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जब दोनों मुसलमान नहीं तो बिठा दें रिसीवर
ब्ययूराो अमर उजाला बरेली।
Updated Thu, 28 Apr 2016 12:30 AM IST
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बंद पड़ी कुतुबखाना मस्जिद को लेकर लोगों में बेचैनी बढ़ने लगी है। इसे खुलवाने के लिए आम लोग ही नहीं बल्कि खानकाहों से भी आवाज उठी है। उर्स-ए-तहसीनिया के मंच पर बुद्धिजीवियों ने तो यहां तक कह दिया है कि जब दो गुटों के दावेदार एक दूसरे को मुसलमान मानने को तैयार नहीं हैं तो प्रशासन को चाहिए कि दोनों पक्षों को अलग कर रिसीवर नियुक्त कर दे।
कुतुबखाना मस्जिद को लेकर शहर के बुद्धिजीवियों की ओर से अधिवक्ता अब्दुल हक, इकरार अहमद खां, अतहर अली, उद्यमी शेख शमीम अख्तर, समाज सेवी अतहर कुरैशी ने जिलाधिकारी को रजिटर्ड डाक से प्रार्थना पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने कहा है कि वक्फ संख्या 205 मस्जिद कुतुबखाना में धर्म की संवैधानिक स्वतंत्रता के तहत तुरंत नमाज शुरू कराई जाए। एक तो नमाज रोके जाने से आस पास के दुकानदार और क्षेत्रीय मुसलमान मस्जिद में नमाज पढ़ने से वंचित हो रहे हैं दूसरे मस्जिद परिसर में पुलिस का रहना भावनाओं को आहत कर रहा है।
इसलिए कहा गया है कि मस्जिद अल्लाह का घर है और मुसलमान पांच वक्त नमाज पढ़ते हैं इसलिए मस्जिद को तुरंत खोल दिया जाए और परिसर से पुलिस हटा दी जाए। कहा है कि यह दो मसलक के लोगों का झगड़ा है और दोनों ही तरफ के जिम्मेदार एक दूसरे को काफिर का फतवा देकर एक दूसरे को मुसलमान होने से खारिज कर चुके हैं। जब दोनों ही मुसलमान नहीं हैं तो उनको हरगिज मस्जिद का चार्ज न दिया जाए। बल्कि उस पर किसी सूफी मुसलमान को मस्जिद कमेटी का रिसीवर बना दिया जाए और गुमराह करने वालों पर कार्रवाई हो। इस प्रार्थना पत्र में जिले की अन्य बंद पड़ी मस्जिदों को भी खुलवाने की मांग की गई है।
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उधर मंगलवार को उर्स-ए-तहसीनी के जलसे में खानकाह तहसीनियां के सज्जादा नशीन मौलाना हस्सान रजा खां की ओर से जारी कौमी एजेंडे में भी कुतुबखाना मस्जिद के मुद्दे को शामिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि शासन प्रशासन मस्जिद के ताले खुलवाए। इसमें मस्जिद का इंतजाम अंजुमन इस्लामिया को सौंपने की बात कही गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर इस मामले की जांच करनी भी है तो मस्जिद में ताला बंद न रखा जाए।
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कुतुबखाना मस्जिद को लेकर शहर के बुद्धिजीवियों की ओर से अधिवक्ता अब्दुल हक, इकरार अहमद खां, अतहर अली, उद्यमी शेख शमीम अख्तर, समाज सेवी अतहर कुरैशी ने जिलाधिकारी को रजिटर्ड डाक से प्रार्थना पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने कहा है कि वक्फ संख्या 205 मस्जिद कुतुबखाना में धर्म की संवैधानिक स्वतंत्रता के तहत तुरंत नमाज शुरू कराई जाए। एक तो नमाज रोके जाने से आस पास के दुकानदार और क्षेत्रीय मुसलमान मस्जिद में नमाज पढ़ने से वंचित हो रहे हैं दूसरे मस्जिद परिसर में पुलिस का रहना भावनाओं को आहत कर रहा है।
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इसलिए कहा गया है कि मस्जिद अल्लाह का घर है और मुसलमान पांच वक्त नमाज पढ़ते हैं इसलिए मस्जिद को तुरंत खोल दिया जाए और परिसर से पुलिस हटा दी जाए। कहा है कि यह दो मसलक के लोगों का झगड़ा है और दोनों ही तरफ के जिम्मेदार एक दूसरे को काफिर का फतवा देकर एक दूसरे को मुसलमान होने से खारिज कर चुके हैं। जब दोनों ही मुसलमान नहीं हैं तो उनको हरगिज मस्जिद का चार्ज न दिया जाए। बल्कि उस पर किसी सूफी मुसलमान को मस्जिद कमेटी का रिसीवर बना दिया जाए और गुमराह करने वालों पर कार्रवाई हो। इस प्रार्थना पत्र में जिले की अन्य बंद पड़ी मस्जिदों को भी खुलवाने की मांग की गई है।
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उधर मंगलवार को उर्स-ए-तहसीनी के जलसे में खानकाह तहसीनियां के सज्जादा नशीन मौलाना हस्सान रजा खां की ओर से जारी कौमी एजेंडे में भी कुतुबखाना मस्जिद के मुद्दे को शामिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि शासन प्रशासन मस्जिद के ताले खुलवाए। इसमें मस्जिद का इंतजाम अंजुमन इस्लामिया को सौंपने की बात कही गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर इस मामले की जांच करनी भी है तो मस्जिद में ताला बंद न रखा जाए।