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अब इन्हें कोई नहीं कहेगा ‘पाकिस्तानी बहू’
बरेली
Updated Sun, 06 Aug 2017 01:23 AM IST
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मोहसिन पाशा
बरेली।
सरहद पर खिंची तल्खी की दीवार इतनी ऊंची होती गई कि भारत में ब्याही पाकिस्तानी बेटियों को यहां का नागरिक बनने के लिए जंग लड़नी पड़ रही है। अपने घर, अपने रिश्तेदार और अपने मुहल्ले ने तो इन्हें खुशी-खुशी अपनाया लेकिन कागजी नियमों की बेड़ियों ने एक अलग नाम दे दिया पाकिस्तानी बहू। नाती हो गए, पोते खिला रही हैं लेकिन कही पाकिस्तानी बहू ही जाती रहीं। उन्हें एलआईयू में हाजिरी देनी पड़ती है, सुविधाओं पर इनका हक नहीं होता। बरेली के लिए अब अच्छी खबर यह है कि पाकिस्तान का लेबल हटाने के लिए लंबी जंग लड़ने के बाद चार बहुएं ऐसी हैं जिन्हें भारत की नागरिकता मिली है, जल्द ही इनके सर्टिफिकेट पहुंच जाएंगे। उनके घर जश्न मन रहा है...सब खुश हैं, लेकिन टीस यह जरूर है कि उन्हें यह खुशी 30 से ज्यादा वक्त गुजर जाने के बाद मिली। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने चारों के नागरिकता के प्रमाण पत्र प्रदेश सरकार के गृह मंत्रालय को भेज दिए हैं। यूपी सरकार के गृह मंत्रालय के वीजा विभाग के अनु सचिव अजय वाजपेयी ने पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है। जिसमें कहा गया है कि अगले एक-दो दिन में चारों के नागरिकता प्रमाण पत्र डीएम बरेली के पास भेजे जाएंगे।
केस-वन
महक को तो पाकिस्तान में जन्म लेने की सजा मिली
बरेली।
शबाना पाकिस्तान से शादी होने के बाद भारत आई थी। शादी के बाद शबाना भारत से भाई की शादी में शामिल होने के लिए विदा होकर पाकिस्तान गईं तो गर्भवती थीं। मायके में इस तरह के हालात बने की शबाना ने वहीं बच्ची को जन्म दिया जिसका नाम रखा गया महक। भारत से शबाना अकेली गई थीं वहां से लौटकर बेटी के साथ कानूनन आ ही नहीं सकती थीं। यही हुआ कि महक का पाकिस्तान का पासपोर्ट बनवाने के बाद शबाना को भारत लाना पड़ा। शबाना की शादी 24 अगस्त 1986 में घेर मोहल्ला जाफर खां (पुराना शहर) के रहने वाले यूसुफ से हुई थी। महक के पिता यूसुफ ने मां-बेटी को भारत की नागरिकता के लिए प्रयास शुरू कर दिए। शादी के बाद से ही शबाना और मासूम महक ने भारत का नागरिक बनने के लिए दिन रात एक कर दिए। मां-बेटी लॉंग टर्म वीजा (एलटीवी) पर भारत में रह रहीं थी। 31 साल की लड़ाई के बाद भारत सरकार ने मां-बेटी को भारत की नागरिकता दी है। इससे उनके परिवार में खुशियां मनाई जा रही हैं। महक की शादी भी रिश्तेदारी में ही हो चुकी है। उसके भी बच्चे हैं। महक के पिता पत्नी और बेटी को नागरिकता मिलने की सूचना मिलने पर एलआईयू ऑफिस पता करने पहुंच गए।
केस-दो
नाती पोते वाली होने पर बनीं भारतीय
