एक हजार करोड़ रुपये
बांस उत्पाद शिल्पी 04 हजार
वार्षिक टर्नओवर 35-40 करोड़ रुपये
(उपरोक्त आंकड़े उद्योग विभाग द्वारा कराए सर्वे अनुसार)
बरेली में बनेगा डिजाइन और डेवलपमेंट सेंटर
ओडीओपी योजना में स्वर्णकारी और बांस शिल्प शामिल हो गया है। इसे आधुनिक बनाने और देशभर में पहचान दिलाने के लिए यहां डिजाइन और डेवलपमेंट सेंटर तथा कच्चे माल के लिए बैंक की स्थापना प्रस्तावित है। इससे कारीगरों को स्थानीय स्तर पर ही सस्ता और अच्छा माल उपलब्ध हो सकेगा।
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- संतोष गंगवार, केंद्रीय मंत्री