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कान्हा उपवन में कितनी मौतें हुईं जांच हो तो पता चले
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बरेली। कान्हा उपवन में सवा सौ से ज्यादा गोवंशीय पशुओं की मौत नगर निगम के अफसरों के लिए डरावना सपना बन गई है। नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन. की ओर से इन मौतों को नकारे जाने के बाद अब एक के बाद एक नए सवाल खड़े होने लगे हैं। इस बीच नगर आयुक्त ने कान्हा उपवन के संचालक को जारी नोटिस में बार-बार किए गए निरीक्षण में वहां सारी व्यवस्थाएं ठीक पाए जाने का दावा करते हुए पूछा है कि इतनी संख्या में गायों की मौत हुई तो नगर निगम को सूचना क्यों नहीं दी गई। दूसरी ओर कान्हा के संचालक का कहना है कि एक-एक गाय की मौत उनके रजिस्टर में दर्ज है। इसके बाद सवाल उठ रहा है कि अफसरों ने निरीक्षण किया तो यह रजिस्टर क्यों नहीं देखा।
मेयर उमेश गौतम ने मंगलवार को मीडिया के सामने पिछले चार महीनों में कान्हा उपवन एवं पशु आश्रय गृह में सवा सौ से ज्यादा गोवंशीय पशुओं की मौत होने और उनके शव हिंदू धर्म की मान्यताओं के विपरीत बेहद अपवित्रता के साथ बाकरगंज के कूड़े के ढेर में दफन करने का आरोप लगाया था। उन्होंने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के साथ शासन के प्रमुख अफसरों को भी भेजने का दावा किया। बताया कि उन्होंने इसकी जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी की मांग की है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने अयोध्या और मिर्जापुर में गायों की मौत पर आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था, लिहाजा मेयर के आरोपों पर नगर निगम के अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। अब निगम अफसर गायों की मौत का ठीकरा कान्हा के संचालक के सिर फोड़ने की कवायद में जुट गए हैं। बुधवार को ही गायों की मौत होने से साफ इनकार करने वाले नगर आयुक्त ने बृहस्पतिवार को कान्हा के संचालक संजीव गौड़ को नोटिस जारी कर पूछा है कि गायों की मौत की सूचना नगर निगम को क्यों नहीं दी गईं। उन्होंने उन्हें यह भी निर्देश दिया है कि वह अपने स्तर से गायों की मौत का खंडन करें। गोवंश की बेहतर देखभाल की भी हिदायत दी है।
उधर, कान्हा के संचालक संजीव गौड़ का कहना है कि उन्होंने सभी गायों की मौत की सूचना नगर निगम को दी है। गायों के पकड़ने से लेकर मौत तक का पूरा रिकार्ड उनके रजिस्टर में भी दर्ज है। हर मौत पर नगर निगम को सूचना भी दी जाती है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें अभी नगर आयुक्त का कोई नोटिस नहीं मिला है।
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.. यानी नगर निगम में हैं गायों के मृत्यु प्रमाणपत्र
प्रेसवार्ता के दौरान मेयर उमेश गौतम ने मीडिया को गायों की मौत के मृत्यु प्रमाणपत्र सौंपे थे। यह सभी प्रमाणपत्र कान्हा की ओर से नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में भेजे गए हैं। इसके बावजूद नगर आयुक्त ने गोशाला संचालक को भेजे नोटिस में निगम को इनकी सूचना न होने की बात कही है।
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मेयर उमेश गौतम ने मंगलवार को मीडिया के सामने पिछले चार महीनों में कान्हा उपवन एवं पशु आश्रय गृह में सवा सौ से ज्यादा गोवंशीय पशुओं की मौत होने और उनके शव हिंदू धर्म की मान्यताओं के विपरीत बेहद अपवित्रता के साथ बाकरगंज के कूड़े के ढेर में दफन करने का आरोप लगाया था। उन्होंने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के साथ शासन के प्रमुख अफसरों को भी भेजने का दावा किया। बताया कि उन्होंने इसकी जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी की मांग की है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने अयोध्या और मिर्जापुर में गायों की मौत पर आठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था, लिहाजा मेयर के आरोपों पर नगर निगम के अफसरों में हड़कंप मचा हुआ है। अब निगम अफसर गायों की मौत का ठीकरा कान्हा के संचालक के सिर फोड़ने की कवायद में जुट गए हैं। बुधवार को ही गायों की मौत होने से साफ इनकार करने वाले नगर आयुक्त ने बृहस्पतिवार को कान्हा के संचालक संजीव गौड़ को नोटिस जारी कर पूछा है कि गायों की मौत की सूचना नगर निगम को क्यों नहीं दी गईं। उन्होंने उन्हें यह भी निर्देश दिया है कि वह अपने स्तर से गायों की मौत का खंडन करें। गोवंश की बेहतर देखभाल की भी हिदायत दी है।
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उधर, कान्हा के संचालक संजीव गौड़ का कहना है कि उन्होंने सभी गायों की मौत की सूचना नगर निगम को दी है। गायों के पकड़ने से लेकर मौत तक का पूरा रिकार्ड उनके रजिस्टर में भी दर्ज है। हर मौत पर नगर निगम को सूचना भी दी जाती है। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें अभी नगर आयुक्त का कोई नोटिस नहीं मिला है।
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.. यानी नगर निगम में हैं गायों के मृत्यु प्रमाणपत्र
प्रेसवार्ता के दौरान मेयर उमेश गौतम ने मीडिया को गायों की मौत के मृत्यु प्रमाणपत्र सौंपे थे। यह सभी प्रमाणपत्र कान्हा की ओर से नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में भेजे गए हैं। इसके बावजूद नगर आयुक्त ने गोशाला संचालक को भेजे नोटिस में निगम को इनकी सूचना न होने की बात कही है।