{"_id":"5d2e29618ebc3e6d206ddbf8","slug":"nagar-nigam-bareilly-news-bly3688675194","type":"story","status":"publish","title_hn":"कान्हा में सवा सौ गायों की मौत पर मेयर ने मांगा हिसाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कान्हा में सवा सौ गायों की मौत पर मेयर ने मांगा हिसाब
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बरेली। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट और पोर्टेबल शॉप के बाद अब गाय नगर निगम में मेयर उमेश गौतम और नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन के बीच घमासान का कारण बन गई है। सोमवार को नगर आयुक्त और नगर स्वास्थ्य अधिकारी से भिड़ंत के बाद मेयर और पार्षदों पर एफआईआर दर्ज हुई तो मंगलवार को मेयर ने भी नगर आयुक्त पर पलटवार किया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर आरोप लगाया कि जिन गायों की सुरक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आस्था का मामला है, नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. की मनमानी से वही गायें कान्हा पशु आश्रय गृह बेमौत मर रही हैं और उन्हें बेहद अपवित्रता के साथ कूड़े में दफनाया भी जा रहा है। मेयर ने आरोप लगाया कि फरवरी से अब तक कान्हा में सवा सौ से ज्यादा संख्या में गोवंश की मौत हो चुकी है। सबूत के तौर पर उन्होंने मीडिया को गायों की मृत्यु के प्रमाणपत्र भी सौंपे।
नगर निगम के अफसरों पर हमलावर मेयर उमेश गौतम ने कहा कि करीब दस करोड़ से तैयार हुआ कान्हा उपवन एवं पशु आश्रय गृह मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है। यहां 200-225 गोवंश रखने की व्यवस्था है, मगर उसमें 500 गायें भर दी गई हैं। देखभाल न होने से वहां ये गायें बेमौत मर रही हैं। उन्होंने कहा कि चार महीने में ही कान्हा में सवा सौ गायों की मौत हो चुकी है। मृत गायों का सम्मानपूर्ण संस्कार करने का निर्देश है लेकिन फिर भी उन्हें बेहद अपवित्रता के साथ बाकरगंज के कूड़े के ढेर में दफन किया जा रहा है। गायों की मौत का कारण न सामने आए इसलिए उनका पोस्टमार्टम तक नहीं कराया जा रहा। उन्होंने कहा कि निगम अफसरों की इस करतूत की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। मृत गायों की संख्या इससे भी ज्यादा होने और गायों को इधर-उधर कर फर्जी आंकड़े तैयार कराने की भी आशंका मेयर ने जताते हुए कहा कि इसके प्रभारी अधिकारी भी नगर स्वास्थ्य अधिकारी ही हैं। उन्होंने प्रकरण से शासन को अवगत कराया है।
कान्हा में सब ठीक, भ्रष्टाचार पर सबूत दें मेयर: नगर आयुक्त
नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने सोमवार की घटना की वीडियो फुटेज पुलिस को देने के साथ शासन को भी इस प्रकरण से अवगत कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि नगर निगम अधिनियम में नगर आयुक्त एग्जीक्यूटिव अथॉरिटी है। उसी के तहत वह काम कर रहे हैं। एनजीटी के निर्देशों के अनुसार आवारा जानवरों पर जुर्माना लगाया जा रहा है जो लखनऊ नगर निगम से कम है। मेयर के लगाए भ्रष्टाचार के आरोप नकारते हुए उन्होंने कहा कि मेयर सबूत दें। बोले- नगर स्वास्थ्य अधिकारी की कोई गलती नहीं है। निगम बोर्ड के चेयरमैन होने के नाते मेयर उन्हें आदेश दे सकते हैं, उनके मातहत अधिकारियों को नहीं। कान्हा में गायों की मौत के आरोप पर नगर आयुक्त ने कहा कि कान्हा की सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। सोमवार को उन्होंने कान्हा का निरीक्षण किया था। नगर आयुक्त ने कहा कि कान्हा में जानवर जरूर क्षमता से ज्यादा हो गए हैं, जिनके लिए व्यवस्था कर दी गई है। गायों के स्वास्थ्य की जांच के लिए हर दो दिन में पशु चिकित्सक वहां जाकर दवाइयां देते हैं।
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संजय कम्युनिटी हॉल के तालाब पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
