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राजस्व रिकार्ड से नहरें गायब, सिंचाई विभाग के नक्शे में टेेल भी है
बरेली
Updated Thu, 21 Dec 2017 02:19 AM IST
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शहर के कॉलोनाइजरों ने नदी और नहरों की अरबों रुपये की जमीन कब्जा करके मकान बनाए और बेच दिए। पुलिस और प्रशासन के अफसर ही नहीं आम आदमी भी इससे बखूबी वाकिफ हैं कि कहां, किस कॉलोनाइजर ने नहर की जमीन पर कब्जा करके कॉलोनी बसा दी। सिंचाई विभाग के अधिकारी भी नहरों का नक्शा लिए उनके वजूद तलाशते भटक रहे हैं। उनके नक्शे में नहर के साथ उसकी टेल कहां थी, यह भी जानकारी है, लेकिन सिस्टम का खेल देखिए... राजस्व विभाग के रिकार्ड में नहर हैं ही नहीं। जिन कॉलोनियों का डीएम ने बीडीए से ले-आउट मांगा था, उनमें भी नहरें गायब हैं। हालांकि मौके पर नहरों के अवशेष उनके अस्तित्व की गवाही दे रहे हैं। नहर पर कब्जा करके मकान बनाने वाला भले ही आपको न बताए, लेकिन पड़ोसी नहर होने की गवाही देने को तैयार हैं।
जिले के टॉप-10 भूमाफिया के नाम पर गांव-देहात के कब्जेदारों के नाम शासन को भेजने पर हुई फजीहत के बाद सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर में बड़े भूमाफिया को बचाने के लिए छोटों के नाम शासन को भेजे गए हैं। सिंचाई विभाग ने नहरों की अरबों की जमीन पर कब्जा करके कॉलोनियां बसा रखी हैं। अमर उजाला लगातार नदी और नहरों पर कब्जों की लाइव रिपोर्ट प्रकाशित कर रहा है। डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने अमर उजाला की खबरों का संज्ञान लेकर मंगलवार को आईएस वीक में शामिल होकर लखनऊ से लौटने के बाद बीडीए के अधिकारियों को उन तीन कॉलोनियों के ले-आउट लेकर कलक्ट्रेट सभागार में बुलाया, जिन्हें बसाने वालों पर नहर की जमीन कब्जाने का आरोप हैै। बुधवार को बीडीए उपाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार पांडेय, अधिशासी अभियंता जहीरउद्दीन, चीफ टाउन प्लानर आशीष शिवपुरी के साथ ले-आउट लेकर कलक्ट्रेट पहुंचे। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अलावा एसडीएम (सदर) अनुपम शुक्ला और तहसीलदार सदर भी बैठक में थे। बीडीए की टीम ने डीएम को तीनों कॉलोनियों के ले-आउट दिखाए। उनमें से किसी कॉलोनी के ले-आउट में नहर का जिक्र ही नहीं है। बीडीए उपाध्यक्ष ने डीएम को ले-आउट पास होने में लगी एसएलओ की वह रिपोर्ट भी दिखाई, जिसमें साफ लिखा है कि ले-आउट के इलाके में कोई नहर नहीं हैै। तीनों कॉलोनियों के ले-आउट 1995 से 1999 के बीच पास किए गए हैं।
इसके बाद डीएम ने जब सिंचाई विभाग का रिकार्ड देखा तो उनके नक्शे में नहर ही नहीं उसकी टेल तक का जिक्र हैै। बीसलपुर रोड स्थित एक बड़ी कॉलोनी के मैनगेट पर ही टेल है, लेकिन राजस्व विभाग के रिकार्ड से नहर गायब है। तहसीलदार ने भी राजस्व विभाग के रिकार्ड में नहर होने की पुष्टि नहीं की। हालांकि कहने लगे कि वह एक बार रिकार्ड को फिर से बारीकी से दिखवाएंगे। डीएम ने बताया कि तहसीलदार को सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कुछ रिकार्ड दिलाया गया है। नहरों से संबंधित कुछ और रिकार्ड सिंचाई विभाग के अधिकारी राजस्व विभाग को देने का दावा कर रहे हैं। तहसीलदार राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग और बीडीए के रिकार्ड का मिलान करके एक रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद ही इस मसले पर फैसला होगा।
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यह कहता है सिंचाई विभाग का नक्शा
