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फादर्स डे पर पापा को नौ साल बाद मिला ‘बेटा’
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Mon, 20 Jun 2016 01:28 AM IST
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पापा और बेटा मिले
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फादर्स डे पर पालनहारों की याद आई तो 25 साल के सोनू को मजहब की दीवार भी न रोक पाई। वह अपनी मां तस्लीमा बेगम को बिना बताए बचपन में अपनी परवरिश करने वाले पापा जमुना प्रसाद कन्नौजिया से मिलने चला आया। पापा से गले लगते ही उसकी आंखों से खुशी के आंसू बहने लगे। जिन बहनों के साथ उसका बचपन गुजरा था उन्होंने भी उसे हाथोंहाथ लिया।
कस्बा मुगलसराय की सब्जी मंडी में रहने वाली तस्लीम बेगम के बेटे सोनू का बचपन सैनिक कॉलोनी में जीपी कन्नौजिया के घर में ही गुजरा है। वर्ष 1999 में छह साल की उम्र में सोनू ने परिवार वालों की पिटाई से नाराज होकर घर छोड़ दिया था। वह रोडवेज बस की सीट के नीचे छिपकर बरेली चला आया था। यहां बस के परिचालक ने कार्यशाला के पास मिस्त्री को उसे बेच दिया था। मिस्त्री के पास से जेपी कन्नौजिया उसे घर ले गए। उन्होंने उसे सोनू नाम दिया था। उस समय सोनू के बारे में यह जानकारी ही नहीं थी कि वह किस धर्म से ताल्लुक रखता है। आठ साल बाद सोनू ने घर जाने की इच्छा जताई।
अमर उजाला ने सोनू की कहानी को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो उसकी मां मुगलसराय से बरेली आ गई। कानूनी कार्रवाई के बाद सोनू को उसकी मां मुगलसराय ले गईं। इसके बाद सोनू का पालनहारों से संपर्क ही टूट गया। जेपी कन्नौजिया और उनकी पत्नी इंदू ने उससे बात करने की कोशिश भी की तो मां ने बेटे के बिछुड़ने के डर से बात ही नहीं कराई।
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रविवार को फादर्स डे पर सोनू का मन नहीं माना। वह मां को बिना बताए ही मुगलसराय से ट्रेन में सवार होकर सैनिक कॉलोनी पहुंच गया। सोनू के खटखटाने पर दरवाजा खुला तो मुंहबोली बहनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। जेपी कन्नौजिया दूसरी मंजिल से उतरकर आए और सोनू को सीने से लगा लिया। फादर्स डे पर उन्हें नौ साल बाद उनका ‘बेटा’ जो मिल गया था।
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कस्बा मुगलसराय की सब्जी मंडी में रहने वाली तस्लीम बेगम के बेटे सोनू का बचपन सैनिक कॉलोनी में जीपी कन्नौजिया के घर में ही गुजरा है। वर्ष 1999 में छह साल की उम्र में सोनू ने परिवार वालों की पिटाई से नाराज होकर घर छोड़ दिया था। वह रोडवेज बस की सीट के नीचे छिपकर बरेली चला आया था। यहां बस के परिचालक ने कार्यशाला के पास मिस्त्री को उसे बेच दिया था। मिस्त्री के पास से जेपी कन्नौजिया उसे घर ले गए। उन्होंने उसे सोनू नाम दिया था। उस समय सोनू के बारे में यह जानकारी ही नहीं थी कि वह किस धर्म से ताल्लुक रखता है। आठ साल बाद सोनू ने घर जाने की इच्छा जताई।
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अमर उजाला ने सोनू की कहानी को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो उसकी मां मुगलसराय से बरेली आ गई। कानूनी कार्रवाई के बाद सोनू को उसकी मां मुगलसराय ले गईं। इसके बाद सोनू का पालनहारों से संपर्क ही टूट गया। जेपी कन्नौजिया और उनकी पत्नी इंदू ने उससे बात करने की कोशिश भी की तो मां ने बेटे के बिछुड़ने के डर से बात ही नहीं कराई।
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रविवार को फादर्स डे पर सोनू का मन नहीं माना। वह मां को बिना बताए ही मुगलसराय से ट्रेन में सवार होकर सैनिक कॉलोनी पहुंच गया। सोनू के खटखटाने पर दरवाजा खुला तो मुंहबोली बहनों की खुशी का ठिकाना नहीं था। जेपी कन्नौजिया दूसरी मंजिल से उतरकर आए और सोनू को सीने से लगा लिया। फादर्स डे पर उन्हें नौ साल बाद उनका ‘बेटा’ जो मिल गया था।