मीडिया से बातचीत के दौरान नगर आयुक्त ने निगम में चल रहे कामों का भी हवाला दिया। बोले- संजय कम्युनिटी हॉल का कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा और वहां के तालाब में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी है। नालों की सफाई पर भी उन्होंने स्थिति स्पष्ट की। बोले- 120 में 105 नाले साफ हो चुके हैं। शहर में निचले इलाकों में जलभराव है और उसका उपाय सिर्फ पंप से पानी निकालना ही है।
शिकायतें लेकर आए फरियादी भटकते रहे
नगर निगम में विवाद के बीच फरियादी शिकायतें लेकर भटकते रहे। मेयर और नगर आयुक्त ने शिकायतें सुनीं लेकिन उन पर कार्रवाई करने के लिए अधिकारी निगम में मौजूद नहीं थे। बाकरगंज से पहुंचे लोगों ने मेयर को सड़क की दुुर्दशा के संबंध में ज्ञापन दिया। एक अन्य महिला जन्म प्रमाणपत्र के लिए भटकती नजर आई। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के न होने के चलते गाय छुड़ाने पहुंचे लोग भी भटकते रहे।
अपर नगर आयुक्त के घर जुटे अफसर
चर्चा है कि मंगलवार को नगर निगम बंद कराने से पहले निगम के तमाम अफसर और कर्मचारी अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति सिंह के आवास पर जुटे। इसके बाद ही निगम में जाकर कार्यालय बंद कराए गए। हालांकि, अपर नगर आयुक्त का कहना है कि वह निगम नहीं गए थे इसलिए कुछ अधिकारी-कर्मचारी उनके आवास पर आ गए।
हस्तियां बोलीं- नर्क न बनाया जाए नगर निगम को
जनता अपने नुमाइंदों से ही बात करेगी, प्राथमिक जिम्मेदारी उन्हीं की है। दुधारु गाय पकड़ लाएंगे तो बछिया किसका दूध पियेगी। अफसर तो आते-जाते रहेंगे लेकिन निगम में इस समय गलत सिस्टम चल रहा है।
- डॉ. रवि खन्ना
कान्हा में गायों की मौत पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और कार्रवाई हो। नगर निगम में जो चल रहा है, वह ठीक नहीं है। इससे सफाई, अतिक्रमण हटाओ अभियान समेत सारी सेवाएं बाधित हो रही हैं।
- डॉ. प्रदीप कुमार
नगर निगम वह संकाय है जिसकी जिम्मेदारी शहर की व्यवस्थाएं बनाए रखना है। जो मतभेद पैदा हुए हैं, दुर्भाग्यपूर्ण हैं। विकास तभी हो सकता है, जब दोनों साथ मिलकर काम करें। ईश्वर से प्रार्थना है, यह सब जल्दी निपटे।
- डॉ. सुदीप सरन
नगर निगम का दायित्व नागरिकों को सुविधाएं प्रदान करने का है। इसके लिए जनप्रतिनिधि और अधिकारी में सामंजस्य जरूरी है। यह घटनाक्रम ठीक नहीं है। ऐसे हम कैसे इंदौर की बराबरी करने का सपना देख सकते हैं।
अनिल साहनी
निगम में गलत हो रहा है। अगर विधायिका और कार्यपालिका में ही टकराव होगा तो विकास कार्य कैसे हो सकेंगे। जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को इसे देखना चाहिए। इगो टकराने के कारण नगर निगम अब नरक निगम बन गया है।
- राजेंद्र गुप्ता
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नगर निगम के अफसरों पर हमलावर मेयर उमेश गौतम ने कहा कि करीब दस करोड़ से तैयार हुआ कान्हा उपवन एवं पशु आश्रय गृह मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है। यहां 200-225 गोवंश रखने की व्यवस्था है, मगर उसमें 500 गायें भर दी गई हैं। देखभाल न होने से वहां ये गायें बेमौत मर रही हैं। उन्होंने कहा कि चार महीने में ही कान्हा में सवा सौ गायों की मौत हो चुकी है। मृत गायों का सम्मानपूर्ण संस्कार करने का निर्देश है लेकिन फिर भी उन्हें बेहद अपवित्रता के साथ बाकरगंज के कूड़े के ढेर में दफन किया जा रहा है। गायों की मौत का कारण न सामने आए इसलिए उनका पोस्टमार्टम तक नहीं कराया जा रहा। उन्होंने कहा कि निगम अफसरों की इस करतूत की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। मृत गायों की संख्या इससे भी ज्यादा होने और गायों को इधर-उधर कर फर्जी आंकड़े तैयार कराने की भी आशंका मेयर ने जताते हुए कहा कि इसके प्रभारी अधिकारी भी नगर स्वास्थ्य अधिकारी ही हैं। उन्होंने प्रकरण से शासन को अवगत कराया है।
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कान्हा में सब ठीक, भ्रष्टाचार पर सबूत दें मेयर: नगर आयुक्त
नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. ने सोमवार की घटना की वीडियो फुटेज पुलिस को देने के साथ शासन को भी इस प्रकरण से अवगत कराने की बात कही है। उन्होंने कहा कि नगर निगम अधिनियम में नगर आयुक्त एग्जीक्यूटिव अथॉरिटी है। उसी के तहत वह काम कर रहे हैं। एनजीटी के निर्देशों के अनुसार आवारा जानवरों पर जुर्माना लगाया जा रहा है जो लखनऊ नगर निगम से कम है। मेयर के लगाए भ्रष्टाचार के आरोप नकारते हुए उन्होंने कहा कि मेयर सबूत दें। बोले- नगर स्वास्थ्य अधिकारी की कोई गलती नहीं है। निगम बोर्ड के चेयरमैन होने के नाते मेयर उन्हें आदेश दे सकते हैं, उनके मातहत अधिकारियों को नहीं। कान्हा में गायों की मौत के आरोप पर नगर आयुक्त ने कहा कि कान्हा की सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं। सोमवार को उन्होंने कान्हा का निरीक्षण किया था। नगर आयुक्त ने कहा कि कान्हा में जानवर जरूर क्षमता से ज्यादा हो गए हैं, जिनके लिए व्यवस्था कर दी गई है। गायों के स्वास्थ्य की जांच के लिए हर दो दिन में पशु चिकित्सक वहां जाकर दवाइयां देते हैं।
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संजय कम्युनिटी हॉल के तालाब पर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट
मीडिया से बातचीत के दौरान नगर आयुक्त ने निगम में चल रहे कामों का भी हवाला दिया। बोले- संजय कम्युनिटी हॉल का कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा और वहां के तालाब में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी है। नालों की सफाई पर भी उन्होंने स्थिति स्पष्ट की। बोले- 120 में 105 नाले साफ हो चुके हैं। शहर में निचले इलाकों में जलभराव है और उसका उपाय सिर्फ पंप से पानी निकालना ही है।
शिकायतें लेकर आए फरियादी भटकते रहे
नगर निगम में विवाद के बीच फरियादी शिकायतें लेकर भटकते रहे। मेयर और नगर आयुक्त ने शिकायतें सुनीं लेकिन उन पर कार्रवाई करने के लिए अधिकारी निगम में मौजूद नहीं थे। बाकरगंज से पहुंचे लोगों ने मेयर को सड़क की दुुर्दशा के संबंध में ज्ञापन दिया। एक अन्य महिला जन्म प्रमाणपत्र के लिए भटकती नजर आई। नगर स्वास्थ्य अधिकारी के न होने के चलते गाय छुड़ाने पहुंचे लोग भी भटकते रहे।
अपर नगर आयुक्त के घर जुटे अफसर
चर्चा है कि मंगलवार को नगर निगम बंद कराने से पहले निगम के तमाम अफसर और कर्मचारी अपर नगर आयुक्त ईश शक्ति सिंह के आवास पर जुटे। इसके बाद ही निगम में जाकर कार्यालय बंद कराए गए। हालांकि, अपर नगर आयुक्त का कहना है कि वह निगम नहीं गए थे इसलिए कुछ अधिकारी-कर्मचारी उनके आवास पर आ गए।
हस्तियां बोलीं- नर्क न बनाया जाए नगर निगम को
जनता अपने नुमाइंदों से ही बात करेगी, प्राथमिक जिम्मेदारी उन्हीं की है। दुधारु गाय पकड़ लाएंगे तो बछिया किसका दूध पियेगी। अफसर तो आते-जाते रहेंगे लेकिन निगम में इस समय गलत सिस्टम चल रहा है।
- डॉ. रवि खन्ना
कान्हा में गायों की मौत पर जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और कार्रवाई हो। नगर निगम में जो चल रहा है, वह ठीक नहीं है। इससे सफाई, अतिक्रमण हटाओ अभियान समेत सारी सेवाएं बाधित हो रही हैं।
- डॉ. प्रदीप कुमार
नगर निगम वह संकाय है जिसकी जिम्मेदारी शहर की व्यवस्थाएं बनाए रखना है। जो मतभेद पैदा हुए हैं, दुर्भाग्यपूर्ण हैं। विकास तभी हो सकता है, जब दोनों साथ मिलकर काम करें। ईश्वर से प्रार्थना है, यह सब जल्दी निपटे।
- डॉ. सुदीप सरन
नगर निगम का दायित्व नागरिकों को सुविधाएं प्रदान करने का है। इसके लिए जनप्रतिनिधि और अधिकारी में सामंजस्य जरूरी है। यह घटनाक्रम ठीक नहीं है। ऐसे हम कैसे इंदौर की बराबरी करने का सपना देख सकते हैं।
अनिल साहनी
निगम में गलत हो रहा है। अगर विधायिका और कार्यपालिका में ही टकराव होगा तो विकास कार्य कैसे हो सकेंगे। जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को इसे देखना चाहिए। इगो टकराने के कारण नगर निगम अब नरक निगम बन गया है।
- राजेंद्र गुप्ता