{"_id":"5d1d153e8ebc3e3cbd739959","slug":"kite-flying-bareilly-news-bly3671797140","type":"story","status":"publish","title_hn":"इधर ‘पेच’ की धार, उधर पुलों पर खूनी मांझों का वार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इधर ‘पेच’ की धार, उधर पुलों पर खूनी मांझों का वार
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बरेली। हाल में कलक्ट्रेट के एक बाबू और एक अन्य घटना में एक बच्ची के मांझे से गंभीर रूप से जख्मी होने की घटना से एक बार फिर शहर सहम गया है। अब सावधानी इसे लेकर है कि जुलाई से अगस्त में रक्षाबंधन तक खूब पतंगबाजी होती है। ऐसे में श्यामगंज के साथ ही किला और चौपुला पुल पर ब्लेड जैसी धार वाले ‘खूनी’ मांझे का खतरा भी मंडराने लगता है।
शहर के फ्लाईओवर और ओवरब्रिज के पास सालभर राहगीर आए दिन मांझे की चपेट में आते रहते हैं, लेकिन जुलाई और अगस्त में रक्षाबंधन तक खतरा और बढ़ जाता है। वैसे तो पतंगबाजी के शौकीन प्लास्टिक से बने प्रतिबंधित चाइनीज मांझों का खूब इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पेशेवर पतंगबाज बाकरगंज में बनने वाले रस्सी की तरह मजबूत इस मांझे का प्रयोग करके लोगों की जान का खतरा बढ़ा देते हैं।
बताते हैं कि श्यामगंज पुल के पास शहदाना में रेलवे के मैदान से काफी पतंगबाजी होती है। इसमें पेच लड़ाने के लिए पांच सौ से लेकर एक हजार रुपये तक की बोलियां लगती हैं। पेच जीतने के लिए पतंग उड़ाने वाले चार से पांच सौ रुपये की सामान्य मांझे की चरखी लेने के बजाय दो से तीन हजार रुपये वाला मांझा चलाते हैं। इसके अलावा किला और चौपुला ओवरब्रिज के पास बाकरगंज के कई कारखानों में तैयार होने वाले नौ से 12 तार वाले खूनी मांझा से इन्हीं पुलों के पास से पतंगबाजी करते हैं। इसलिए यहां भी राहगीरों को इन मांझों से कटने का खतरा रहता है।
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वायर टूटने से श्यामगंज फ्लाईओवर पर खतरा फिर बढ़ा
जनवरी 2018 में श्यामगंज फ्लाईओवर के उद्घाटन के साथ ही यहां मांझे की चपेट में आने से राहगीरों के गंभीर रूप से जख्मी होने की घटनाएं शुरू हो गईं। इस हादसों को देखते हुए फ्लाईओवर के दोनों ओर से पोल पर वायर लगाए गए थे, जबकि इनकी मरम्मत न होने से यह कई जगहों पर वायर टूट गए हैं। चोर भी कुछ जगहों से वायर काट ले गए हैं। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि वायर लगाना उनके प्रोजेक्ट में शामिल नहीं था। इसे नगर निगम ने लगवाया था। उधर, चौपुला और किला पुल पर भी मांझे से बचाव के लिए कोई प्लानिंग नहीं की गई है।
फ्लाईओवर-ओवरब्रिज के पास पतंगबाजी बंद कराने की फेल हो गई थी प्लानिंग
चौपुला और किला ओवरब्रिज के साथ श्यामगंज फ्लाईओवर के पास पतंगबाजी पर रोक लगाने के लिए करीब सालभर पहले प्रशासन ने प्लानिंग तैयार की थी। पूर्व में तैनात रहे सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला ने इन पुलों के पास पुलिस कर्मियों को तैनात कर मॉनीटरिंग कराने की बात कही थी। तैयारी यह थी कि पहले पतंगबाजों को चेतावनी दी जानी थी, फिर भी न मानने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए थे। श्यामगंज में बारादरी पुलिस को इसमें अहम भूमिका निभानी थी, लेकिन इसमें न तो प्रशासन ने कोई कार्रवाई की और न ही पुलिस ने, जिससे यह प्लानिंग ही फेल हो गई। हालांकि मौजूदा सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार का कहना है कि फ्लाईओवर और ओवरब्रिज के पास पतंगबाजी पर लगाम कसने के लिए नए सिरे से योजना बनाई जा रही है।
एक बार ही छापा डालकर फुस्स हुआ प्रशासन का जोश
सोमवार को कलक्ट्रेट के एक कर्मचारी के मांझे की चपेट में आने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने सराय खाम और बांस मंडी में मांझे की कुछ दुकानों पर छापामार चेकिंग की थी, लेकिन इसमें चाइनीज मांझा विक्रेता पकड़ में ही नहीं आए। इसके बाद प्रशासन और पुलिस की टीम ने चाइनीज और दूसरे खूनी मांझों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए कोई एक्शन नहीं लिया।
ये भी हुए शिकार
11 जनवरी 2019 को कैंट के आरएन टैगोर स्कूल की प्रधानाचार्य बीना जौहरी की गर्दन श्यामगंज पुल पर कट गई थी। वे सुबह के वक्त स्कूल जाने को स्कूटी से निकली थीं।
28 जनवरी 2018 को राजेंद्र नगर निवासी बिजली सब स्टेशन के ऑपरेटर सीपी सिंह भी मांझे की चपेट में आ गए थे। मांझे से उनकी नाक कट गई थी।
14 फरवरी 2018 को बारादरी थाने की कांस्टेबल आरती शुक्ला की गर्दन श्यामगंज फ्लाईओवर पर मांझे से कट गई।
