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हत्या और हत्या के प्रयास में दस दोषियों को आजीवन कारावास
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शाहजहांपुर। जलालाबाद थाना क्षेत्र के गांव बढ़ाई में 24 फरवरी, 1992 को 21 लोगों ने चार घंटे तक फायरिंग की थी। गोली लगने से गांव के कल्पू सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी और दो लोग घायल हो गए थे। 30 साल बाद अपर सत्र न्यायालय के जज सिद्धार्थ वागव ने दस दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। मुकदमा चलने के दौरान दस आरोपियों की मौत हो गई थी। वहीं, एक नाबालिग आरोपी की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेजी गई है।
एडीजीसी श्रीपाल वर्मा ने बताया कि 25 फरवरी, 1992 को बढ़ाई गांव निवासी नरसिंह पुत्र पुत्तू गूजर ने जलालाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एफआईआर में नरसिंह ने लिखाया था कि वैशाख के महीने में उसके गांव के विशनू पुत्र रामनाथ की हत्या मदनापुर क्षेत्र के गांव भैंसटा के पास हो गई थी। इसमें वह और उसके भाई अमर सिंह, पिता पुत्तू, चाचा हरिपाल, रामफूल और राम सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जमानत के बाद वे लोग छूट गए थे। तभी से विशनू का परिवार उनसे रंजिश मानता था। विशनू के परिवार के लोग गांव छोड़कर चले गए थे।
24 फरवरी की शाम करीब चार बजे रामलाल के बेटे चंद्रपाल, परशुराम, रामनाथ के बेटे साधु व सुखराम, जगन्नाथ के बेटे रघुवीर व जसवीर, श्रीराम, बसंत, एक नाबालिग, पुत्तू, मुकेश, रामनाथ, रामलाल, इरमान, कृष्णपाल, सिपट्टर, बरेली के फरीदपुर के गांव मनपुरा के रहने वाले रोशन के बेटे सोनेपाल, ओमेंद्र और छह-सात अन्य लोग असलहे लेकर आ गए। नरसिंह के मकान की खपरैल तोड़कर फायरिंग करने लगे। चाचा कल्पू ने मना किया तो चंद्रपाल, श्रीराम, साधु और बसंत ने कल्पू पर फायरिंग कर दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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इसके बाद हमलावर नौरंग के घर में घुस गए और कुल्हाड़ी से उसे मारने लगे। नौरंग को बचाने आए मुन्नालाल को हमलावरों ने गोली मारकर घायल कर दिया। इसके बाद अमर सिंह के घर में घुसकर तोड़फोड़ की। चार घंटे तक फायरिंग करने और घर का सामान लेकर वे लोग बहगुल नदी की ओर भाग गए। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच में बादाम, राजवीर और सत्यपाल के नाम सामने आए। पुलिस ने 21 लोगों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में भेजी। मुकदमे के दौरान परशुराम, सुखराम, श्रीराम, बसंत, पुत्तू, मुकेश, रामलाल, रामनाथ, इरमान, कृष्णपाल की मौत हो गई। नाबालिग की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा के तर्कों से सहमत होकर और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चंद्रपाल, साधु, रघुवीर, जसवीर, सिपट्टर, सोनेपाल, ओमेंद्र, बादाम, राजवीर और सत्यपाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
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एडीजीसी श्रीपाल वर्मा ने बताया कि 25 फरवरी, 1992 को बढ़ाई गांव निवासी नरसिंह पुत्र पुत्तू गूजर ने जलालाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एफआईआर में नरसिंह ने लिखाया था कि वैशाख के महीने में उसके गांव के विशनू पुत्र रामनाथ की हत्या मदनापुर क्षेत्र के गांव भैंसटा के पास हो गई थी। इसमें वह और उसके भाई अमर सिंह, पिता पुत्तू, चाचा हरिपाल, रामफूल और राम सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। जमानत के बाद वे लोग छूट गए थे। तभी से विशनू का परिवार उनसे रंजिश मानता था। विशनू के परिवार के लोग गांव छोड़कर चले गए थे।
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24 फरवरी की शाम करीब चार बजे रामलाल के बेटे चंद्रपाल, परशुराम, रामनाथ के बेटे साधु व सुखराम, जगन्नाथ के बेटे रघुवीर व जसवीर, श्रीराम, बसंत, एक नाबालिग, पुत्तू, मुकेश, रामनाथ, रामलाल, इरमान, कृष्णपाल, सिपट्टर, बरेली के फरीदपुर के गांव मनपुरा के रहने वाले रोशन के बेटे सोनेपाल, ओमेंद्र और छह-सात अन्य लोग असलहे लेकर आ गए। नरसिंह के मकान की खपरैल तोड़कर फायरिंग करने लगे। चाचा कल्पू ने मना किया तो चंद्रपाल, श्रीराम, साधु और बसंत ने कल्पू पर फायरिंग कर दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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इसके बाद हमलावर नौरंग के घर में घुस गए और कुल्हाड़ी से उसे मारने लगे। नौरंग को बचाने आए मुन्नालाल को हमलावरों ने गोली मारकर घायल कर दिया। इसके बाद अमर सिंह के घर में घुसकर तोड़फोड़ की। चार घंटे तक फायरिंग करने और घर का सामान लेकर वे लोग बहगुल नदी की ओर भाग गए। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच में बादाम, राजवीर और सत्यपाल के नाम सामने आए। पुलिस ने 21 लोगों के खिलाफ चार्जशीट अदालत में भेजी। मुकदमे के दौरान परशुराम, सुखराम, श्रीराम, बसंत, पुत्तू, मुकेश, रामलाल, रामनाथ, इरमान, कृष्णपाल की मौत हो गई। नाबालिग की पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड भेज दी गई। सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा के तर्कों से सहमत होकर और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चंद्रपाल, साधु, रघुवीर, जसवीर, सिपट्टर, सोनेपाल, ओमेंद्र, बादाम, राजवीर और सत्यपाल को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।