सिंचाई विभाग के मानचित्र में रुहेलखंड नहर डिवीजन की नहर एयरफोर्स स्टेशन के सामने पीरबहोड़ा में थी। यहां से नहर का एक हिस्सा सनसिटी, सन सिटी विस्तार, मुंशीनगर, बिहारमान नगला से होकर सौ फुटा रोड तक था। वर्तमान में मुंशीनगर में ही नहर के अवशेष बचे हैं। बाकी जगह नहर की जमीन पर मकान बन चुके हैं। कहीं-कहीं बिल्डरों ने नहर की जमीन पर सड़क भी बना दी है। पीरबहोड़ा नहर से दूसरा हिस्सा पीलीभीत बाईपास रोड की ओर से निकलकर कुसुमनगर, ग्रीन पार्क होकर बीसलपुर रोड हरूनगला तक है। हरूनगला में जिस स्थान पर नहर की टेल थी, वहां अब बड़ी कॉलोनी बनी खड़ी हैं। पीलीभीत बाईपास रोड पर बजरंग ढाबे के पीछे, एक अस्पताल, तीन मैरिज लॉन से होकर नहर निकली थी। पीरबहोड़ा, तुलाशेरपुर, परतापुर जीवन सहाय, नवादा जोगियान, डोहरा, हरूनगला में नहर की जमीन पर कब्जे कर मकान बन गए।
श्रम विभाग से भी फाइलें कलक्ट्रेट आ गईं
डीएम के हड़काते ही प्रशासन के अफसरों ने सिंचाई विभाग की ओर से श्रम विभाग में पीपीएक्ट के तहत दर्ज सभी मुकदमों की फाइलें भी सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय भिजवा दी हैं। इन मुकदमोेें को एक साल पहले तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार ने अपने न्यायालय से श्रम विभाग को हस्तांतरित कर दिया था। डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि कब्जों से संबंधित मामले श्रम विभाग को भेजे ही नहीं जाने चाहिए थे, पता नहीं कैैसे यह मुकदमे वहां भेज दिए गए। इस मामले की वह जांच करा रहे हैं। यह भी देखा जाएगा कि मुकदमे श्रम विभाग को भेजे जाने की पीछा अफसरों की क्या मंशा थी।
बिल्डरों में वसूली होने का खौफ, कमिश्नर बोेले- निष्पक्ष कार्रवाई होगी
भूमाफिया के तौैर पर चिह्नित करने और नहर दबाने के आरोप में कार्रवाई के तहत बड़ी रकम की वसूली होने का खौफ शहर के कई बिल्डरों का सता रहा है, क्योंकि इसी तरह पहले भी कई बार नहर कब्जाने के नाम पर कार्रवाई की कोशिश हुई लेकिन कुछ अफसरों से दोस्ती होने की वजह से मामला दब गया। हालांकि कमिश्नर डॉ. पीवी जगनमोहन का कहना है कि भूमाफिया चिह्नित करने के नाम पर कि सी के खिलाफ बिना वजह कार्रवाई नहीं होगी। निष्पक्ष जांच कराने के बाद ही प्रशासन कार्रवाई करेगा।
2014 में डीएम ने कॉलोनाइजर के पक्ष में दी थी रिपोर्ट
बीसलपुर रोड स्थित एक कॉलोनाइजर के नहर पर कब्जा करने की शिकायत पर 2014 में तत्कालीन डीएम ने जांच कराई। इस पर डीएम ने शासन को कॉलोनाइजर के पक्ष में रिपोर्ट दे दी थी। इसके बाद से कॉलोनाइजर बेखौफ हैं। डीएम की रिपोर्ट के आधार पर कॉलोनाइजर को हाईकोर्ट से राहत भी मिल चुकी है।
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जिले के टॉप-10 भूमाफिया के नाम पर गांव-देहात के कब्जेदारों के नाम शासन को भेजने पर हुई फजीहत के बाद सिस्टम की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर में बड़े भूमाफिया को बचाने के लिए छोटों के नाम शासन को भेजे गए हैं। सिंचाई विभाग ने नहरों की अरबों की जमीन पर कब्जा करके कॉलोनियां बसा रखी हैं। अमर उजाला लगातार नदी और नहरों पर कब्जों की लाइव रिपोर्ट प्रकाशित कर रहा है। डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने अमर उजाला की खबरों का संज्ञान लेकर मंगलवार को आईएस वीक में शामिल होकर लखनऊ से लौटने के बाद बीडीए के अधिकारियों को उन तीन कॉलोनियों के ले-आउट लेकर कलक्ट्रेट सभागार में बुलाया, जिन्हें बसाने वालों पर नहर की जमीन कब्जाने का आरोप हैै। बुधवार को बीडीए उपाध्यक्ष सुरेंद्र कुमार पांडेय, अधिशासी अभियंता जहीरउद्दीन, चीफ टाउन प्लानर आशीष शिवपुरी के साथ ले-आउट लेकर कलक्ट्रेट पहुंचे। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अलावा एसडीएम (सदर) अनुपम शुक्ला और तहसीलदार सदर भी बैठक में थे। बीडीए की टीम ने डीएम को तीनों कॉलोनियों के ले-आउट दिखाए। उनमें से किसी कॉलोनी के ले-आउट में नहर का जिक्र ही नहीं है। बीडीए उपाध्यक्ष ने डीएम को ले-आउट पास होने में लगी एसएलओ की वह रिपोर्ट भी दिखाई, जिसमें साफ लिखा है कि ले-आउट के इलाके में कोई नहर नहीं हैै। तीनों कॉलोनियों के ले-आउट 1995 से 1999 के बीच पास किए गए हैं।
