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मनरेगा के कामों में 1.57 करोड़ के घपले का मामला
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sat, 04 Jun 2016 12:48 AM IST
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दमखोदा ब्लाक के 33 गांवों में मनरेगा के कामों में 1.57 करोड़ के घपले को लेकर भेजी गई ऑडिट रिपोर्ट की अनदेखी करने से कमिश्नर नाराज है। शुक्रवार को मामला उनके संज्ञान में आया तो उन्होंने ऑडिटर और जेडीसी को तलब कर लिया। रिपोर्ट का खुद परीक्षण किया और डीएम को आदेश जारी किए हैं कि वह इस ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर पूरी जांच कराएं। उसी के आधार पर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट पेश की जाए।
ऑडिटर ने दमखोदा ब्लाक की ग्राम पंचायतों के सचिवों पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि पहले पांच पंचायत सचिव निलंबित किए गए। निलंबन आदेश ब्लॉक पर नहीं पहुंचा और पंद्रह दिन में उन्हें बहाल कर दिया। सब कुछ हवा में हुआ। कोई कार्रवाई नहीं हुई। उच्च अधिकारियों ने जानकारी मांगी तो डीपीआरओ ने गलत तथ्य पेश किए ।
कोट
ऑडिट रिपोर्ट डीएम को कार्रवाई के लिए भेजी है, जिसमें डीएम से फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट मांगी गई है।
-प्रमांशु कुमार, कमिश्नर
सिंधौरा गांव में भी मनरेगा की रकम का बंदरबांट
रिछा। ब्लाक दमखोदा की ग्राम पंचायत सिंधौरा में पिछले वित्तीय वर्ष मे मनरेगा में मिले 3.88 लाख रुपयों का गोलमाल कर लिया। यह गांव मनरेगा के घोटाले मे फंसे पंचायत सचिव करन सिंह के पास था। गांव के दोनों तालाब वैसे के वैस हैं। ग्रामीणों के अनुसार कागजों में ही इन तालाबों का सौंदर्यीकरण हो गया है। मनरेगा के तहत मिले धन से न चकरोड बने न ही अन्य काम हुए। कीचड़ से बजबजाती सड़कें विकास की हकीकत बयां कर रही है। सचिन और बृजकिशोर के घरों के पास की सड़क खस्ता हाल है। दोनों का आरोप है कि प्रधान और पंचायत सचिव सारी रकम डकार गए। पूर्व प्रधान सोनू निगम काम कराने का दावा तो कर रहे हैं मगर तालाबों के सौंदर्यीकरण की बात को वह टाल गए।
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कागजों को काला कर दिया
हमने तो गांव में काम होते नहीं देखे। कागजों में विकास और निर्माण दिखा दिए हों तो अलग बात है। इस प्रकार के फर्जीवाड़े की जांच होनी चाहिए।
- लेखराज गंगवार, प्रधान
खूब काम हुए हैं
कौन कह रहा है काम नहीं हुआ। हमने अपने कार्यकाल में मनरेगा के तहत कई चक मार्गों का निर्माण कार्य कराया। आरोप बेबुनियाद हैं। मनरेगा की धनराशि से काम हुए हैं।
-सोनू निगम, पूर्व प्रधान
ग्रामीणों के आरोप
गांव के सचिन गंगवार ने कहा कि यहां कोई काम नहीं हुए। यदि ऐसा होता तो सड़क दलदल नहीं होती। बृजकिशोर का कहना है कि जब कि काम करवाने को कहा गया तो आजकल कहकर टरका दिया गया। सबने अपनी चिंता की। ग्रामीणों को उपेक्षित कर दिया गया।
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ऑडिटर ने दमखोदा ब्लाक की ग्राम पंचायतों के सचिवों पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि पहले पांच पंचायत सचिव निलंबित किए गए। निलंबन आदेश ब्लॉक पर नहीं पहुंचा और पंद्रह दिन में उन्हें बहाल कर दिया। सब कुछ हवा में हुआ। कोई कार्रवाई नहीं हुई। उच्च अधिकारियों ने जानकारी मांगी तो डीपीआरओ ने गलत तथ्य पेश किए ।
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कोट
ऑडिट रिपोर्ट डीएम को कार्रवाई के लिए भेजी है, जिसमें डीएम से फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट मांगी गई है।
-प्रमांशु कुमार, कमिश्नर
सिंधौरा गांव में भी मनरेगा की रकम का बंदरबांट
रिछा। ब्लाक दमखोदा की ग्राम पंचायत सिंधौरा में पिछले वित्तीय वर्ष मे मनरेगा में मिले 3.88 लाख रुपयों का गोलमाल कर लिया। यह गांव मनरेगा के घोटाले मे फंसे पंचायत सचिव करन सिंह के पास था। गांव के दोनों तालाब वैसे के वैस हैं। ग्रामीणों के अनुसार कागजों में ही इन तालाबों का सौंदर्यीकरण हो गया है। मनरेगा के तहत मिले धन से न चकरोड बने न ही अन्य काम हुए। कीचड़ से बजबजाती सड़कें विकास की हकीकत बयां कर रही है। सचिन और बृजकिशोर के घरों के पास की सड़क खस्ता हाल है। दोनों का आरोप है कि प्रधान और पंचायत सचिव सारी रकम डकार गए। पूर्व प्रधान सोनू निगम काम कराने का दावा तो कर रहे हैं मगर तालाबों के सौंदर्यीकरण की बात को वह टाल गए।
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कागजों को काला कर दिया
हमने तो गांव में काम होते नहीं देखे। कागजों में विकास और निर्माण दिखा दिए हों तो अलग बात है। इस प्रकार के फर्जीवाड़े की जांच होनी चाहिए।
- लेखराज गंगवार, प्रधान
खूब काम हुए हैं
कौन कह रहा है काम नहीं हुआ। हमने अपने कार्यकाल में मनरेगा के तहत कई चक मार्गों का निर्माण कार्य कराया। आरोप बेबुनियाद हैं। मनरेगा की धनराशि से काम हुए हैं।
-सोनू निगम, पूर्व प्रधान
ग्रामीणों के आरोप
गांव के सचिन गंगवार ने कहा कि यहां कोई काम नहीं हुए। यदि ऐसा होता तो सड़क दलदल नहीं होती। बृजकिशोर का कहना है कि जब कि काम करवाने को कहा गया तो आजकल कहकर टरका दिया गया। सबने अपनी चिंता की। ग्रामीणों को उपेक्षित कर दिया गया।