यूपी: नहीं थम रहा बंदरों की मौत का सिलसिला, संभल के बाद अब बदायूं में भी सामने आए मामले
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदायूं के सिविल लाइन्स थाना क्षेत्र के ग्राम चंदोखर गौटिया में गुरुवार को जहरीले चावल खाने से करीब एक दर्जन बंदर और कुछ पक्षियों की मौत हो गई। बताया गया कि एक महिला और एक पुरुष चावल छुपाकर लाए थे और यहां लाकर डाल गए।
करीब आधे घंटे बाद बंदरों की मौत शुरू हो गई। यह देखकर गांव में हड़कंप मच गया। इसकी सूचना पर सीओ सिटी विनय कुमार द्विवेदी, सिटी मजिस्ट्रेट अमित कुमार, सिविल लाइंस और कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।
वहीं संभल जिले के पवांसा क्षेत्र में भी बंदरों की रहस्यमयी मौत का सिलसिला अभी थमा नहीं है। पवांसा में पिछले 9 दिनों में 20 बंदरों की मौत हो चुकी है। पशु चिकित्सा विभाग और वन विभाग बंदरों की मौत का कारण नहीं तलाश पा रहे हैं। पशु चिकित्सा विभाग ने एक बंदर का शव मंगलवार को पोस्टमॉर्टम के लिए बरेली भेजा था।
पोस्टमॉर्टम में बंदर को निमोनिया होने का उल्लेख है। ग्रामीणों ने बताया कि जो भी बंदर बीमार पड़ रहे हैं वे आम तौर पर तालाब के आसपास रहना पसंद कर रहे हैं। अब तक मरने वाले बंदरों की संख्या 20 हो गई है, जबकि पांच-छह बंदर अभी बीमार हैं। बंदरों की मौत का सिलसिला जारी रहने से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट: निमोनिया से हुई थी बंदर की मौत
पवांसा में मौत का शिकार हुए बंदर का शव बरेली स्थित सेंटर फॉर एनिमल डिजीज रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक को भेजा गया था, ताकि उसकी मौत की वजह स्पष्ट हो सके। फोन पर पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी मिलने के बाद डॉ. एलके गुप्ता ने बताया कि बंदर की मौत निमोनिया से हुई थी।
केले में दी जाएगी निमोनिया से बचाव की दवा
निमोनिया से बंदरों को राहत दिलाने के लिए खिलाना जरूरी है। दवा खिलाने के लिए डॉक्टर अगर किसी बंदर के करीब जाते हैं तो बंदरों का झुंड उन्हें घेर लेता है। इस स्थिति से वाकिफ होने के बाद चिकित्सकों ने बंदरों को केले में दवाई देने का निर्णय लिया है।