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लॉकडाउन: बैंकों की बैलेंसशीट में छिप गया एनपीए का चिट्ठा

Sun, 07 Jun 2020 01:58 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2020 01:58 AM IST
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Lockdown: NPA's letter hidden in banks' balance sheet
demo pic - फोटो : demo pic

मार्च में एनपीए होने वाले हजारों खाते घाटे में शामिल होने से बचे
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आर्थिक संकट के बावजूद बैंकों ने बनाई फायदे की बैलेंसशीट

बरेली। लॉकडाउन में जहां तमाम कंपनियों को भारी नुकसान हुआ, वहीं बैंकों में लंबे चौड़े फायदे की बैलेंसशीट तैयार हुई है। बैंक अधिकारियों का तर्क है कि जिन लोन अकांउट से वसूली नहीं हो पा रही थी, उन्हें मार्च में एनपीए दिखाते हुए उनका लॉस अकाउंट में दिखाना था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से इन खातों को पहले तीन और बाद में छह महीने तक एनपीए होने से रोक दिया गया है। लिहाजा बैंकों की जो बैलेंसशीट बनी है उनमें एनपीए खाते भी जुड़ जाने से बैंकों में एनपीए का चिट्ठा छिप गया है।
लॉकडाउन में कई महीने से ठप पड़ी आर्थिक गतिविधियों के बीच पहले यह अंदेशा था कि बैंकों का आर्थिक ढांचा चरमरा जाएगा, जबकि इसके उलट एसबीआई सहित कई बैंकों की लंबे-चौड़े फायदे की बैलेंसशीट तैयार होना चौंकाने वाली बात है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि करीब 20 फीसदी तक जो खाते एनपीए होने से बचे हैं, उसके पीछे लॉकडाउन एक बड़ी वजह है। एसबीआई के उच्चाधिकारी ने बताया कि लॉकडाउन के बाद बैंकों के हजारों ग्राहकों को यह राहत दी गई थी कि जो खाताधारक तीन महीने यानी मार्च, अप्रैल और मई में ईएमआई नहीं जमा कर पाएंगे, उनके खाते एनपीए नहीं होंगे। हालांकि अब यह समय सीमा बढ़ाकर जून से जुलाई तक कर दी गई है। इस तरह मार्च में जो खाते एनपीए होकर बैंकों के हानि के खाते में जोड़े जाने थे, वे इस वजह से नहीं शामिल किए गए हैं। यही वजह है कि आर्थिक संकट के बावजूद बैंकों के खाते में नुकसान का बड़ा हिस्सा शामिल होने से रह गया है।
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अगले साल दिखाई देगा बैंकों के आर्थिक ढांचे पर असर

बैंक अधिकारियों का कहना है कि कोरोना काल में बैंकों के राहत के बाद जब एनपीए की छूट की समय सीमा गुजर जाएगी तब बैंकों को यह रकम अपने खातों में शामिल करनी पड़ेगी। इसके बाद एनपीए के ग्राफ में अचानक बढ़ोत्तरी के साथ इसका बड़ा असर वित्तीय वर्ष 2020-21 की बैलेंस सीट में दिखाई देगा।
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22 प्रतिशत होम एसबीआई की मजबूती का बड़ा आधार

एसबीआई के अधिकारियों का कहना है कि एसबीआई करीब 22 फीसदी होम लोन देती है, जो सर्वाधिक सुरक्षित है। निवेश के आधार पर इसकी रकम बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, जबकि दूसरी बैंकों में होम लोन का यह प्रतिशत 20 या इससे भी कम है।

बैंकों में एनपीए कम होने की वजह यह भी हो सकती है कि इस बार ईएमआई जमा करने में छूट दी गई है, लेकिन बैंकों की ओटीसी यानी एक मुश्त जमा योजना सहित दूसरे प्रयास भी इसके परिणाम के पीछे कारगर साबित हुए हैं। - ओपी बढ़ेरा, लीड बैंक मैनेजर

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