मेगा सिटी में रहने वाले किराना व्यापारी प्रेमकुमार की शादी 18 फरवरी 1983 को पाकिस्तान के राजपुर स्ट्रीट किशनपुर शाहबाजपुर, जिला संजर की रहने वाली भवानी बाई उर्फ जया से हुई थी। इससे पहले जनवरी में ही वह पाकिस्तान से भारत आ गई थीं। यहां होली चौराहे के पास अग्रवाल धर्मशाला में प्रेमकुमार और भवानी शादी के बंधन में बंधे। प्रेमकुमार की उम्र इस वक्त करीब 57 साल है। जबकि भवानी 55 साल की हो चुकी हैं। भवानी ने भारत में ही तीन बेटियों और एक बेटे को जन्म दिया। इनमें से दो बेटियों की शादी हो चुकी है। दोनों बेटियों के बच्चे भी हैं। एक बेटी और बेटा राजा राजानी की अभी शादी नहीं हुई है। शादी के बाद से ही प्रेमकुमार पत्नी को भारत की नागरिकता दिलाने की जंग लड़ते रहे। अब तीन साल से भी ज्यादा समय होने पर जांच पड़ताल के बाद भवानी को नागरिकता मिल पाई है। भवानी का कहना है कि उसे भारत का नागरिक होने पर उसे गर्व है।
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प्रेमकुमार कभी ससुराल नहीं गए
शादी के बाद ससुराल जाने की हसरत किसकी नहीं होगी। शहामतगंज में किराना का व्यापार करने वाले प्रेमकुमार शादी के बाद कभी ससुराल ही नहीं गए। उनके बच्चों को भी कभी ननिहाल जाने का मौका नहीं मिला। भारत और पाकिस्तान के संबंधों में खटास भी इसके पीछे वजह रही। हालांकि प्रेमकुमार का कहना है कि हमें कभी पाकिस्तान जाने का समय ही नहीं मिला। ससुराल से ही उनसे और भवानी से मिलने को रिश्तेदार आते-जाते रहते हैं।
केस-तीन
हिंद टाकीज के पास होटल चलाने वाले दिलीप कुमार की शादी चार अगस्त 1991 को पाकिस्तान के शाहदातपुर की अनीता सिंह के साथ हुई थी। जबकि अनीता सिंह सरहद पार से 30 जून 1990 को ही भारत आ गई थीं। यहां पहले से ही उनकी रिश्तेदारी थी। शादी होने के बाद से ही दिलीप ने पत्नी को भारतीय नागरिकता दिलाने के लिए जंग शुरू कर दी थी। केंद्र सरकार ने पिछले साल नागरिकता के लिए आवेदन मांगे तो दिलीप ने करीब 40 वर्षीय अनीता की फाइल पूरी करके सरकार को भिजवा दी। इसी आधार पर भारत सरकार ने अनीता के दावे को सही मानते हुए उन्हें नागरकिता दे दी है।
पाकिस्तान की और भी बहुओं को मिलेगी नागरिकता
पाकिस्तान की और भी बहुओं को भारत की नागरिकता दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। बरेली से पाकिस्तान के सोलह नागरिकों की फाइल बनाने के बाद यूपी सरकार को भेजी गई थी। शासन ने उन्हें भारत सरकार के गृह मंत्रालय को भिजवा दिया। अभी उनमें से चार महिलाओं को नागरिकता दिए जाने के संबंध में उत्तर प्रदेश के वीजा, गृह अनुभाग के अजय वाजपेई का पत्र आया है। बाकी की फाइलें नागरिकता दिए जाने की प्रक्रिया में चल रही हैं।
कई मोहब्बत की कहानियां भी हैं
पाकिस्तान की लड़कियों से मोहब्बत होने पर शादी करने की भी कई कहानियां हैं। किला इलाके के एक लड़के की रिश्तेदारी में शादी में आई पाकिस्तान की लड़की से प्यार हो गया था। उसने जिद करके उससे निकाह कर लिया और भारत ले आया। वह भी पत्नी को भारत की नागरिकता दिलाने की जंग लड़ रहा है। फाईक एन्क्लेव में रहने वाले एक युवक की भी इसी तरह की प्रेम कहानी है। उसने भी पाकिस्तान में रहने वाले रिश्तेदार की बेटी से शादी की है। लड़की के बरेली रिश्तेदारी में आने पर लड़के की मुलाकात हुई थी।
