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क्या हुआ किस ‘बात’ पर पॉल साहब और मेयर में ‘याराना’ हुआ
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क्या हुआ किस ‘बात’ पर पॉल साहब और मेयर में ‘याराना’ हुआ
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
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बरेली। लंबे समय से नगर निगम में मेयर उमेश गौतम और नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. के बीच चल रहा टकराव बुधवार को एक नाटकीय घटनाक्रम के साथ खत्म होने का एलान कर दिया गया। एक दिन पहले तक एक-दूसरे के खिलाफ तलवारें खींचे खड़े मेयर और नगर आयुक्त बुधवार को हाथ में हाथ डालकर दोस्ती का एलान करते नजर आए। नगर निगम के पार्क में एकसाथ पौधरोपण किया और फिर मेयर कक्ष में साथ बैठकर दावा किया कि अब जनता के रुके काम तेजी से कराए जाएंगे। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान नगर निगम के स्टाफ ही नहीं मीडिया वालों में भी यह कौतुहल बना रहा कि अचानक ऐसा क्या हुआ जो मेयर और नगर आयुक्त की चरम पर पहुंच चुकी तनातनी रात भर में ही दोस्ती में तब्दील हो गई।
बुधवार को नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. अपने कार्यालय में मौजूद थे और निगम के पार्क में गड्ढे खोदकर पौधरोपण की तैयारी चल रही थी। इसी बीच दोपहर करीब साढ़े 12 बजे मेयर भी अपने ऑफिस पहुंचे। मंगलवार रात ही लिखी जा चुकी पटकथा के तहत करीब सवा बजे नगर आयुक्त अधिकारियों के साथ पार्क में पहुंचे। करीब दस मिनट बाद मेयर भी पार्क में पहुंच गए। इसके बाद दिखावटी मुस्कान के साथ मेयर और नगर आयुक्त ने अधिकारियों के साथ पौधरोपण किया। साथ ही पौधों की देखभाल के मुद्दे पर हंसी-मजाक करके भी यह जताने की कोशिश की कि अब उनके बीच सबकुछ सामान्य हो गया है। इसके बाद मेयर अपने ऑफिस में पहुंचे, पीछे से नगर आयुक्त भी पहुंच गए। यहां नगर आयुक्त ने हाल ही में निगम में ज्वाइन करने वाले दो अधिकारियों का मेयर से परिचय कराया। इस दौरान पार्षद छंगामल मौर्य, अतुल कपूर, अब्दुल कयूम मुन्ना, मुनेंद्र सिंह, अजय चौहान समेत तमाम पार्षद और निगम अफसर भी मौजूद रहे। पौधरोपण से पूर्व भाजपा के महानगर अध्यक्ष डॉ. केएम अरोरा समेत कुछ पदाधिकारी नगर निगम पहुंचे। पहले वे लोग नगर आयुक्त से मिले और फिर मेयर उमेश गौतम से अकेले में मुलाकात की।
मीडिया से बचे नगर आयुक्त, मेयर ने दिए जवाब
मेयर बोले- 2021 तक पक्की होंगी शहर की करीब 400 कच्ची गलियां
मेयर कक्ष में मीडिया से बात करने से नगर आयुक्त ने बचने का प्रयास किया और अधिकांश सवालों के जवाब मेयर ने ही दिए। मेयर ने दोनों के बीच गिले-शिकवे खत्म होने की बात कही और कहा हम दोनों की कोई व्यक्तिगत रुचि नहीं है। मकसद है कि बरेली विकास में नंबर वन बने। संजयनगर, हजियापुर समेत अन्य कालोनियों में जलभराव के मुद्दे पर कल तक निगम को घेरने वाले मेयर ने ही अब वहां का समाधान बताया और कहा कि अधूरे नाले की जगह पंप लगाकर पानी निकलवाएंगे। बोले पहले आचार संहिता के चलते काम बाधित था, अब विकास के रास्ते खुल गए हैं। वर्ष 2021 तक शहर की करीब 400 कच्ची गलियों को पक्का कराएंगे। राज्य वित्त या निगम निधि से काम होगा।
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लखनऊ से कसे गए पेच तो निकली ऐंठ
बरेली। पौधरोपण के बहाने नगर निगम में ‘दोस्ती’ का सीन फिल्माने की पटकथा मंगलवार रात लिखी गई थी। चर्चा है कि मेयर का वीडियो वायरल होने और गायों की मौत का ‘बम’ फूटने के बाद लखनऊ से ही पेंच कसे गए। बताया जाता है कि मुख्य मंत्री के निर्देश पर प्रमुख सचिव ने कमिश्नर रणवीर प्रसाद को निर्देश देकर मेयर और नगर आयुक्त की ‘दोस्ती’ कराने के निर्देश दिए थे।
नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. की तैनाती के कुछ दिन बाद ही नगर निगम में तलवारें खिंच गई थीं। मेयर और नगर आयुक्त एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे थे। पोर्टेबल शॉप का मामला हो या सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का, नगर आयुक्त ने मेयर को घेरने की हर संभव कोशिश की। मेयर भी पीछे नहीं रहे और नगर निगम में धरना प्रदर्शन से लेकर पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे तक मामला पहुंचा। फिर सोमवार को अपने आदेश पर गाय न छोड़ने पर मेयर नगर आयुक्त के कार्यालय में घुसकर नगर स्वास्थ्य अधिकारी संजीव प्रधान को हाथ पकड़कर स्वास्थ्य विभाग कार्यालय में ले गए थे। इस मामले में नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने मेयर और पार्षदों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। मगर अगले ही दिन मंगलवार को मेयर उमेश गौतम ने प्रेसवार्ता कर कान्हा में गायों की मौत का बम फोड़ दिया। इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक भी पहुंची। बताया जाता है कि इसके बाद ही प्रमुख सचिव ने मंगलवार रात अपने आवास पर मेयर और नगर आयुक्त को चाय पर बुलाकर उनके बीच का विरोधाभास दूर कराया।
शासन के निर्देश पर मेयर और नगर आयुक्त को अपने आवास पर चाय पर बुलाया था। दोनों के बीच जो भी गलतफहमियां थीं, उन्हें दूर कर दिया गया है। कहा गया है कि जनहित के मुद्दों को ध्यान में रखकर आपसी सामंजस्य से काम करें। दोनों ने इस पर सहमति भी जताई है।
- रणवीर प्रसाद, कमिश्नर
मुस्कराहटें आती-जाती रहीं, माथे की शिकन कम नहीं हुई
बरेली। कान्हा उपवन में गायों की मौत का मुद्दा बड़ा ही संवेदनशील है। कान्हा मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है और गायें उनकी आस्था का केंद्र। मेयर उमेश गौतम ने जब इस पर चोट की तो सब बैकफुट पर नजर आए। अफसरों को चिंता थी कि गायों की मौत का मुद्दा सिर्फ उनके लिए ही नहीं भाजपा के लिए भी फजीहत का सबब बन सकता है। तीन-चार दिन पूर्व मुख्यमंत्री अयोध्या और मिर्जापुर में आठ अफसरों को सस्पेंड कर ही चुके हैं। ऐसे में यहां भी किसी की आफत न आए, इसलिए सब मामले को समेटते नजर आए।
मेयर ऑफिस में एकसाथ बैठे मेयर उमेश गौतम तो चेहरे पर जबरन मुस्कान लिए नजर आए लेकिन नगर आयुक्त का चेहरा सब कुछ बयां कर रहा था। करीब आधा घंटा मेयर के कक्ष में बैठने के दौरान उनके चेहरे पर दो-तीन बार ही मुस्कान नजर आई, वह भी किसी की बात को लेकर। हालांकि, दोनों ही गतिरोध समाप्त होने का दावा करते रहे। मगर चर्चा है कि कान्हा में गायों की मौत का मुद्दा ही इस दोस्ती का जरिया बना। इस दौरान जब मंगलवार को कान्हा में गायों की मौत पर सवाल उठाने संबंधी और नगर आयुक्त के खंडन पर सवाल किया गया तो जवाब मेयर ने दिया। एक दिन पहले तक नगर आयुक्त समेत सारे अफसरों को घेरने वाले मेयर ने इसका पूरा ठीकरा नगर स्वास्थ्य अधिकारी संजीव प्रधान के सिर फोड़ दिया।
फिर भी मुद्दा जिंदा.. नगर आयुक्त ने कहा सवा सौ गायें मरने का आरोप झूठा
