{"_id":"57095bbd4f1c1b802dc812ae","slug":"muslim-nationalism-questioned-why","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुस्लिमों के राष्ट्रप्रेम पर सवाल क्यों!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुस्लिमों के राष्ट्रप्रेम पर सवाल क्यों!
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sun, 10 Apr 2016 01:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन सय्यद कामरान अली चिश्ती कहते हैं कि तमाम ऐसे मुद्दे उठे जब मुस्लिमों पर आरोप लगाए गए, उनके राष्ट्र प्रेम पर सवाल खड़े हुए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खामोश रहे। अब ‘भारत माता की जय’ पर बहस छिड़ी है। इस पर भी मुसलमानों से जवाब मांगा जाता है। आखिर मोदी जी भी मौन तोड़ें, वह कुछ क्यों नहीं बोलते।
सय्यद कामरान अली चिश्ती बरेली में जश्ने ख्वाजा गरीब नवाज में शिरकत करने आए हुए थे। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि ‘भारत माता की जय’ कोई संवैधानिक नारा नहीं है। जो बोले तो बोले, किसी पर जोर जबरदस्ती नहीं की जा सकती और यह देश प्रेमी होने की गारंटी भी नहीं है। मुसलमान हिंदुस्तानी कल भी थे, आज भी है और रहेंगे- मीरे अरब को आई बुए क्या जहां से, मेरा वतन यही है मेरा वतन यही है मेरा वतन यही है...।
आतंकवाद के मुद्दे पर सय्यद कामरान चिश्ती ने कहा कि दुनिया में दो तरह की सोच है, एक कट्टरपंथी और दूसरा सूफिज्म है और सूफिज्म ही रियल इस्लाम है। आतंकवाद को रोकने के लिए जो बुजुर्गों की तालीम है उसे आम किया जाए। नेट पर युवाओं भड़काने के सवाल पर कहा कि हिंदुस्तानी हुकूमत इसमें अपनी इन्वाल्मेंट रखे। उन्होंने कहा कि सूफिज्म को सिलेबस में शामिल किया जाना चाहिए इसमें बुजुर्गों की जिंदगी व उनकी शिक्षा को बताया जाए और सूफिज्म की तरफ दावत दी जाए। नेट पर तो बैन लगाया नहीं जा सकता।
विज्ञापन
विज्ञापन
सय्यद कामरान अली चिश्ती बरेली में जश्ने ख्वाजा गरीब नवाज में शिरकत करने आए हुए थे। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि ‘भारत माता की जय’ कोई संवैधानिक नारा नहीं है। जो बोले तो बोले, किसी पर जोर जबरदस्ती नहीं की जा सकती और यह देश प्रेमी होने की गारंटी भी नहीं है। मुसलमान हिंदुस्तानी कल भी थे, आज भी है और रहेंगे- मीरे अरब को आई बुए क्या जहां से, मेरा वतन यही है मेरा वतन यही है मेरा वतन यही है...।
विज्ञापन
आतंकवाद के मुद्दे पर सय्यद कामरान चिश्ती ने कहा कि दुनिया में दो तरह की सोच है, एक कट्टरपंथी और दूसरा सूफिज्म है और सूफिज्म ही रियल इस्लाम है। आतंकवाद को रोकने के लिए जो बुजुर्गों की तालीम है उसे आम किया जाए। नेट पर युवाओं भड़काने के सवाल पर कहा कि हिंदुस्तानी हुकूमत इसमें अपनी इन्वाल्मेंट रखे। उन्होंने कहा कि सूफिज्म को सिलेबस में शामिल किया जाना चाहिए इसमें बुजुर्गों की जिंदगी व उनकी शिक्षा को बताया जाए और सूफिज्म की तरफ दावत दी जाए। नेट पर तो बैन लगाया नहीं जा सकता।
विज्ञापन