बरेली।
सरहद पर खिंची तल्खी की दीवार इतनी ऊंची होती गई कि भारत में ब्याही पाकिस्तानी बेटियों को यहां का नागरिक बनने के लिए जंग लड़नी पड़ रही है। अपने घर, अपने रिश्तेदार और अपने मुहल्ले ने तो इन्हें खुशी-खुशी अपनाया लेकिन कागजी नियमों की बेड़ियों ने एक अलग नाम दे दिया पाकिस्तानी बहू। नाती हो गए, पोते खिला रही हैं लेकिन कही पाकिस्तानी बहू ही जाती रहीं। उन्हें एलआईयू में हाजिरी देनी पड़ती है, सुविधाओं पर इनका हक नहीं होता। बरेली के लिए अब अच्छी खबर यह है कि पाकिस्तान का लेबल हटाने के लिए लंबी जंग लड़ने के बाद चार बहुएं ऐसी हैं जिन्हें भारत की नागरिकता मिली है, जल्द ही इनके सर्टिफिकेट पहुंच जाएंगे। उनके घर जश्न मन रहा है...सब खुश हैं, लेकिन टीस यह जरूर है कि उन्हें यह खुशी 30 से ज्यादा वक्त गुजर जाने के बाद मिली। भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने चारों के नागरिकता के प्रमाण पत्र प्रदेश सरकार के गृह मंत्रालय को भेज दिए हैं। यूपी सरकार के गृह मंत्रालय के वीजा विभाग के अनु सचिव अजय वाजपेयी ने पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी है। जिसमें कहा गया है कि अगले एक-दो दिन में चारों के नागरिकता प्रमाण पत्र डीएम बरेली के पास भेजे जाएंगे।
केस-वन
महक को तो पाकिस्तान में जन्म लेने की सजा मिली
बरेली।
शबाना पाकिस्तान से शादी होने के बाद भारत आई थी। शादी के बाद शबाना भारत से भाई की शादी में शामिल होने के लिए विदा होकर पाकिस्तान गईं तो गर्भवती थीं। मायके में इस तरह के हालात बने की शबाना ने वहीं बच्ची को जन्म दिया जिसका नाम रखा गया महक। भारत से शबाना अकेली गई थीं वहां से लौटकर बेटी के साथ कानूनन आ ही नहीं सकती थीं। यही हुआ कि महक का पाकिस्तान का पासपोर्ट बनवाने के बाद शबाना को भारत लाना पड़ा। शबाना की शादी 24 अगस्त 1986 में घेर मोहल्ला जाफर खां (पुराना शहर) के रहने वाले यूसुफ से हुई थी। महक के पिता यूसुफ ने मां-बेटी को भारत की नागरिकता के लिए प्रयास शुरू कर दिए। शादी के बाद से ही शबाना और मासूम महक ने भारत का नागरिक बनने के लिए दिन रात एक कर दिए। मां-बेटी लॉंग टर्म वीजा (एलटीवी) पर भारत में रह रहीं थी। 31 साल की लड़ाई के बाद भारत सरकार ने मां-बेटी को भारत की नागरिकता दी है। इससे उनके परिवार में खुशियां मनाई जा रही हैं। महक की शादी भी रिश्तेदारी में ही हो चुकी है। उसके भी बच्चे हैं। महक के पिता पत्नी और बेटी को नागरिकता मिलने की सूचना मिलने पर एलआईयू ऑफिस पता करने पहुंच गए।
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नाती पोते वाली होने पर बनीं भारतीय
