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लेप्रोस्कोपी के लिए अब जिला अस्पताल खरीदेगा मशीन
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Thu, 12 Jan 2017 01:48 AM IST
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Now the district hospital for laparoscopy buy machine
- फोटो : Now the district hospital for laparoscopy buy machine
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जिला अस्पताल में काफी समय पहले बंद हो चुकी लैप्रोस्कोपी बुधवार को एक डॉक्टर के अपने प्रयासों से शुरू हो गई। उन्होंने अपनी मशीन खरीद कर यहां एक महिला का आपरेशन किया। अच्छी खबर ये है कि जिला अस्पताल के कर्ताधर्ताओं को अब शर्म महसूस हुई कि मशीन की व्यवस्था तो उन्हें करनी थी। सीएमओ ने लैप्रोस्कोपी की इलेक्ट्रिक कोर्टरी मशीन के लिए आर्डर कर दिए हैं।
लखनऊ केजीएमयू से लैप्रोस्कोपी की विशेष ट्रेनिंग लेकर आए जनरल सर्जन डॉ. एमपी सिंह व एनेस्थेटिक डॉक्टर दिग्विजय सिंह, सुनील यादव की टीम ने मिलकर लखीमपुर खीरी की पलिया कला की रहने वाली 25 वर्षीय आसमा का आपरेशन किया। इस ऑपरेशन का खर्च निजी चिकित्सालयों में 15 हजार रुपये से लेकर 35 हजार रुपये तक है, जबकि जिला अस्पताल में एक हजार रुपये के अंदर ही आपरेशन हो गया। जिला अस्पताल में लैप्रोस्कोपी की मशीनों में मॉनीटर, कैमरा, गैस इंसीलेटर पहले से ही मौजूद था, लेकिन इसका प्रयोग नहीं हो रहा था। ट्यूब के माध्यम से होने वाले आपरेशन में इस मशीन के साथ इलेक्ट्रिक कोर्टरी का उपयोग भी जरूरी होता है, जिससे ब्लीडिंग रोकी जाती है। अस्पताल में यह मशीन खराब थी। शासन द्वारा मशीन भेजने में देरी हुई तो एमपी सिंह द्वारा अपनी मशीन से इसका ऑपरेशन किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव का कहना है कि इलेक्ट्रिक कोर्टरी के आर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं। विधायक निधि से बच्चा वार्ड में एनआईसीयू और कोर्टरी के आर्डर एक साथ दिए गए हैं। यह जल्द ही आ जाएगी।
महिला अस्पताल की ठीक है कोर्टरी
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल के डॉक्टराें की ओर से मौखिक तौर पर इलेक्ट्रिक कोर्टरी लैप्रोस्कोपी के लिए मांगी गई थी जो दी भी गई, लेकिन डॉक्टरों ने यह कहकर मना कर दिया कि कोर्टरी ठीक नहीं है इसलिए वे अपनी ही मशीन इस्तेमाल करेंगे।
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लखनऊ केजीएमयू से लैप्रोस्कोपी की विशेष ट्रेनिंग लेकर आए जनरल सर्जन डॉ. एमपी सिंह व एनेस्थेटिक डॉक्टर दिग्विजय सिंह, सुनील यादव की टीम ने मिलकर लखीमपुर खीरी की पलिया कला की रहने वाली 25 वर्षीय आसमा का आपरेशन किया। इस ऑपरेशन का खर्च निजी चिकित्सालयों में 15 हजार रुपये से लेकर 35 हजार रुपये तक है, जबकि जिला अस्पताल में एक हजार रुपये के अंदर ही आपरेशन हो गया। जिला अस्पताल में लैप्रोस्कोपी की मशीनों में मॉनीटर, कैमरा, गैस इंसीलेटर पहले से ही मौजूद था, लेकिन इसका प्रयोग नहीं हो रहा था। ट्यूब के माध्यम से होने वाले आपरेशन में इस मशीन के साथ इलेक्ट्रिक कोर्टरी का उपयोग भी जरूरी होता है, जिससे ब्लीडिंग रोकी जाती है। अस्पताल में यह मशीन खराब थी। शासन द्वारा मशीन भेजने में देरी हुई तो एमपी सिंह द्वारा अपनी मशीन से इसका ऑपरेशन किया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव का कहना है कि इलेक्ट्रिक कोर्टरी के आर्डर पहले ही दिए जा चुके हैं। विधायक निधि से बच्चा वार्ड में एनआईसीयू और कोर्टरी के आर्डर एक साथ दिए गए हैं। यह जल्द ही आ जाएगी।
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महिला अस्पताल की ठीक है कोर्टरी
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. अलका शर्मा ने बताया कि जिला अस्पताल के डॉक्टराें की ओर से मौखिक तौर पर इलेक्ट्रिक कोर्टरी लैप्रोस्कोपी के लिए मांगी गई थी जो दी भी गई, लेकिन डॉक्टरों ने यह कहकर मना कर दिया कि कोर्टरी ठीक नहीं है इसलिए वे अपनी ही मशीन इस्तेमाल करेंगे।
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