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अक्षर विहार की आधी-अधूरी पैमाइश
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sat, 28 May 2016 01:34 AM IST
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बड़े दबाव के बाद शुक्रवार को अक्षर विहार की पैमाइश हुई लेकिन आधी -अधूरी। नजूल की जमीन की फाइल एडीएम के दफ्तर में ही है और वह छुट्टी पर हैं। राजस्व विभाग की टीम की पैमाइश में अक्षर विहार तालाब की जमीन बिल्डरों के कब्जे में निकल रही है। राजस्व और नगर निगम के अभिलेखों के आधार पर बिल्डर के कब्जे में तालाब की पांच-सात मीटर जमीन निकली तो वह भड़क गए। नायब तहसीलदार और राजस्व निरीक्षक से बिल्डर की नोकझोंक हो गई। तीन घंटे पैमाइश करने के बाद टीम चली गई। अब एडीएम के लौटने के बाद ही तालाब की जमीन कब्जा मुक्त होने का फैसला हो पाएगा। पैमाइश फिर से भी कराई जा सकती है।
शुक्रवार को नायब तहसीलदार सत्यप्रकाश, राजस्व निरीक्षक अवधेश यादव, मानचित्रकार समशुल हसन और हरीश भारती, नगर निगम एई एके वर्मा अपने स्टाफ के साथ तालाब की जमीन की पैमाइश करने पहुंचे। टीम ने नजूल की जमीन की पैमाइश कोठी से शुरू की। इसमें तालाब की लगभग सात मीटर जमीन, गेट और बाड़ का कुछ हिस्सा तालाब में आने लगा तो बिल्डर राजस्व टीम पर बिगड़ने लगे। बिल्डर राजस्व टीम से अपने अभिलेखों के आधार पर पैमाइश का दबाव बना रहे थे। नगर निगम के मानचित्रकार अपना पैमाना लेकर ही नहीं आए। नजूल की कितनी जमीन फ्रीहोल्ड हुई। इसकी फाइल राजस्व टीम के पास नहीं थी। ये एडीएम फाइनेंस के पास बताई गई जो कि अवकाश पर थे। 12.30 से 3.30 बजे तक पैमाइश चली। फिलहाल, कोई नतीजा नहीं निकला।
तालाब का एरिया कम दिखा रहे
मानचित्रकार समशुल हसन ने बताया कि सन 1937 में 14071 वर्ग गज जमीन जेटी दास को रिहायश के उद्देश्य से लीज पर दी थी। इसी में तालाब भी था। इसके बाद ये जमीन दो भागों में बंट गई। करीब चार साल पहले तत्कालीन डीएम सुभाषचंद्र शर्मा, एडीएम राजाराम और लेखपाल रामपाल ने नजूल की जमीन फ्रीहोल्ड की थी। राजस्व रिकार्ड में जमीन का एक हिस्सा 4258 वर्ग मीटर फ्रीहोल्ड है जबकि दूसरे फ्रीहोल्ड हिस्से का खुलासा नहीं हो रहा। राजस्व रिकार्ड में अक्षर विहार तालाब का एरिया 1.670 हेक्टेअर दर्ज है। नगर निगम बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए शहर के नक्शे में तालाब का एरिया कम करके दिखा रहा है।
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‘राजस्व टीम ने जमीन की पैमाइश कर ली है। हमसे जो अभिलेख मांगे गए, वह उपलब्ध करा दिए गए। तालाब की कितनी जमीन पर कब्जा है, ये राजस्व के लोग ही बताएंगे।’ समशुल हसन, मानचित्रकार नगर निगम
‘हमने नजूल की जमीन और तालाब के एरिया की पूरी पैमाइश कर ली। नजूल की जमीन के अभिलेख एडीएम साहब के पास हैं। जब वह आ जाएंगे, तब ही तालाब पर कब्जे की स्थिति साफ होगी। इसके बाद ही जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी। पैमाइश पूरी तरह निष्पक्ष होगी।’ सत्यप्रकाश, नायब तहसीलदार
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शुक्रवार को नायब तहसीलदार सत्यप्रकाश, राजस्व निरीक्षक अवधेश यादव, मानचित्रकार समशुल हसन और हरीश भारती, नगर निगम एई एके वर्मा अपने स्टाफ के साथ तालाब की जमीन की पैमाइश करने पहुंचे। टीम ने नजूल की जमीन की पैमाइश कोठी से शुरू की। इसमें तालाब की लगभग सात मीटर जमीन, गेट और बाड़ का कुछ हिस्सा तालाब में आने लगा तो बिल्डर राजस्व टीम पर बिगड़ने लगे। बिल्डर राजस्व टीम से अपने अभिलेखों के आधार पर पैमाइश का दबाव बना रहे थे। नगर निगम के मानचित्रकार अपना पैमाना लेकर ही नहीं आए। नजूल की कितनी जमीन फ्रीहोल्ड हुई। इसकी फाइल राजस्व टीम के पास नहीं थी। ये एडीएम फाइनेंस के पास बताई गई जो कि अवकाश पर थे। 12.30 से 3.30 बजे तक पैमाइश चली। फिलहाल, कोई नतीजा नहीं निकला।
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तालाब का एरिया कम दिखा रहे
मानचित्रकार समशुल हसन ने बताया कि सन 1937 में 14071 वर्ग गज जमीन जेटी दास को रिहायश के उद्देश्य से लीज पर दी थी। इसी में तालाब भी था। इसके बाद ये जमीन दो भागों में बंट गई। करीब चार साल पहले तत्कालीन डीएम सुभाषचंद्र शर्मा, एडीएम राजाराम और लेखपाल रामपाल ने नजूल की जमीन फ्रीहोल्ड की थी। राजस्व रिकार्ड में जमीन का एक हिस्सा 4258 वर्ग मीटर फ्रीहोल्ड है जबकि दूसरे फ्रीहोल्ड हिस्से का खुलासा नहीं हो रहा। राजस्व रिकार्ड में अक्षर विहार तालाब का एरिया 1.670 हेक्टेअर दर्ज है। नगर निगम बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए शहर के नक्शे में तालाब का एरिया कम करके दिखा रहा है।
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‘राजस्व टीम ने जमीन की पैमाइश कर ली है। हमसे जो अभिलेख मांगे गए, वह उपलब्ध करा दिए गए। तालाब की कितनी जमीन पर कब्जा है, ये राजस्व के लोग ही बताएंगे।’ समशुल हसन, मानचित्रकार नगर निगम
‘हमने नजूल की जमीन और तालाब के एरिया की पूरी पैमाइश कर ली। नजूल की जमीन के अभिलेख एडीएम साहब के पास हैं। जब वह आ जाएंगे, तब ही तालाब पर कब्जे की स्थिति साफ होगी। इसके बाद ही जांच रिपोर्ट तैयार की जाएगी। पैमाइश पूरी तरह निष्पक्ष होगी।’ सत्यप्रकाश, नायब तहसीलदार