मेगा सिटी में रहने वाले किराना व्यापारी प्रेमकुमार की शादी 18 फरवरी 1983 को पाकिस्तान के राजपुर स्ट्रीट किशनपुर शाहबाजपुर, जिला संजर की रहने वाली भवानी बाई उर्फ जया से हुई थी। इससे पहले जनवरी में ही वह पाकिस्तान से भारत आ गई थीं। यहां होली चौराहे के पास अग्रवाल धर्मशाला में प्रेमकुमार और भवानी शादी के बंधन में बंधे। प्रेमकुमार की उम्र इस वक्त करीब 57 साल है। जबकि भवानी 55 साल की हो चुकी हैं। भवानी ने भारत में ही तीन बेटियों और एक बेटे को जन्म दिया। इनमें से दो बेटियों की शादी हो चुकी है। दोनों बेटियों के बच्चे भी हैं। एक बेटी और बेटा राजा राजानी की अभी शादी नहीं हुई है। शादी के बाद से ही प्रेमकुमार पत्नी को भारत की नागरिकता दिलाने की जंग लड़ते रहे। अब तीन साल से भी ज्यादा समय होने पर जांच पड़ताल के बाद भवानी को नागरिकता मिल पाई है। भवानी का कहना है कि उसे भारत का नागरिक होने पर उसे गर्व है।
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प्रेमकुमार कभी ससुराल नहीं गए
शादी के बाद ससुराल जाने की हसरत किसकी नहीं होगी। शहामतगंज में किराना का व्यापार करने वाले प्रेमकुमार शादी के बाद कभी ससुराल ही नहीं गए। उनके बच्चों को भी कभी ननिहाल जाने का मौका नहीं मिला। भारत और पाकिस्तान के संबंधों में खटास भी इसके पीछे वजह रही। हालांकि प्रेमकुमार का कहना है कि हमें कभी पाकिस्तान जाने का समय ही नहीं मिला। ससुराल से ही उनसे और भवानी से मिलने को रिश्तेदार आते-जाते रहते हैं।
केस-तीन
हिंद टाकीज के पास होटल चलाने वाले दिलीप कुमार की शादी चार अगस्त 1991 को पाकिस्तान के शाहदातपुर की अनीता सिंह के साथ हुई थी। जबकि अनीता सिंह सरहद पार से 30 जून 1990 को ही भारत आ गई थीं। यहां पहले से ही उनकी रिश्तेदारी थी। शादी होने के बाद से ही दिलीप ने पत्नी को भारतीय नागरिकता दिलाने के लिए जंग शुरू कर दी थी। केंद्र सरकार ने पिछले साल नागरिकता के लिए आवेदन मांगे तो दिलीप ने करीब 40 वर्षीय अनीता की फाइल पूरी करके सरकार को भिजवा दी। इसी आधार पर भारत सरकार ने अनीता के दावे को सही मानते हुए उन्हें नागरकिता दे दी है।
पाकिस्तान की और भी बहुओं को मिलेगी नागरिकता
पाकिस्तान की और भी बहुओं को भारत की नागरिकता दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। बरेली से पाकिस्तान के सोलह नागरिकों की फाइल बनाने के बाद यूपी सरकार को भेजी गई थी। शासन ने उन्हें भारत सरकार के गृह मंत्रालय को भिजवा दिया। अभी उनमें से चार महिलाओं को नागरिकता दिए जाने के संबंध में उत्तर प्रदेश के वीजा, गृह अनुभाग के अजय वाजपेई का पत्र आया है। बाकी की फाइलें नागरिकता दिए जाने की प्रक्रिया में चल रही हैं।
कई मोहब्बत की कहानियां भी हैं
पाकिस्तान की लड़कियों से मोहब्बत होने पर शादी करने की भी कई कहानियां हैं। किला इलाके के एक लड़के की रिश्तेदारी में शादी में आई पाकिस्तान की लड़की से प्यार हो गया था। उसने जिद करके उससे निकाह कर लिया और भारत ले आया। वह भी पत्नी को भारत की नागरिकता दिलाने की जंग लड़ रहा है। फाईक एन्क्लेव में रहने वाले एक युवक की भी इसी तरह की प्रेम कहानी है। उसने भी पाकिस्तान में रहने वाले रिश्तेदार की बेटी से शादी की है। लड़की के बरेली रिश्तेदारी में आने पर लड़के की मुलाकात हुई थी।