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इसके बाद डीएम ने जब सिंचाई विभाग का रिकार्ड देखा तो उनके नक्शे में नहर ही नहीं उसकी टेल तक का जिक्र हैै। बीसलपुर रोड स्थित एक बड़ी कॉलोनी के मैनगेट पर ही टेल है, लेकिन राजस्व विभाग के रिकार्ड से नहर गायब है। तहसीलदार ने भी राजस्व विभाग के रिकार्ड में नहर होने की पुष्टि नहीं की। हालांकि कहने लगे कि वह एक बार रिकार्ड को फिर से बारीकी से दिखवाएंगे। डीएम ने बताया कि तहसीलदार को सिंचाई विभाग के अधिकारियों से कुछ रिकार्ड दिलाया गया है। नहरों से संबंधित कुछ और रिकार्ड सिंचाई विभाग के अधिकारी राजस्व विभाग को देने का दावा कर रहे हैं। तहसीलदार राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग और बीडीए के रिकार्ड का मिलान करके एक रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके बाद ही इस मसले पर फैसला होगा।
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यह कहता है सिंचाई विभाग का नक्शा
सिंचाई विभाग के मानचित्र में रुहेलखंड नहर डिवीजन की नहर एयरफोर्स स्टेशन के सामने पीरबहोड़ा में थी। यहां से नहर का एक हिस्सा सनसिटी, सन सिटी विस्तार, मुंशीनगर, बिहारमान नगला से होकर सौ फुटा रोड तक था। वर्तमान में मुंशीनगर में ही नहर के अवशेष बचे हैं। बाकी जगह नहर की जमीन पर मकान बन चुके हैं। कहीं-कहीं बिल्डरों ने नहर की जमीन पर सड़क भी बना दी है। पीरबहोड़ा नहर से दूसरा हिस्सा पीलीभीत बाईपास रोड की ओर से निकलकर कुसुमनगर, ग्रीन पार्क होकर बीसलपुर रोड हरूनगला तक है। हरूनगला में जिस स्थान पर नहर की टेल थी, वहां अब बड़ी कॉलोनी बनी खड़ी हैं। पीलीभीत बाईपास रोड पर बजरंग ढाबे के पीछे, एक अस्पताल, तीन मैरिज लॉन से होकर नहर निकली थी। पीरबहोड़ा, तुलाशेरपुर, परतापुर जीवन सहाय, नवादा जोगियान, डोहरा, हरूनगला में नहर की जमीन पर कब्जे कर मकान बन गए।
श्रम विभाग से भी फाइलें कलक्ट्रेट आ गईं
डीएम के हड़काते ही प्रशासन के अफसरों ने सिंचाई विभाग की ओर से श्रम विभाग में पीपीएक्ट के तहत दर्ज सभी मुकदमों की फाइलें भी सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय भिजवा दी हैं। इन मुकदमोेें को एक साल पहले तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट मनोज कुमार ने अपने न्यायालय से श्रम विभाग को हस्तांतरित कर दिया था। डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि कब्जों से संबंधित मामले श्रम विभाग को भेजे ही नहीं जाने चाहिए थे, पता नहीं कैैसे यह मुकदमे वहां भेज दिए गए। इस मामले की वह जांच करा रहे हैं। यह भी देखा जाएगा कि मुकदमे श्रम विभाग को भेजे जाने की पीछा अफसरों की क्या मंशा थी।
बिल्डरों में वसूली होने का खौफ, कमिश्नर बोेले- निष्पक्ष कार्रवाई होगी
भूमाफिया के तौैर पर चिह्नित करने और नहर दबाने के आरोप में कार्रवाई के तहत बड़ी रकम की वसूली होने का खौफ शहर के कई बिल्डरों का सता रहा है, क्योंकि इसी तरह पहले भी कई बार नहर कब्जाने के नाम पर कार्रवाई की कोशिश हुई लेकिन कुछ अफसरों से दोस्ती होने की वजह से मामला दब गया। हालांकि कमिश्नर डॉ. पीवी जगनमोहन का कहना है कि भूमाफिया चिह्नित करने के नाम पर कि सी के खिलाफ बिना वजह कार्रवाई नहीं होगी। निष्पक्ष जांच कराने के बाद ही प्रशासन कार्रवाई करेगा।
2014 में डीएम ने कॉलोनाइजर के पक्ष में दी थी रिपोर्ट
बीसलपुर रोड स्थित एक कॉलोनाइजर के नहर पर कब्जा करने की शिकायत पर 2014 में तत्कालीन डीएम ने जांच कराई। इस पर डीएम ने शासन को कॉलोनाइजर के पक्ष में रिपोर्ट दे दी थी। इसके बाद से कॉलोनाइजर बेखौफ हैं। डीएम की रिपोर्ट के आधार पर कॉलोनाइजर को हाईकोर्ट से राहत भी मिल चुकी है।