7 जून 2018 को वीर सावरकर नगर निवासी संदीप अदलखिया के बेटे रौनक की श्यामगंज पुल पर मांझे से गर्दन कट गई। वे हेलमेट लगाए थे फिर भी बच नहीं पाए।
दिसंबर 2018 में सुरेश शर्मा नगर निवासी संजय शर्मा भी मांझे से घायल हुए। श्यामगंज पुल पर उनके चेहरे और गर्दन पर मांझा लिपटने से घाव हो गए।
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शहर के फ्लाईओवर और ओवरब्रिज के पास सालभर राहगीर आए दिन मांझे की चपेट में आते रहते हैं, लेकिन जुलाई और अगस्त में रक्षाबंधन तक खतरा और बढ़ जाता है। वैसे तो पतंगबाजी के शौकीन प्लास्टिक से बने प्रतिबंधित चाइनीज मांझों का खूब इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पेशेवर पतंगबाज बाकरगंज में बनने वाले रस्सी की तरह मजबूत इस मांझे का प्रयोग करके लोगों की जान का खतरा बढ़ा देते हैं।
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बताते हैं कि श्यामगंज पुल के पास शहदाना में रेलवे के मैदान से काफी पतंगबाजी होती है। इसमें पेच लड़ाने के लिए पांच सौ से लेकर एक हजार रुपये तक की बोलियां लगती हैं। पेच जीतने के लिए पतंग उड़ाने वाले चार से पांच सौ रुपये की सामान्य मांझे की चरखी लेने के बजाय दो से तीन हजार रुपये वाला मांझा चलाते हैं। इसके अलावा किला और चौपुला ओवरब्रिज के पास बाकरगंज के कई कारखानों में तैयार होने वाले नौ से 12 तार वाले खूनी मांझा से इन्हीं पुलों के पास से पतंगबाजी करते हैं। इसलिए यहां भी राहगीरों को इन मांझों से कटने का खतरा रहता है।
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वायर टूटने से श्यामगंज फ्लाईओवर पर खतरा फिर बढ़ा
जनवरी 2018 में श्यामगंज फ्लाईओवर के उद्घाटन के साथ ही यहां मांझे की चपेट में आने से राहगीरों के गंभीर रूप से जख्मी होने की घटनाएं शुरू हो गईं। इस हादसों को देखते हुए फ्लाईओवर के दोनों ओर से पोल पर वायर लगाए गए थे, जबकि इनकी मरम्मत न होने से यह कई जगहों पर वायर टूट गए हैं। चोर भी कुछ जगहों से वायर काट ले गए हैं। सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि वायर लगाना उनके प्रोजेक्ट में शामिल नहीं था। इसे नगर निगम ने लगवाया था। उधर, चौपुला और किला पुल पर भी मांझे से बचाव के लिए कोई प्लानिंग नहीं की गई है।
फ्लाईओवर-ओवरब्रिज के पास पतंगबाजी बंद कराने की फेल हो गई थी प्लानिंग
चौपुला और किला ओवरब्रिज के साथ श्यामगंज फ्लाईओवर के पास पतंगबाजी पर रोक लगाने के लिए करीब सालभर पहले प्रशासन ने प्लानिंग तैयार की थी। पूर्व में तैनात रहे सिटी मजिस्ट्रेट अशोक कुमार शुक्ला ने इन पुलों के पास पुलिस कर्मियों को तैनात कर मॉनीटरिंग कराने की बात कही थी। तैयारी यह थी कि पहले पतंगबाजों को चेतावनी दी जानी थी, फिर भी न मानने पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए गए थे। श्यामगंज में बारादरी पुलिस को इसमें अहम भूमिका निभानी थी, लेकिन इसमें न तो प्रशासन ने कोई कार्रवाई की और न ही पुलिस ने, जिससे यह प्लानिंग ही फेल हो गई। हालांकि मौजूदा सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार का कहना है कि फ्लाईओवर और ओवरब्रिज के पास पतंगबाजी पर लगाम कसने के लिए नए सिरे से योजना बनाई जा रही है।
एक बार ही छापा डालकर फुस्स हुआ प्रशासन का जोश
सोमवार को कलक्ट्रेट के एक कर्मचारी के मांझे की चपेट में आने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने सराय खाम और बांस मंडी में मांझे की कुछ दुकानों पर छापामार चेकिंग की थी, लेकिन इसमें चाइनीज मांझा विक्रेता पकड़ में ही नहीं आए। इसके बाद प्रशासन और पुलिस की टीम ने चाइनीज और दूसरे खूनी मांझों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए कोई एक्शन नहीं लिया।
ये भी हुए शिकार
11 जनवरी 2019 को कैंट के आरएन टैगोर स्कूल की प्रधानाचार्य बीना जौहरी की गर्दन श्यामगंज पुल पर कट गई थी। वे सुबह के वक्त स्कूल जाने को स्कूटी से निकली थीं।
28 जनवरी 2018 को राजेंद्र नगर निवासी बिजली सब स्टेशन के ऑपरेटर सीपी सिंह भी मांझे की चपेट में आ गए थे। मांझे से उनकी नाक कट गई थी।
14 फरवरी 2018 को बारादरी थाने की कांस्टेबल आरती शुक्ला की गर्दन श्यामगंज फ्लाईओवर पर मांझे से कट गई।
7 जून 2018 को वीर सावरकर नगर निवासी संदीप अदलखिया के बेटे रौनक की श्यामगंज पुल पर मांझे से गर्दन कट गई। वे हेलमेट लगाए थे फिर भी बच नहीं पाए।
दिसंबर 2018 में सुरेश शर्मा नगर निवासी संजय शर्मा भी मांझे से घायल हुए। श्यामगंज पुल पर उनके चेहरे और गर्दन पर मांझा लिपटने से घाव हो गए।