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इंजीनियर की नौकरी छोड़ चुनी खेती.. पकड़ी तरक्की की राह
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खेती के बारे में जानकारी देते लोकराज।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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मझगवां ब्लॉक के गांव राजपुर कला के लोकराज ने की है एमसीए की पढ़ाई
कुछ साल करके छोड़ दी नौकरी, अब बीस लाख रुपये की सालाना कमाई
बरेली। आंवला में मझगवां ब्लॉक के गांव राजपुर कला निवासी लोकराज मौर्या ने एमसीए की पढ़ाई की है। तीन साल नौकरी भी की लेकिन मन नहीं रमा तो नौकरी छोड़कर खेती करने गांव लौट आए। यहां पारंपरिक खेती की जगह उन्हाेंने पॉली हाउस से लाल-पीली शिमला मिर्च की खेती करना शुरू की जो अब उन्हें बीस लाख रुपये सालाना तक की कमाई दे रही है।
लोकराज ने बताया, उन्होंने जब खेती करने का फैसला किया बनाया तो तय किया कि वह इसे पारंपरिक खेती की तरह नहीं, व्यवसाय के रूप में करेंगे। उन्हाेंने जिला उद्यान विभाग से संपर्क किया तो वहां पॉली हाउस के बारे में जानकारी दी गई। शिमला मिर्च की खेती की भी जानकारी मिली। इसके बाद लखनऊ के कुछ ऐसे किसानों से मिलने गए जो पॉली हाउस में शिमला मिर्च की खेती कर रहे थे। कुछ दिन उसे समझा और इसके बाजार की जानकारी लेकर पॉली हाउस लगा दिया। पॉली हाउस पर आने वाले कुल खर्चे का आधा हिस्सा सरकार देती है इसलिए काम और आसान हो गया।
लोकराज ने बताया कि उन्हाेेंने एक एकड़ में पॉली हाउस लगवाया है। पिछले साल शिमला मिर्च के करीब 12 हजार पौधे लगाए। करीब तीन महीने बाद शिमला मिर्च आने लगी और नौ महीने में पूरी उपज मिल गई। तीस टन शिमला मिर्च का उत्पादन हुआ और इस खेती से उन्होंने करीब बीस लाख का मुनाफा कमाया।
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इस बार 40 लाख कमाने का लक्ष्य
लोकराज ने बताया कि इस बार पहली उपज ले चुके हैं और सप्लाई भी कर चुके हैं। इस बार 40 टन उपज का लक्ष्य तय किया है। बताया, यहां से लखनऊ, कानपुर, चंडीगढ़, दिल्ली और आजादपुर तक शिमला मिर्च की सप्लाई कर रहे हैं। 250 रुपये किलो तक थोक के भाव में शिमला मिर्च आसानी से बिक रही है।
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कुछ साल करके छोड़ दी नौकरी, अब बीस लाख रुपये की सालाना कमाई
बरेली। आंवला में मझगवां ब्लॉक के गांव राजपुर कला निवासी लोकराज मौर्या ने एमसीए की पढ़ाई की है। तीन साल नौकरी भी की लेकिन मन नहीं रमा तो नौकरी छोड़कर खेती करने गांव लौट आए। यहां पारंपरिक खेती की जगह उन्हाेंने पॉली हाउस से लाल-पीली शिमला मिर्च की खेती करना शुरू की जो अब उन्हें बीस लाख रुपये सालाना तक की कमाई दे रही है।
लोकराज ने बताया, उन्होंने जब खेती करने का फैसला किया बनाया तो तय किया कि वह इसे पारंपरिक खेती की तरह नहीं, व्यवसाय के रूप में करेंगे। उन्हाेंने जिला उद्यान विभाग से संपर्क किया तो वहां पॉली हाउस के बारे में जानकारी दी गई। शिमला मिर्च की खेती की भी जानकारी मिली। इसके बाद लखनऊ के कुछ ऐसे किसानों से मिलने गए जो पॉली हाउस में शिमला मिर्च की खेती कर रहे थे। कुछ दिन उसे समझा और इसके बाजार की जानकारी लेकर पॉली हाउस लगा दिया। पॉली हाउस पर आने वाले कुल खर्चे का आधा हिस्सा सरकार देती है इसलिए काम और आसान हो गया।
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लोकराज ने बताया कि उन्हाेेंने एक एकड़ में पॉली हाउस लगवाया है। पिछले साल शिमला मिर्च के करीब 12 हजार पौधे लगाए। करीब तीन महीने बाद शिमला मिर्च आने लगी और नौ महीने में पूरी उपज मिल गई। तीस टन शिमला मिर्च का उत्पादन हुआ और इस खेती से उन्होंने करीब बीस लाख का मुनाफा कमाया।
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इस बार 40 लाख कमाने का लक्ष्य
लोकराज ने बताया कि इस बार पहली उपज ले चुके हैं और सप्लाई भी कर चुके हैं। इस बार 40 टन उपज का लक्ष्य तय किया है। बताया, यहां से लखनऊ, कानपुर, चंडीगढ़, दिल्ली और आजादपुर तक शिमला मिर्च की सप्लाई कर रहे हैं। 250 रुपये किलो तक थोक के भाव में शिमला मिर्च आसानी से बिक रही है।