बरेली। मंगलवार को मेयर उमेश गौतम ने प्रेसवार्ता कर कान्हा उपवन में फरवरी से अब तक सवा सौ गायों के मरने का दावा किया था। सबूत के तौर पर उन्होंने करीब 80 गायों की मौत के प्रमाणपत्र मीडिया को सौंपे। साथ ही, नगर निगम अफसरों पर हिंदू धर्म की धज्जियां उड़ाकर बाकरगंज में कूड़े के ढेर में गायें दफनाने का आरोप लगाया था। यह मामला मीडिया में सुर्खियां बना और फिर बुधवार को नाटकीय घटनाक्रम के तहत नगर आयुक्त और मेयर के बीच तनी तलवारें म्यान में चली गईं। साथ ही दोनों दोस्ती का दिखावा कर विकास का दम भरते नजर आए। वहीं, एक दिन पहले गायों की मौत को नकारने के बाद बुधवार को नगर आयुक्त ने मीडिया को पत्र जारी कर गायों की मौत का खंडन किया। इसके चलते गायों की मौत की हकीकत संदेह के घेरे में आ गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर झूठ कौन बोल रहा है।
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बुधवार को नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. अपने कार्यालय में मौजूद थे और निगम के पार्क में गड्ढे खोदकर पौधरोपण की तैयारी चल रही थी। इसी बीच दोपहर करीब साढ़े 12 बजे मेयर भी अपने ऑफिस पहुंचे। मंगलवार रात ही लिखी जा चुकी पटकथा के तहत करीब सवा बजे नगर आयुक्त अधिकारियों के साथ पार्क में पहुंचे। करीब दस मिनट बाद मेयर भी पार्क में पहुंच गए। इसके बाद दिखावटी मुस्कान के साथ मेयर और नगर आयुक्त ने अधिकारियों के साथ पौधरोपण किया। साथ ही पौधों की देखभाल के मुद्दे पर हंसी-मजाक करके भी यह जताने की कोशिश की कि अब उनके बीच सबकुछ सामान्य हो गया है। इसके बाद मेयर अपने ऑफिस में पहुंचे, पीछे से नगर आयुक्त भी पहुंच गए। यहां नगर आयुक्त ने हाल ही में निगम में ज्वाइन करने वाले दो अधिकारियों का मेयर से परिचय कराया। इस दौरान पार्षद छंगामल मौर्य, अतुल कपूर, अब्दुल कयूम मुन्ना, मुनेंद्र सिंह, अजय चौहान समेत तमाम पार्षद और निगम अफसर भी मौजूद रहे। पौधरोपण से पूर्व भाजपा के महानगर अध्यक्ष डॉ. केएम अरोरा समेत कुछ पदाधिकारी नगर निगम पहुंचे। पहले वे लोग नगर आयुक्त से मिले और फिर मेयर उमेश गौतम से अकेले में मुलाकात की।
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मेयर बोले- 2021 तक पक्की होंगी शहर की करीब 400 कच्ची गलियां
मेयर कक्ष में मीडिया से बात करने से नगर आयुक्त ने बचने का प्रयास किया और अधिकांश सवालों के जवाब मेयर ने ही दिए। मेयर ने दोनों के बीच गिले-शिकवे खत्म होने की बात कही और कहा हम दोनों की कोई व्यक्तिगत रुचि नहीं है। मकसद है कि बरेली विकास में नंबर वन बने। संजयनगर, हजियापुर समेत अन्य कालोनियों में जलभराव के मुद्दे पर कल तक निगम को घेरने वाले मेयर ने ही अब वहां का समाधान बताया और कहा कि अधूरे नाले की जगह पंप लगाकर पानी निकलवाएंगे। बोले पहले आचार संहिता के चलते काम बाधित था, अब विकास के रास्ते खुल गए हैं। वर्ष 2021 तक शहर की करीब 400 कच्ची गलियों को पक्का कराएंगे। राज्य वित्त या निगम निधि से काम होगा।
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बरेली। पौधरोपण के बहाने नगर निगम में ‘दोस्ती’ का सीन फिल्माने की पटकथा मंगलवार रात लिखी गई थी। चर्चा है कि मेयर का वीडियो वायरल होने और गायों की मौत का ‘बम’ फूटने के बाद लखनऊ से ही पेंच कसे गए। बताया जाता है कि मुख्य मंत्री के निर्देश पर प्रमुख सचिव ने कमिश्नर रणवीर प्रसाद को निर्देश देकर मेयर और नगर आयुक्त की ‘दोस्ती’ कराने के निर्देश दिए थे।
नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. की तैनाती के कुछ दिन बाद ही नगर निगम में तलवारें खिंच गई थीं। मेयर और नगर आयुक्त एक-दूसरे को नीचा दिखाने के लिए कोई भी मौका नहीं छोड़ रहे थे। पोर्टेबल शॉप का मामला हो या सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का, नगर आयुक्त ने मेयर को घेरने की हर संभव कोशिश की। मेयर भी पीछे नहीं रहे और नगर निगम में धरना प्रदर्शन से लेकर पार्षदों के सामूहिक इस्तीफे तक मामला पहुंचा। फिर सोमवार को अपने आदेश पर गाय न छोड़ने पर मेयर नगर आयुक्त के कार्यालय में घुसकर नगर स्वास्थ्य अधिकारी संजीव प्रधान को हाथ पकड़कर स्वास्थ्य विभाग कार्यालय में ले गए थे। इस मामले में नगर स्वास्थ्य अधिकारी ने मेयर और पार्षदों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। मगर अगले ही दिन मंगलवार को मेयर उमेश गौतम ने प्रेसवार्ता कर कान्हा में गायों की मौत का बम फोड़ दिया। इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक भी पहुंची। बताया जाता है कि इसके बाद ही प्रमुख सचिव ने मंगलवार रात अपने आवास पर मेयर और नगर आयुक्त को चाय पर बुलाकर उनके बीच का विरोधाभास दूर कराया।
शासन के निर्देश पर मेयर और नगर आयुक्त को अपने आवास पर चाय पर बुलाया था। दोनों के बीच जो भी गलतफहमियां थीं, उन्हें दूर कर दिया गया है। कहा गया है कि जनहित के मुद्दों को ध्यान में रखकर आपसी सामंजस्य से काम करें। दोनों ने इस पर सहमति भी जताई है।
- रणवीर प्रसाद, कमिश्नर
मुस्कराहटें आती-जाती रहीं, माथे की शिकन कम नहीं हुई
बरेली। कान्हा उपवन में गायों की मौत का मुद्दा बड़ा ही संवेदनशील है। कान्हा मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है और गायें उनकी आस्था का केंद्र। मेयर उमेश गौतम ने जब इस पर चोट की तो सब बैकफुट पर नजर आए। अफसरों को चिंता थी कि गायों की मौत का मुद्दा सिर्फ उनके लिए ही नहीं भाजपा के लिए भी फजीहत का सबब बन सकता है। तीन-चार दिन पूर्व मुख्यमंत्री अयोध्या और मिर्जापुर में आठ अफसरों को सस्पेंड कर ही चुके हैं। ऐसे में यहां भी किसी की आफत न आए, इसलिए सब मामले को समेटते नजर आए।
मेयर ऑफिस में एकसाथ बैठे मेयर उमेश गौतम तो चेहरे पर जबरन मुस्कान लिए नजर आए लेकिन नगर आयुक्त का चेहरा सब कुछ बयां कर रहा था। करीब आधा घंटा मेयर के कक्ष में बैठने के दौरान उनके चेहरे पर दो-तीन बार ही मुस्कान नजर आई, वह भी किसी की बात को लेकर। हालांकि, दोनों ही गतिरोध समाप्त होने का दावा करते रहे। मगर चर्चा है कि कान्हा में गायों की मौत का मुद्दा ही इस दोस्ती का जरिया बना। इस दौरान जब मंगलवार को कान्हा में गायों की मौत पर सवाल उठाने संबंधी और नगर आयुक्त के खंडन पर सवाल किया गया तो जवाब मेयर ने दिया। एक दिन पहले तक नगर आयुक्त समेत सारे अफसरों को घेरने वाले मेयर ने इसका पूरा ठीकरा नगर स्वास्थ्य अधिकारी संजीव प्रधान के सिर फोड़ दिया।
फिर भी मुद्दा जिंदा.. नगर आयुक्त ने कहा सवा सौ गायें मरने का आरोप झूठा
बरेली। मंगलवार को मेयर उमेश गौतम ने प्रेसवार्ता कर कान्हा उपवन में फरवरी से अब तक सवा सौ गायों के मरने का दावा किया था। सबूत के तौर पर उन्होंने करीब 80 गायों की मौत के प्रमाणपत्र मीडिया को सौंपे। साथ ही, नगर निगम अफसरों पर हिंदू धर्म की धज्जियां उड़ाकर बाकरगंज में कूड़े के ढेर में गायें दफनाने का आरोप लगाया था। यह मामला मीडिया में सुर्खियां बना और फिर बुधवार को नाटकीय घटनाक्रम के तहत नगर आयुक्त और मेयर के बीच तनी तलवारें म्यान में चली गईं। साथ ही दोनों दोस्ती का दिखावा कर विकास का दम भरते नजर आए। वहीं, एक दिन पहले गायों की मौत को नकारने के बाद बुधवार को नगर आयुक्त ने मीडिया को पत्र जारी कर गायों की मौत का खंडन किया। इसके चलते गायों की मौत की हकीकत संदेह के घेरे में आ गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर झूठ कौन बोल रहा है।