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नई तकनीक, उन्नत बीज अपनाएं गन्ना किसान

बरेली Updated Wed, 01 Apr 2015 01:49 AM IST
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डीडीपुरम पार्क में एक दिवसीय गन्ना किसान मेले और गोष्ठी में मंगलवार को काफी भीड़ जुटी। किसानों को गन्ना खेती की नवीनतम जानकारियां दी गईं।
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मेले का उद्घाटन सीडीओ साहित्य प्रकाश मिश्र ने किया। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि मेले में मिली जानकारियों को प्रचारित करके दूसरे किसानों को भी आधुनिक तरीकों से खेती करना सिखाएं। उप गन्ना आयुक्त डॉ. दिनेश्वर मिश्र ने गन्ने की नई प्रजातियों के बारे में बताया। गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर से आए वैज्ञानिक डॉ. दिलीप जौहरी, डॉ. एमएस वर्मा, डॉ. केएम सिंह ने किसानों को गन्ने की वैज्ञानिक खेती, फसल सुरक्षा, अन्त: फसल, उर्वरक प्रबंध और खरपतवार नियंत्रण पर कृषकों को नई जानकारी दी गई। किसानों ने वैज्ञानिकों से सवाल पूछकर अपनी समस्याओं का निदान किया। अफसरों से कहा कि ऐसे मेले देहात क्षेत्रों में क्यों नहीं लगाए जा रहे? उन्हें बताया गया कि गन्ना समिति चुनाव के चलते आचार संहिता लागू होने की वजह से ऐसा नहीं किया जा सका। आगे देहात में भी मेले लगाए जाएंगे। सीडीओ ने अधिकारियों के साथ स्टालों का निरीक्षण किया। यहां कुल 26 विभागों को स्टाल लगाने थे जिनमें से आधे भी नहीं लग सके। कार्यक्रम में जिला कृषि अधिकारी डॉ. रामतेज यादव, जिला उद्यान अधिकारी पूजा, जिला कृषि रक्षा अधिकारी एके सिंह, बीज उत्पादन अधिकारी वेदप्रकाश, ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक वीरेंद्र नाथ आदि का सहयोग रहा। जिला गन्ना अधिकारी शैलेश मौर्य ने सभी का आभार जताया।

फोटो-
ट्रेंच विधि से गन्ना बोकर ऐहवरन ने बदली किस्मत
दोगुनी पैदावार के साथ ही सब्जियों की फसल बोनस में

बरेली। बहेड़ी क्षेत्र के मझोले किसान ऐहवरन अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने अपनी पांच एकड़ जमीन में सोना उगाना सीख लिया है। ऐरवरन ने बताया कि केसर शुगर मिल के अधिकारियों की प्रेरणा से ट्रेंच विधि से गन्ने की अगैती प्रजातियों का बीज बोया। इसमें एक फुट गहरा और एक फुट चौड़ा कूड़ बनाकर दूसरे कूड़ से उसकी दूरी चार फुट रखी जाती है। इससे गन्ने को प्रसार का मौका मिलता है। सामान्य तरीके से वह 30 से 40 कुंतल बीघा गन्ना पाते थे लेकिन अब 80 कुंतल बीघा की दर से फसल मिल रही है। खास बात यह है कि दो कूड़ के बीच की खाली जगह में वह मटर, आलू जैसी फसल उगा रहे हैं। इसमें अलग से सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। इनकी उपज गन्ना कटाई से पहले ही मिल जाती है। फसल के शेष हिस्से की खाद बन जाती है जो गन्ने की पैदावार बढ़ा देती है।

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