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धमकी देता था दरोगा 80 हजार रुपये और दो तभी मिलेगी बेटी

Tue, 13 Apr 2021 01:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 13 Apr 2021 01:04 AM IST
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money demand by police
आंवला/रामनगर। मऊचंदपुर में खुदकुशी करने वाले फेरी व्यापारी के परिवार वालों का आरोप है कि बेटी की बरामदगी के लिए वे लोग चौकी इंचार्ज को 20 हजार रुपये दे चुके थे। बेटी कहां है, यह भी बताया था लेकिन इसके बावजूद चौकी इंचार्ज उसकी बरामदगी के लिए 80 हजार और मांग रहे थे। कई बार वह बुरी तरह अपमानित भी करते थे। समाज में बदनामी के बावजूद पुलिस की मदद नहीं मिली तो आहत होकर फेरी व्यापारी ने खुदकुशी करने का फैसला कर लिया।
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मृतक की बड़ी बेटी ने बताया कि उनकी इंटर पास बहन बृहस्पतिवार सुबह घर में किसी को कुछ बताए बगैर निकल गई थी। उसके पिता ने बंटी नाम के युवक के खिलाफ बहला-फुसलाकर उसका अपहरण करने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी जिसकी विवेचना रामनगर चौकी इंचार्ज रामरतन सिंह को दी गई। मगर चौकी इंचार्ज लड़की को बरामद करने के लिए एक लाख रुपये मांग रहे थे। उसके पिता ने उन्हें 20 हजार रुपये दे भी दिए थे लेकिन फिर भी उन्होंने उसकी बहन को बरामद करने में कोई दिलचस्पी नहीं ली। कई बार उन्होंने बहन को ले गए आरोपी का पता भी बताया मगर फिर भी चौकी इंचार्ज ने चुनाव में व्यस्त होने का बहाना कर दिया।
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आरोप है कि कई बार चौकी इंचार्ज ने उसके पिता को अपमानित करके लौटा दिया था। उनसे दो टूक कह दिया था कि बाकी 80 हजार दोगे तभी बेटी की बरामदगी होगी। रविवार शाम आरोपी गांव में ही एक व्यक्ति के घर पहुंचा था। उन्हें पता चला तो उन्होंने चौकी इंचार्ज को सूचना दी लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। बेटी की बरामदगी न होने से उनके पिता काफी आहत थे। समाज में बदनामी हो रही थी। ऊपर से चौकी इंचार्ज उनसे हर बार अभद्र भाषा में बात करते थे। इसी वजह से सोमवार को उन्होंने आत्महत्या कर ली।
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सुसाइड नोट: लड़की ढूंढने को एक लाख मांग रहा है दरोगा
परिवार वालों का आरोप है कि फेरी व्यापारी के सुसाइड नोट में साफ लिखा था, ‘चौकी रामनगर का दरोगा मुझसे लड़की ढूंढने के लिए एक लाख रुपये मांग रहा है। पैसा न देने पर गाली देकर भगा दिया। मैं गरीब आदमी पैसा न होने की वजह से आत्महत्या कर रहा हूं। मेरी मौत का जिम्मेदार चौकी इंचार्ज रामनगर है।’ परिवार वालों का कहना है कि चौकी इंचार्ज ने जब जेब से सुसाइड नोट निकाला तो उनके साथ उसे दूसरे लोगों ने भी पढ़ा लेकिन फिर उन्होंने सुसाइड नोट फाड़कर अपनी जेब में रख लिया।
घर पहुंचा पुलिस का दलाल तो भड़के लोग
गांव वालों के मुताबिक चौकी इंचार्ज की शह पर उनका कटौना गांव का एक दलाल भी पीड़ित पक्ष पर उन्हें पैसे देने का दबाव बना रहा था। फेरी वाले के आत्महत्या करने के बाद यह दलाल उनके घर पहुंच गया। मृतक की बेटी और भतीजे नेे उसे देखा तो मारपीट शुरू कर दी। पुलिस ने उसे बचाने का प्रयास किया तो गांव वालों ने छतों से पथराव कर दिया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ा और शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा।
सुसाइड नोट पर उठे सवाल, नहीं हुआ हस्ताक्षर का मिलान
एसपी देहात राजकुमार अग्रवाल ने मौके पर घटना की जांच करने के बाद बताया कि फंदे पर लटके मृतक को परिवार वालों ने नीचे उतार लिया था। चौकी इंचार्ज ने शव की तलाशी ली लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। इसके बाद एक पूर्व प्रधान और उनके बेटे ने सुसाइड नोट दिया जिसमें चौकी इंचार्ज को मौत का जिम्मेदार ठहराया था। मृतक की ओर से लिखाई गई रिपोर्ट में किए हस्ताक्षर और सुसाइट नोट की लिखावट अलग-अलग है लिहाजा हैंडराइटिंग और हस्ताक्षर विशेषज्ञ से उसकी जांच कराई गई, जिसमें भिन्नता पाई गई है। सुसाइड नोट देने वाला पूर्व प्रधान अफीम का काम करता है और उसके खिलाफ चौकी इंचार्ज जांच कर रहे थे। हो सकता है कि इस वजह से चौकी इंचार्ज को फंसाया जा रहा हो। फिलहाल चौकी इंचार्ज रामरतन सिंह और सिपाही मोनू सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
पुलिस की संवेदनशून्यता से
पहले भी जा चुकी हैं जानें
दुष्कर्म पीड़ित किशोरी ने की आत्महत्या
सितंबर 2019 में भमोरा इलाके की किशोरी जंगल से लकड़ी लेने गई थी जहां गांव के ही दो लोगों ने उससे दुष्कर्म की कोशिश की। बाद में पीड़िता इस मामले की शिकायत लेकर अपने पिता के साथ थाने पहुंची तो मुंशी ने उसकी तहरीर फेंक दी। कहा, मारपीट की तहरीर लिखकर लाओ। वुमन हेल्पलाइन पर शिकायत की तो पुलिस उसे थाने ले गई लेकिन रिपोर्ट फिर भी नहीं दर्ज की। जैसे-तैसे दो दिन बाद रिपोर्ट दर्ज की तो आरोपी को गिरफ्तार करने के बजाय पीड़िता को बयान देने और मेडिकल कराने के नाम पर परेशान करना शुरू कर दिया। उधर आरोपियों ने गांव में किशोरी को बदनाम करना शुरू कर दिया तो उसने फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।

सूदखोरों से तंग युवक ने खा लिया जहर
20 मार्च को प्रेमनगर के मोहल्ला भूड़ में रहने वाले स्कूल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अरुण ने सूदखोरों से त्रस्त होकर खुदकुशी कर ली। सूदखोर अरुण का घर, जेवर, जमीन सबकुछ बिकवाकर हड़प चुके थे और इसके बाद भी उस पर कर्ज बकाया बता रहे थे। परेशान होकर अरुण ने पुलिस में शिकायत की तो कार्रवाई के बजाय पुलिस ने आरोपियों को इसकी सूचना दे दी। इसके बाद उन्होंने दरवाजे पर खड़े होकर अरुण को अपमानित किया तो उन्होंने जहर खाकर जान दे दी।
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